
Asansol/Maithon : बाराबंनी थाना अंतर्गत काशी डांगा के अवैध खदानों की ईसीएल प्रबंधक सेंट्रल सिक्योरिटी इंडस्ट्रीज की तरफ से भराई शुरू दी गयी है. भराई शुरू होने से कोयला माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है.
दरअसल, सीआइएसएफ एक अभियान के तहत बाराबनी में अवैध रूप से चल रहे कोयला खदानों की भराई में लग गयी है. अवैध खदान से लाखों का नुकसान ईसीएल को सहना पड़ रहा है. जबसे झारखंड में आदर्श आचार संहिता लगी है, तब से अवैध खनन ज्यादा ही बढ़ गया है और अवैध कोयला कारोबारियों की कमाई चौगुनी हो गयी है.
आचार संहिता में पुलिस के व्यस्त रहने के कारण धनबाद जिले के निरसा, पंचेत, गलफरबाडी, मुगमा सहित अन्य क्षेत्रों में बेरोकटोक रात के अंधेरे से दिन के उजाले तक कोल तस्कर अवैध कोयले के कारोबार में मस्त हैं.
इससे झारखंड सरकार को प्रतिमाह करोडों के राजस्व की क्षति उठानी पड़ रही है. कोल तस्करी पर अंकुश लगाने वाली स्थानीय पुलिस व सीआइएसएफ मूकदर्शक बनी हुई है. छापेमारी खानापूर्ति बनकर रह गयी है.
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खाकी और खादी का गठजोड़
इस धंधे में खादी व खाकी का मजबूत गठजोड़ बताया जाता है. अवैध कोयले के कारोबार को किसने हरी झंडी दी है, यह क्षेत्र के चौक चौराहों पर चर्चा का विषय बना हुआ है.
क्षेत्र में अवैध कोयले के कारोबार की पुष्टि धनबाद एसएसपी के निर्देश पर एसओजी टीम भी कर चुकी है. निरसा विधायक अरूप चटर्जी भी आमसभा को संबोधित करने के दौरान भाजपा नेता पर आरोप लगाते हुए कह चुके हैं कि पूर्व डीजीपी के समय निरसा से गौ व कोल तस्करी की बोली लगती थी.
इस पर भाजपा नेता भी अपनी सफाई देते हुए निष्पक्ष जांच की बात तक कह चुके हैं.
साइकिल से भी होती है ढुलाई
ईसीएल के तमाम आउटसोर्सिंग व बंद खद्दान इन दिनों अवैध कोल कारोबार का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं जिससे साइकिल, स्कूटर व अन्य वाहनों से अवैध कोयले की ढुलाई हो रही है.
वहीं डिस्को पेपर (फर्जी कागजात) के माध्यम से इन स्थलों से अवैध कोयले को झारखंड व बंगाल सहित देश के कई राज्यों में भेजकर कोल तस्कर दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहे हैं.
जबकि राज्य सरकार को प्रतिमाह करोडों की क्षति उठानी पड रही है.
सूत्र बताते है कि इस धंधे में वर्तमान में बंगाल व झारखंड के सताधारी दल के रिश्तेदार व गुर्गे शामिल हैं जिसका वरीय पुलिस अधिकारियों से मजबूत गठजोड़ बना हुआ है.
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पुलिस से बचने के लिए सत्ताधारी दल का दामन
पुलिस से बचने के लिए सताधारी दल में निरसा विधानसभा क्षेत्र में भी कई तस्कर शामिल हो चुके हैं.
कोल तस्कर चढाते है थानेदारों पर चढावा : अवैध कोयले के कारोबार के संचालन में हैसियत के हिसाब से कोल तस्कर संबंधित थाना व ओपी में पदस्थापित थानेदारों को मूकदर्शक रहने का चढावा चढाते हैं.
पुलिस से उलझने पर जेल गया था तस्कर
अवैध कोल कारोबार के दौरान कई बार पुलिसकर्मियों व कोल तस्करों के बीच तू-तू – मैं-मैं की घटना घट चुकी है.
हाल ही में चिरकुंडा थाना क्षेत्र में चर्चित कोल तस्कर व चिरकुंडा थाना के एएसआइ के बीच हुई झड़प इसका उदाहरण है जिसकी सूचना पीडित एएसआइ द्वारा धनबाद एसएसपी को देने के बाद एसएसपी के हस्तक्षेप के बाद मामला सलटा. कोल तस्कर को जेल की हवा खानी पड़ी थी.
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