
Ranchi : रांची बहूबजार स्थित संत पॉल्स कैथेड्रल एक ऐतिहासिक इमारत है. इस चर्च में एक नायाब और ऐतिहासिक चीज है- यह है चर्च का पाइप ऑर्गन. यह पाइप अर्गन करीब 140 साल पुराना है. चर्च में प्रवेश करते ही वेदी के दाहिनी ओर दीवार पर लगे विशाल पाइप आज भी उन लोगों के लिए कौतुहल का विषय है जिन्होंने कभी ऐसी चीज नहीं देखी. वे तब और सम्मोहित हो जाते हैं जब वे इसकी धुन सुनते हैं.
तीस वर्षों तक पड़ा रहा खराब
चर्च में स्थापित होने के बाद ये सालों-साल प्रार्थना के दौरान गाए जानेवाले गीतों का हिस्सा बना रहा. कई बार खराब भी हुआ और इसे बनाया गया. लंबे समय तक अपनी सेवा देने के बाद यह एक बार फिर 1975 में खराब हुआ. लगभग 30 सालों तक किसी ने भी इसकी सुध नहीं ली. 2005 में इसकी मरम्मत करायी गयी. इसके बाद से यह लगातार अपनी मधुर धुन से लोगों को मोहते रहा है.
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राजदीप सिंह बजाते हैं इस ऑर्गन को
बता दें कि 2005 से राजदीप सिंह इस ऑर्गन को बजा रहे हैं. अब इसे सिर्फ रवीवारीय आराधना के दौरान बजाया जाता है या फिर क्रिसमस और ऐसे ही विशेष मौके पर. जब राजदीप सिंह नहीं होते हैं तो एक और महिला वादक है जो इसे बजाती है.

अमेरिका में है दुनिया का सबसे बड़ा पाइप आर्गन
पाइप आर्गन एक विदेशी वाद्ययंत्र है. इस वाद्य यंत्र को चर्च के साथ उसी तरह जोड़ा जाता है जैसे घंटी को मंदिर के साथ. पर ईसाइयत के शुरूआती दौर में, जब चर्च के अंदर आराधना होती थी, तब किसी भी तरह के वाद्य यंत्र नहीं होते थे. लोग सिर्फ भजन गाकर ही ईश्वर की आराधना करते थे. धीरे-धीरे चर्च के अंदर पाइप आर्गन और दूसरे वाद्य यंत्रों का भी प्रयोग होने लगा. वैसे, दुनिया का सबसे बड़ा पाइप आर्गन अमेरिका के फिलाडेलफिया में स्थित एक शॉपिंग मॉल मेसी में लगा है. बताया जाता है कि उसके अंदर तकरीबन 27500 पाइप लगे हैं.
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जर्मनी का हो सकता है यह पाइप आर्गन
संत पॉल्स चर्च रांची अपनी स्थापना से लंबे अरसे तक एंग्लिकन चर्च के साथ संबद्ध रहा. इससे ज्यादातर लोग अनुमान लगाते हैं कि यह ऑर्गन इंग्लैंड में बना होगा. पर इसे बजानेवाले राजदीप सिंह कहते हैं कि यह जर्मनी का हो सकता है वे बताते हैं कि इसकी बनावट और इसके साथ मिले कुछ उपकरणों को देखने से ऐसा ही प्रतीत होता है. यह एक जटिल वाद्य यंत्र है. जिसमें कीबोर्ड को दबाने से इसके बेले (भीतरी हिस्से) में हवा भरती है. ये हवा ही कीबोर्ड पर वादक की उंगलियों के इशारे पर पहले छोटी छोटी पाइपों से होती हुई फिर चर्च की दीवारों पर लगे विशाल पाइप से होकर स्वर लहरियां उत्पन्न करती हैं.
भारत का सबसे पुराना आर्गन शिमला में
भारत में अब ये गिने चुने चर्च में ही उपलब्ध है. सबसे पुराना पाइपऑर्गन शिमला के चर्च में है जबकि दूसरा सबसे पुराना ऑर्गन मेरठ के चर्च में लगा है. रांची के क्राइस्ट चर्च में भी एक पाइप अर्गन है पर वह उतना पुराना नहीं है. अब चर्च में इन पाइप अर्गन की जगह इलेक्ट्रिक कीबोर्ड ने ले ही है.
12 दिसंबर को गूंजेगी इस वाद्ययंत्र की स्वर लहरी
बहरहाल, 12 दिसंबर को एक बार फिर से संत पॉल्स चर्च के इस अनोखे वाद्ययंत्र को सुना जा सकता है. दिल्ली वाइएमसीए के द्वारा आयोजित क्रिसमस कैरोल के कंसर्ट में राजदीप सिंह ओ कम ऑल ये फेथफुल और एंजेल्स वी हैव हर्ड ऑन हाई जैसे गीतों की धुन को सुनायेंगे. इस दौरान क्राइस्ट चर्च मेन रोड में मनीष एक्का और जर्मनी के वादक सहित सिकंदराबाद, बेंगलुरू के पाइप आर्गनिस्ट भी अपनी प्रस्तुतियां देंगे.
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