
Ranchi. सात अक्टूबर से दुर्गा पूजा शुरू है. 15 अक्टूबर तक चलने वाले इस त्योहार के लिये झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने जरुरी निर्देश जारी किये हैं. इसके तहत भक्तों, आम लोगों से नदियों, तालाबों को प्रदूषण मुक्त रखने और मूर्ति विसर्जन के संबंध में सहयोग मांगा है. मूर्ति निर्माण में धार्मिक ग्रंथों में वर्णित प्राकृतिक वस्तुओं के प्रयोग को बढ़ावा देने को कहा है. परंपरागत रूप से चले आ रही व्यवस्था के तहत मिट्टी का ही उपयोग करने पर जोर दिया है. प्लास्टर ऑफ पेरिस और ऐसे अन्य पदार्थों से बनी मूर्तियों के उपयोग से बचने की अपील की है. इसके अलावा मूर्तियों के रंगरोगन में भी सावधानी बरतने को कहा है. रासायनिक के बदले प्राकृतिक रंगों के उपयोग करने को कहा है.
ध्वनि प्रदूषण नियमावली का पालन जरूरी
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के मुताबिक दुर्गा पूजा के दौरान ध्वनि प्रदूषण नियमावली 2000 का अनुपालन जरूरी है. बगैर सक्षम प्राधिकार के लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जायेगा. साथ ही रात 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक सार्वजनिक स्थलों पर इसके उपयोग की मनाही रहेगी. ए कैटेगरी में शामिल औद्योगिक प्रक्षेत्र में सुबह 6 बजे से रात 10 के बीच अगर लाउडस्पीकर बजाया भी जाता है तो दिन में इसकी क्षमता 75 और रात में 70 डेसीबल होनी चाहिये. इसी तरह से बी कैटेगरी (व्यवसायिक प्रक्षेत्र), सी कैटेगरी (आवासीय) और डी कैटेगरी (अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, कोर्ट व अन्य) में अधिकतम 65 डेसीबल (दिन में) और न्यूनतम 40 डेसीबल तक ही ध्वनि सीमा तय की गयी है.
फूल, कपड़ों के विसर्जन से परहेज
विभाग ने विसर्जन के क्रम में पूजा के फूल, कपड़े, प्लास्टिक, कागज को नदी, तालाब में डाले जाने से परहेज करने को कहा है. इन पदार्थों का फिर से उपयोग किये जाने की बात कही है. कपड़ों को स्थानीय अनाथालय में दिये जाने और फूलों तथा गलने वाले पदार्थों का कंपोस्ट के तौर पर उपयोग करने को कहा है. अपघटित नहीं होने वाली सामग्रियों को संग्रहित कर सैनिटरी लैण्ड फिल्स में डालने की अपील की है. मूर्ति विसर्जन के स्थानों को चिन्हित कर घेरे जाने और विसर्जन से पहले विसर्जन स्थल की तलहटी पर सिन्थेटिक लाईनर बिछाने को कहा है. विसर्जन के क्रम में बचे बांस और लकड़ियों को भी फिर से उपयोग में लाने की सलाह दी है.




