
आनलाइन वर्कशॉप कर किया जा रहा अवेयर
टीका लगाने को लेकर डरे हुए थे मरीज
सेक्रेट्री ने विभाग को अलग व्यवस्था करने की रखी मांग
Ranchi: हीमोफीलिया से ग्रसित मरीज भी कोरोना का टीका ले सकते हैं. टीका लगाने से उन्हें किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी,. वहीं, कोरोना की चपेट में आने का रिस्क भी काफी हद तक कम हो जाएगा. यह बातें हीमोफीलिया सोसायटी झारखंड के सेक्रेटरी संतोष जायसवाल ने कही.
इसे भी पढ़ें: वैज्ञानिकों ने खोजी कोरोना के बाद आने वाली महामारी, जानिये किस देश से और कैसे फैल सकती है
उन्होंने कहा कि हीमोफीलिया के मरीजों को इस बात का डर सता रहा है कि कोविड की वैक्सीन उनके लिए सुरक्षित है या नहीं. इसलिए हम लोग वेबीनार के माध्यम से मरीजों और उनके परिजनों को जोड़कर अवेयर करने का काम कर रहे हैं. मरीजों को भरोसा दिलाने के लिए डॉक्टरों से भी ऑनलाइन कंसल्ट कराया जा रहा है ताकि वे लोग भी जाकर अपने नजदीकी सेंटर में कोविड का टीका लगवा सके. बताते चलें कि हीमोफीलिया मरीजों को इंटरनल ब्लीडिंग की प्रॉब्लम होती है और उन्हें हफ्ते में कई बार फैक्टर भी लगाया जाता है. इतना ही नहीं उन्हें तत्काल फैक्टर लगाने की जरूरत होती है जिससे कि ब्लीडिंग को रोका जा सके. इसके लिए रेगुलर हॉस्पिटल का चक्कर भी लगाना पड़ता है तो कोरोना का खतरा अधिक है.
हर ज़िले में अलग काउंटरः
सेक्रेटरी संतोष जायसवाल ने कहा कि हीमोफीलिया के मरीज कमजोर होते हैं. घंटों तक लाइन में खड़े होकर टीका लगाना उनके लिए बड़ी चुनौती है. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग हीमोफीलिया से ग्रसित मरीजों के लिए अलग से काउंटर बनाए जहां पर बिना किसी परेशानी के उन्हें कोविड का टीका मिल सके.
हॉस्पिटल में भी मिले तत्काल ट्रीटमेंट:
उन्होंने प्रधान सचिव महिला, शिशु सुरक्षा एवम समाजिक संरक्षा विभाग झारखंड सरकार को पत्र लिखा है. जिसमें उन्होंने हॉस्पिटल में भी इलाज के लिए अलग इंतजाम करने की मांग की है.
इसे भी पढ़ें: कारोबारी विनोद खोसला भारत को ऑक्सीजन के लिए एक करोड़ डॉलर दान करेंगे
उन्होंने कहा कि हीमोफिलिया एक असाध्य रोग है और मरीजों को और बच्चों को लाइफ सेविंग इंजेक्शन फैक्टर Vlll, IX, Vll लेने के लिए सप्ताह में 2 से 3 बार हॉस्पिटल आना होता है. कोविड की वजह से उन्हें भी वेटिंग में रखा जाता है. ब्लीडिंग अधिक होने के कारण स्थिति बिगड़ जाती है. इसलिए दिव्यांग अधिनियम (RPWD Act)2016 के अन्तर्गत हीमोफिलिया, थैलेसीमिया आदि रक्त संबंधी रोग को दिव्यंगता की श्रेणी में लाया गया है. ऐसे में हीमोफीलिया मरीजों को प्राथमिकता दिया जाए.
इसे भी पढ़ें: हजारीबाग के पूर्व विधायक और बिहार में मंत्री बने एचएच रहमान का निधन




