
Political Editor
Ranchi: राष्ट्रपति चुनाव को लेकर 29 जून को नामांकन की आखिरी तारीख है. सत्ता पक्ष और विपक्ष की तरफ से प्रत्याशी को लेकर मंथन का दौर जारी है. भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक भी मंगलवार शाम को राष्ट्रपति चुनाव को लेकर होनी है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी बैठक में शामिल होंगे. उम्मीद है कि भाजपा आज अपने प्रत्याशी के नाम का चयन कर ले. इस बीच यह चर्चा जोरों पर है कि इस बार राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा महिला या आदिवासी पर दांव खेल सकती है. ज्यादा उम्मीद यह जताई जा रही है कि भाजपा किसी महिला आदिवासी को राष्ट्रपति प्रत्याशी के रूप में आगे करे.
आदिवासी चेहरे के आलावा भाजपा में महामहिम बनाने की रेस में मुस्लिम, दलित या दक्षिण भारत की किसी हस्ती के नाम पर विचार किया जा रहा है, जिससे 2022-23 में होने वाले विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों को साधने में आसानी हो सके. यह देखना दिलचस्प होगा कि जिन नामों पर चर्चा हो रही है, उनमें से कोई एक नाम सामने आता है या हर बार की तरह इस बार भी पार्टी कोई नया नाम लेकर सामने आती है. भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति की रेस में उत्तरप्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू और छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके शामिल हैं. आनंदी बेन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की करीबी हैं.
अबतक रायसीना हिल नहीं पहुंचा है कोई आदिवासी
देश में अब तक आदिवासी समुदाय का कोई व्यक्ति रायसीना हिल तक नहीं पहुँच पाया है. महिला, दलित, मुस्लिम और दक्षिण भारत से आने वाले लोग राष्ट्रपति बन चुके हैं, लेकिन आदिवासी समुदाय इससे वंचित रहा है. ऐसे में यह मांग उठती रही है कि दलित समाज से भी किसी व्यक्ति को देश के सर्वोच्च पद पर बैठाया जाए. लोकसभा की 543 सीटों में से 47 सीट ST श्रेणी के लिए आरक्षित है. 60 से अधिक सीटों पर आदिवासी समुदाय का प्रभाव है. मध्य प्रदेश, गुजरात, झारखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में आदिवासी वोटर निर्णायक स्थिति में हैं. भाजपा अगले वर्ष होनेवाले विधानसभा चुनावों और 2024 में होनेवाले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर इस बार आदिवासी कार्ड खेल सकती है.
राष्ट्रपति के लिए आधी आबादी पर हो रहा तेजी से विचार
पिछले दो लोकसभा चुनाव परिणाम से यह साफ़ है कि महिलाएं भाजपा के लिए कोर वोट बैंक बन चुकी हैं. इस वोट बैंक को साधने की भाजपा की कोशिश जारी है. बताया जा रहा है कि महिलाओं के नाम पर भी तेजी से विचार किया जा रहा है. इसमें UP की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल शामिल हैं. आनंदी बेन पीएम नरेंद्र मोदी की करीबी मानी जाती हैं.
इसे भी पढ़ें: JAMSHEDPUR : को-ऑपरेटिव कॉलेज में मना योग दिवस, बिष्टुपुर जुस्को स्कूल में बच्चों को कराया गया योगाभ्यास
आनंदी बेन के अलावा झारखण्ड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके भी इस रेस में शामिल बताई जा रही हैं. इन दोनों में से किसी एक को राष्ट्रपति बनाने की स्थिति में भाजपा एक तीर से दो निशाने लगा सकती है. पहला यह कि इससे आदिवासी समाज को साधने में आसानी होगी और दूसरा महिलाओं में भी मैसेज जाएगा.
अनुसइया उइके मूल रूप से छिंदवाड़ा की हैं और 1985 से मध्य प्रदेश से राजनीति में सक्रिय हैं. उन्होंने दमुआ से विधायक का चुनाव जीता था. वह बीजेपी की राज्यसभा सांसद भी रह चुकी हैं. राजनीति में आने से पहले वह छिंदवाड़ा के शासकीय महाविद्यालय में तीन साल तक इकोनॉमिक्स की लेक्चरर भी रही हैं. झारखंड की नौंवी राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के रायरंगपुर से विधायक रह चुकी हैं. वह पहली ओडिया नेता हैं जिन्हें राज्यपाल बनाया गया. इससे पहले बीजेपी-बीजेडी गठबंधन सरकार में साल 2002 से 2004 तक वह मंत्री भी रहीं.
दक्षिण के किसी नेता का भी चमक सकता है सितारा
भाजपा दक्षिण भारत में अपना विस्तार करना चाह रही है. इसके लिए पार्टी दक्षिण भारत से किसी शख्स को राष्ट्रपति बनाकर संदेश देने की कोशिश कर सकती है. ऐसे में आंध्र प्रदेश से आने वाले उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू सबसे मजबूत विकल्प हैं. हालांकि, दक्षिण भारत से आने वाले और भी कुछ नेता हैं, जिनके नाम पर चर्चा चल रही है. भाजपा में मुस्लिम प्रत्याशी को लेकर भी मंथन चल रहा है. केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के नाम की भी चर्चा है, जो UP के बुलंदशहर के रहने वाले हैं. तीन तलाक, CAA जैसे मामलों पर आरिफ हमेशा भाजपा के लिए ढाल बने रहे, लेकिन सूत्रों के मुताबिक उन्हें राष्ट्रपति की बजाय भाजपा उपराष्ट्रपति का प्रत्याशी बना सकती है.
इसे भी पढ़ें: जातीय जनगणना को लेकर नीतीश सरकार ने ब्लू प्रिंट किया तैयार, सरकारी शिक्षक से लेकर जीविका दीदी जनगणना में लेंगी भाग




