
Ranchi: राज्यसभा चुनाव की घोषणा होते ही झारखंड में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गयी है. सत्तापक्ष के दलों के अपने-अपने दावे हैं. एक तरफ कांग्रेस तो दूसरी तरफ झामुमो सीट को लेकर अपनी दावेदारी ठोक रहा है. दोनों दल पुरानी करार को सामने ला रहे हैं. कांग्रेस का कहना है कि वर्ष 2020 में हमलोगों ने झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन को भेजा था अब इस बार हमारी बारी है. कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे कहते हैं कि पिछली बार झारखंड मुक्ति मोर्चा को मौका मिला था, इसलिए इस बार सहयोगी कांग्रेस की बारी है.
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वहीं, झामुमो की अपनी दलीलें हैं. पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य का कहना है कि ये गठबंधन के दौरान ही तय हो गया था कि राज्यसभा सीट किसका होगा. बतातें चलें कि पिछली बार एक सीट पर शिबू सोरेन और दूसरी सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार शहजादा अनवर चुनाव लड़े थे. लेकिन चुनाव में सत्ता पक्ष से झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन की जीत हुई थी. कांग्रेस और राजद ने झामुमो का समर्थन किया था और सोरेन 30 वोट के साथ चुनाव जीते थे.
झारखंड में दो सीटें खाली हो रही है
झारखंड में भाजपा की दो सीटें खाली हो रही हैं. भाजपा के राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार और मुख्तार अब्बास नकवी रिटायर हो रहे हैं.
क्या है समीकरण
राज्यसभा चुनाव के लिए पहली वरीयता का 28 वोट प्रत्याशी को हासिल करना है. सत्तापक्ष आसानी से इस आंकड़े को पार कर लेगा. वहीं, भाजपा के पास वर्तमान में 26 विधायक हैं. ऐसे में भाजपा को दो वोटों की जरूरत होगी. भाजपा को आजसू व निर्दलीय को अपने पक्ष में करना होगा. जबकि, कांग्रेस को एक सीट का नुकसान हो गया है. बंधु तिर्की की सदस्यता आय से अधिक मामले में चली गयी है. कांग्रेस में शामिल होनेवाले तिर्की इस बार वोट नहीं दे पायेंगे.
झारखंड लोकतांत्रिक मोर्चा पर सबकी टिकेंगी नजरें
सुदेश कुमार महतो और सरयू राय ने झारखंड लोकतांत्रिक मोर्चा बना कर राज्यसभा चुनाव में ट्विस्ट ला दिया है. भाजपा का रास्ता इस मोर्चा के बिना पार नहीं लगने वाला है. इस मोर्चे में आजसू के दो विधायक, निर्दलीय सरयू राय व अमित यादव और एनसीपी के कमलेश सिंह को मिलाकर पांच विधायक हैं. इन पांच विधायकों का वोट किसी भी प्रत्याशी के लिए निर्णायक होगा.
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