
Ranchi: मंगलवार को शहर में दो सड़क दुर्घटना हुई है. जिसमें दोनों ही घटना में शामिल लोगों की मौत हो चुकी है. जहां सुबह नगर निगम के कचरा ढोने वाली ट्रक के चपेट में आने से महिला बैंककर्मी की मौत हो गई, वहीं दोपहर में कांटाटोली के पास बिशप स्कूल के बस की चपेट में आने से बच्चे की घटनास्थल पर मौत ही हो गई.
बच्चे का नाम आदित्य है. कांटाटोली पेट्रोल पंप के पास खन्ना टिम्बर का रहने वाला था. बच्चे स्कूटी चलाने समय हेलमेट नहीं पहन रखी थी अगर बच्चे ने हेलमेट पहन रखी होती तो शायद उसकी जान बच सकती थी. घटना के बाद स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर दिया था. वहीं मौके पर पहुंची पुलिस ने बस को कब्जे में ले लिया है.
तेज गति से आ रही बस ने बच्चे को लिया अपनी चपेट में
बताया जा रहा है कि तेज गति से आ रही बिशप स्कूल की बस ने स्कूटी सवार बच्चे को अपनी चपेट में ले लिया. बस का आगे वाला चक्का बच्चे के सिर पर चढ़कर पार हो गया जिससे की बच्चे कि मौके पर मौत हो गई.
बताया जा रहा है कि स्कूल बस में स्पीड गवर्नर नहीं लगा हुआ है. घटना के बाद से बच्चे के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है. वहीं घनटा की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
इसे भी पढ़ें- रांची : अलग-अलग सड़क दुर्घटना में तीन की मौत, चार घायल
अधिकतर स्कूल बसों में नहीं लगे हैं स्पीड गवर्नर
बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर और सीसीटीवी कैमरे लगाने सहित तमाम निर्देश दिए गए थे. जिले में ये आदेश बेमानी साबित हो रहे हैं.अधिकतर बसों में स्पीड गवर्नर नहीं लगे हैं.
अगर किसी ने लगाया भी है, तो वह महज कार्रवाई से बचने के लिए. अधिकतर स्कूल संचालक बच्चों की सुरक्षा को दाव पर लगाए हुए हैं. स्पीड गवर्नर को भी स्कूल संचालकों ने खानापूर्ति का नाम दे दिया है.
निर्देश का नहीं हो रहा पालन
शहर में जितनी भी पुरानी स्कूल बसें चल रही हैं उनमें से अधिकतर बसों में स्पीड गवर्नर डिवाइस नहीं लगाई गई है. जिला प्रशासन स्कूल के बच्चे को लेकर गंभीर नहीं है. परिवहन विभाग के द्वारा सभी स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर डिवाइस लगाने का निर्देश तो दिया गया था, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है.
इसे भी पढ़ें- मेरे खिलाफ आरोप सही साबित हुए तो मैं खुद बुलडोजर चलाने को तैयार हूं: हेमंत सोरेन
ऐसे होता है स्पीड गवर्नर का खेल
वाहनों में दो प्रकार के स्पीड गवर्नर लगते हैं. नए वाहनों में इलेक्ट्रॉनिक स्पीड गवर्नर होते हैं और पुराने वाहनों में डीजल पाइप वाले स्पीड गर्वनर लगते हैं. जो कि ज्यादा स्पीड बढ़ाने पर इंजन में डीजल की सप्लाई रोक देते हैं. लेकिन कई बार बसों की फिटनेस करवाने के बाद इसे निकाल दिया जाता है.
चेकिंग की व्यवस्था नहीं
स्पीड गवर्नर लगाने के नाम पर खानापूर्ति हो रही है. सरकार ने वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य तो कर दिया लेकिन इसे चेक करने के लिए किसी भी तरह का कोई इंतजाम नहीं किया. साथ ही वाहनों में लगे स्पीड गवर्नर की क्वालिटी की जांच भी नहीं की जा रही है. और ना ही किसी पर इस आदेश का पालन नहीं करने पर कोई कार्रवाई की जा रही है.
इसे भी पढ़ें- कैबिनेट के फैसले के बाद कार्मिक विभाग ने जारी की अधिसूचना, स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र अब अंचल अधिकारी भी करेंगे निर्गत
हेलमेट नहीं पहनने के कारण होती है ज्यादातर मौत
सड़कों पर बढ़ती आबादी के साथ-साथ वाहनों की बढ़ती संख्या का बोझ दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है. सड़कें पहले से दुरुस्त भी हो रही है. इससे आवागमन तो सुलभ हुआ है पर सड़कों पर खून के धब्बे भी लगातार बढ़ते जा रहे है.
प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने व घटनाओं में हो रही मौत व जख्मी लोगों की संख्या कम करने को शासन-प्रशासन समेत कई संगठन सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता अभियान भी चलाते हैं.
लेकिन वाहन चलाने वाले लोग उसपर अमल नहीं करते हैं. नतीजा यह होता है कि आये दिन सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं. दो पहिया वाहन चालक कई बार हेलमेट नहीं पहनने का हर्जाना भरते हैं. क्योंकि दुर्घटना में उनकी मौत हो जाती है.
तेज रफ्तार के कारण हो रही हैं दुर्घटनाएं
रांची पुलिस का मानना है कि बसों में रफ्तार लिमिट नहीं होने कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं. अधिकतर दुर्घटना तेज गति के कारण और ड्राइवर के नशे में रहने के कारण होती है. वहीं वाहनों में स्पीड गवर्नर नहीं लगे होने के कारण दुर्घटनाओं में तेजी आई है.




