
Ranchi : राज्य में मत्स्य कृषकों को स्मार्ट बनाने की मुहिम शुरू हुई है. अब डिजिटल सेंसर और ऐप के उपयोग के जरिये उन्हें मॉर्डन मत्स्य किसान बनाने में मत्स्य विभाग मदद करेगा.
कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग (झारखंड सरकार) ने मत्स्य कृषकों की मदद करने का एक नया प्लान बनाया है. इसके तहत उन्हें इंटरनेट आधारित उपकरण (IoT-Internet of Thing) उपलब्ध कराया जायेगा. इस संबंध में अलग-अलग जिलों में मत्स्य पदाधिकारी कार्यालय से सूचना जारी की जाने लगी है.
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ऐसे मिलेगा लाभ
मत्स्य विभाग के मुताबिक राज्य में लगभग डेढ़ लाख मत्स्य कृषक हैं. इनके जरिये सालभर में तकरीबन ढाई लाख मिट्रिक टन मछली का उत्पादन किया जाता है. पर इस आंकड़े को बढ़ा कर मत्स्य उत्पादन में झारखंड को आत्मनिर्भर बनाये जाने की योजना सरकार की है. इसके तहत कई प्रयोग किये जा रहे हैं.
तालाब में पानी की क्वालिटी से मत्स्य उत्पादन पर असर पड़ता है. ऐसे में मत्स्य कृषकों को अनुदान पर इंटरनेट आधारित उपकरण (IoT) उपलब्ध कराया जाना है. जिन कृषकों के पास स्मार्ट फोन है, वे इसका उपयोग करेंगे.
इसके जरिये तालाबों में जल के घुलनशील ऑक्सीजन स्तर (D.O Level), Ph टेंपरेचर औऱ क्षारीयता (Alkalinity) का पता दिन भर लगता रहेगा. ये उपकरण Mobile app based औऱ mobile connectivity पर आधारित होगा. इसके जरिये real time data मिलेगा.
कृषक अपने निवास स्थान से कहीं दूर भी रहे, तब भी उन्हें अपने तालाब से संबंधित जानकारी डिजिटल सेंसर पर आधारित IoT के जरिये मिलती रहेगी.
इनकी मदद से लगातार पानी की क्वालिटी की मॉनिटरिंग करने में मदद मिलेगी. तालाब प्रबंधन का काम आसान होगा. इस आधार पर जरूरत के हिसाब वाटर क्वालिटी के लिए जरूरी उपायों को करने में भी सहायता मिलेगी.
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प्रगतिशील कृषकों को प्राथमिकता
IoT पर अनुमानित लागत लगभग 65,000 रुपये है. इसका 90 फीसदी खर्च राज्य सरकार वहन करेगी. बाकी चयनित कृषकों को वहन करना होगा. मत्स्य विभाग का प्रयास है कि जो प्रगतिशील कृषक हैं, उन्हें पहले इसका लाभ दिया जाये.
ऐसे मत्स्य कृषक जिसके पास 1 से 2 एकड़ रकबा का सदाबहार तालाब हो, साथ ही इस तालाब से सालाना मछली उत्पादन 1000 किग्रा प्रति एकड़ होता हो, उन्हें इससे लाभान्वित किये जाने का प्रयास है. इसके लिए आवेदक के पास स्मार्ट फोन होना जरूरी है. निर्धारित फॉर्मेट में आवेदन करके जिला मत्स्य कार्यालय के पास जमा भी करना होगा.
क्या कहता है विभाग
मत्स्य निदेशक एचएन द्विवेदी कहते हैं कि Internet of Thing मत्स्य कृषकों के लिए लाभकारी साबित होने की उम्मीद है. राज्य सरकार इसके लिए फंड और अन्य सपोर्ट किया जा रहा है.
हर जिले में कम से कम 2-3 कृषकों के पास भी यह सुविधा पहुंचे, इसके लिए प्रयास हो रहा है. तकरीबन 50 लाख रुपये फिलहाल इसके लिए तय किया गया है. कृषक आगे बढ़ कर इसका लाभ लें. उनके लिए विभाग की ओर से लगातार सहयोग मिलता रहेगा.
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