
Jamtara : आदिवासी कोल्ह जाति कल्याण समिति के तत्वावधान में सोमवार को गांधी मैदान में 34 वां कोल्ह महासम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन का शुभारंभ समिति के केंद्रीय अध्यक्ष उमानाथ कोल्ह ने ध्वजारोहण कर किया.
सम्मेलन में झारखंड राज्य के विभिन्न जिले व पड़ोसी राज्य के प्रतिनिधि शामिल हुए. मौके पर उमानाथ कोल्ह ने कहा कि भारतीय गणतंत्र के 68 वर्ष बीत जाने के बाद भी कोल्ह जनजाति को आदिम जनजाति का दर्जा नहीं मिल पाया है.
कोल्ह जन जाति के लोग अपनी मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं. कहा कि कोल्ह जाति को जब तक आदिम जनजाति का दर्जा नहीं मिलता है, तब तक इस पिछड़े हुए समाज का विकास नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि कोल्ह जाति का इतिहास काफी पुराना है. आज भी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने पर मजबूर है.

केंद्रीय महासचिव अनिल कोल्ह ने कहा कि आदिम जन जाति का दर्जा देने की मांग को ले समिति वर्षों से आंदोलन कर रही है. मांग को लेकर महासम्मेलन का आयोजन कर राज्यपाल का ध्यान आकृष्ट कराया जा रहा है.
साथ ही क्षेत्र में संगठन सक्रिय हो लोगों में आर्थिक व सामाजिक विकास, शिक्षा एवं संगठन के प्रति जागरूक करने को ले सम्मेलन का आयोजन विभिन्न जिले में किया जा रहा है.
मौके पर हरिकिशोर कोल्ह, छोटू किस्कु कोल्ह, प्रभू कोल्ह, भूमि माझी, पशुपति कोल्ह, नरेश कोल्ह, धनश्याम कोल्ह, चन्द्रेश्वर कोल्ह, शंकर कोल्ह, अर्जून कोल्ह, पवन कोल्ह, बासुदेव कोल्ह, विजय कोल्ह आदि मौजूद थे.
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यह हैं मुख्य मांगें-
- कोल्ह जाति को आदिम जाति का दर्जा यथाशीध्र दिया जाये.
- 2021 की जनगणना में अलग आदिवासी धर्म कोड का कालम हो.
- संविधान की पांचवीं अनुसूची एवं केाल विकास प्राधिकरण को शक्ति से लागू की जाये.
- लुप्त हो रहे कोल्ह की सुरक्षा, बचाव के लिए विशेष व्यवस्था हो.
- मांतो मांझी मंडल के सदस्यों को सरकार सम्मानित करें.
- वनाधिकार कानून को शक्ति से लागू हो.
- कोल्ह जाति के लिए शिक्षण संस्थानों एवं नौकरियों में अलग से आरक्षण की व्यवस्था हो.
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