West Bengal

#IllegalMining से रानीगंज का भूगोल कहीं इतिहास ना बन जाये : पर्यावरणविद सुभाष

Raniganj : रानीगंज को पश्चिम बंगाल की कोयला राजधानी कहा जाता है. रानीगंज का भूगोल कहीं इतिहास ना बन जाये. जिस प्रकार वैध एवं अवैध तरीके से इस अंचल में कोयला निकाली जा रही है, वह दिन दूर नहीं जब यह रानीगंज सिर्फ इतिहास में ही रह जायेगा.

यह आशंका कोलकाता से आये पर्यावरणविद सुभाष दत्ता ने जाहिर की. उन्होंने पत्रकारों को बताया कि वैध तथा अवैध दोनों ही खनन इस अंचल के लिए नुकसानदेह हैं.

इसे भी पढ़ें : #Dhanbad MP खुलकर कर रहे चंदनकियारी से अमर बाउरी को उतारने की वकालत, AJSU की वजह से है पेच

ओपन कास्ट प्रोजेक्ट बंद करना होगा

ईसीएल ओपन कास्ट प्रोजेक्ट को प्राथमिकता दे रही है जिसे पर्यावरण के लिए किसी भी कीमत पर बंद करना होगा क्योंकि ओसीपी से एक और जहां पर्यावरण नष्ट हो रहा है, वहीं दूसरी ओर भूमि की स्थिति में भी भयावह परिवर्तन हो रहे हैं.

ऐसी स्थिति में अंडर ग्राउंड माइंस को अधिक महत्व देने की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि कोयला उत्तोलन के पश्चात सही ढंग से भूगर्भ की भराई बालू एवं फ्लाई ऐश के माध्यम से होनी चाहिए.

ओसीपी से वायु प्रदूषण बढ़ता है. अवैध खनन अवैज्ञानिक तरीके से किया जाता है जिसमें जान का जोखिम है.

इसे भी पढ़ें : #EconomicSlowdown: अगले 5 महीनों में टाटा मोटर्स 30 दिन और टाटा कमिंस 15 दिन का लेगी ब्लॉक क्लोजर

100 से अधिक एफआइआर

उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने ईसीएल के कुनुस्टोरिया एरिया के महाप्रबंधक अमित कुमार धर से मुलकात भी की. अमित कुमार ने बताया कि अवैध खनन के खिलाफ उन्होंने एक सौ से अधिक एफआइआर करायी है पर कारवाई की जानकारी नहीं.

दत्ता ने कहा कि आने वाली पीढ़ी के लिए हमारा जो दायित्व है उसे निर्वाह करते हुए इस कोयलांचल को बचाये रखना हम सब का कर्तव्य है. यही स्थिति रही तो रानीगंज के भूगोल को इतिहास बनते देर ना लगेगी.

सुभाष दत्ता ने कहा कि रानीगंज अंचल के बचाव के लिए वे शीघ्र ही ग्रीन ट्रिब्यूनल में वे मामला दर्ज करायेंगे. उन्होंने कहा कि जो खनन किया जा रहा है वह खनन टेक्निकल तरीके से होना चाहिए.

इसे भी पढ़ें : फंडिंग होने के बाद भी राज्य में नहीं बांटे गये एक भी सोलर लालटेन, अब फिर दिया गया 18 हजार का ऑर्डर

Related Articles

Back to top button