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पतरातू थर्मल एरिया में तैयार दो यूनिट को बंद कर हो रहा जीर्णोद्धार, 400 करोड़ रुपये हुए बर्बाद, शुरू होने में अभी लगेगा और एक साल

प्लांट चालू रहने से राज्य में बिजली संकट की स्थिति भयावह नहीं होती

Ranchi : राज्य में बिजली संकट से लोग परेशान है. हालांकि बीते शुक्रवार से राज्य में बिजली की उपलब्धता थोड़ी बढ़ी है. जिससे बिजली कटौती में कमी देखी गयी. लेकिन राज्य में प्रमुख थर्मल पावर प्लांट है, जो समय से बनते और शुरू होते तो राज्य में बिजली संकट भयावह नहीं होता. पतरातू थर्मल पावर प्लांट भी इन्हीं में से एक है.
जेबीवीएनएल और एनटीपीसी की ज्वाइंट वेंचर कपंनी के रूप में पीवीयूएनएल बनीं. जेबीवीएनएल और एनटीपीसी के बीच साल 2015 में एग्रीमेंट हुआ. लेकिन तब तक पतरातू थर्मल पावर प्लांट में यूनिट नौ और दस बन कर तैयार थी. जिस पर राज्य और केंद्र सरकार के 400 करोड़ रूपये खर्च भी हुए थे. दोनों यूनिट शुरू होने से राज्य को लगभग तीन सौ मेगावाट बिजली मिलती.

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एनटीपीसी ने उसी जगह शुरू किया निर्माण

एनटीपीसी से एग्रीमेंट के बाद, एनटीपीसी ने पूर्व स्थित प्लांटों के स्थान में ही नये प्लांटों का निर्माण किया. जिससे पूर्व से राज्य को मिली रही बिजली बंद हुई. वहीं, बिजली खरीद के लिए अन्य कंपनियों में निर्भरता भी बढ़ी.
साल 2015 में एग्रीमेंट के समय पतरातू थर्मल प्लांट से राज्य को लगभग दो सौ मेगावाट बिजली मिलती थी. वहीं, नौ और दस यूनिट शुरू होने से इसमें वृद्धि होती. जानकारी हो कि जेबीवीएनएल और एनटीपीसी के बीच एग्रीमेंट पावर प्लांट का जीर्णाेद्धार और इस प्लांट को प्रदूषण रहित बनाने के लिए किया गया था.

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2022 में शुरू करने का था लक्ष्य

पावर प्लांट को 2022 में शुरू करने का लक्ष्य रखा गया था. लेकिन अब इसमें और एक साल का समय लगेगा. ऊर्जा विभाग की मानें तो इस प्लांट को शुरू करने के लिये अब 2023-24 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

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2400 मेगावाट पर काम जारी

पावर प्लांट की कुल क्षमता 4000 मेगावाट है. पहले चरण के तहत 2400 मेगावाट पर काम किया जा रहा है. इसमें आठ-आठ सौ मेगावाट के तीन यूनिट बनायी जा रही हैं. हालांकि बिजली उत्पादन का लक्ष्य 650 मेगावाट ही रखा गया है. इससे उत्पादित बिजली का 25 प्रतिशत राज्य को मिलेगा. प्लांट शुरू होने पर 1950 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा. जिससे राज्य को लगभग चार सौ मेगावाट बिजली मिलेगी. दूसरे चरण के तहत 1600 मेगावाट में काम किया जायेगा. लेकिन इसमें वक्त लगेगा. कुल प्रोजेक्ट 18000 करोड़ का है.

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