
Chhaya
Ranchi : खुद में भरोसा और कुछ करने की चाह हो तो कुछ भी असंभव नहीं लगता. कला एक ऐसा क्षेत्र है जहां किसी डिग्री की आवश्यकता नहीं होती, जरूरत होती है तो सिर्फ चाह कि, ड्रेस डिजाइनिंग भी कुछ ऐसा ही क्षेत्र है. रांची की लड़कियां इस क्षेत्र में काफी अच्छा कर रही है. ये लड़कियां अपने क्षेत्र में ना सिर्फ हुनरमंद है बल्कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिये अपने काम के साथ पढ़ाई भी कर रही है. इनमें से कई लड़कियां तो ऐसी भी हैं जो झारखंडी कला को अपने डिजाइन के माध्यम से एक अलग पहचान दे रही हैं. तो कुछ ऐसी हैं जो अपने बिजनेस के साथ समाज सेवा के क्षेत्र में भी कार्यरत है. ऐसे में कहा जा सकता है कि लड़कियां अपने ही क्षेत्र में महारत हासिल कर, समाज के लिये भी कुछ कर रही है. जो इन्हें इनके काम में एक अलग पहचान दिला रही है.
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सोहराई आर्ट में करती हैं ड्रेस डिजाइन
रांची महिला कॉलेज की छात्रा संगीता बारला वर्तमान में फैशन डिजाइनिंग पीजी की छात्रा है. फैशन डिजाइनिंग में बैचलर डिग्री पूरी होते ही संगीता ने इसी क्षेत्र में अपने कैरियर को आगे बढ़ाने की बात सोची. छोटे-छोटे बुटिक से काम करते हुए संगीता ने लालपुर स्थित अपने घर पर ही बुटिक खोला. बुटिक में लोगों को कुछ नया मिले इसके लिये साल 2016 में उसने क्वालिटी कंट्रोल ऑन फैब्रिक पर डिप्लोमा डिग्री ली. इस डिग्री के बाद उसके करियर ने जोर पकड़ा और उसने अपने बुटिक में कपड़ों को झारखंडी पहचान देना शुरू किया. संगीता ने बताया कि यहां के लोग झारखंडी कलाकृति जैसे सोहराई आर्ट आदि को सिर्फ दिवारों या पोस्टर तक ही सीमित रखना जानते थे, लेकिन कपड़े में इसके डिजाइन उकेरने से ये लोगों को काफी पसंद आने लगा. इतना ही नहीं क्वालिटी कंट्रोल ऑन फैब्रिक कोर्स करने के बाद झारखंड में पायी जाने वाली मोटिया कपड़ा, गमछा आदि का भी प्रयोग कर उसने कपड़े डिजाइन करना शुरू किया. संगीता अपने बनाये कपड़ों को सोशल मीडिया के माध्यम से भी प्रमोट करती है. साथ ही अगल-बगल रहने वाली महिलाएं जो कि छोटे-मोटे सिलाई के काम किया करती थी उन्हे भी अपने साथ जोड़कर उनके कमाई का जरिया बन रही हैं.
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मुसीबत में भी नहीं छोड़ी हिम्मत
अरगोड़ा निवासी 23 वर्षीय पूनम कुमारी फैशन डिजाइनिंग में बैचलर डिग्री हासिल कर चुकी हैं. पढ़ाई के दौरान ही पूनम ने अलग-अलग डिजाइनरों के साथ काम सीखा और वर्ष 2012 में अपना बुटिक लालपुर में खोला. लेकिन घर से दूरी होने के कारण उसे बुटिक को कांटा टोली में शिफ्ट करना पड़ा. घर की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उसे कांटाटोली स्थित बुटिक को भी बंद करना पड़ा. जिसके बाद उसने अपने घर से ही बुटिक चलाना शुरू किया. पूनम ने बताया कि जब उसका बिजनेस अच्छा चलने लगा तो उसने अपना वर्कशॉप हिंदपीढ़ी में खोला. जहां उसके डिजाइनिंग का अधिकांश काम पूरा होता है. वर्तमान में पूनम महिला कॉलेज में फैशन डिजाइनिंग में पीजी की छात्रा है. अपने डिजाइन किये हुए कपड़ों की जानकारी देते हुए उसने बताया कि यहां के लोगों में डिजाइन किये हुए कपड़ों के बारे में जानकारी कम है. ऐसे में लोगों को ध्यान में रखते हुए कपड़े डिजाइन किए जाते हैं. ऑर्डर आने पर लोगों के अनुसार डिजाइन किया जाता है. पूनम के द्वारा डिजाइन किए हुए कपड़ों में प्रिंटिंग और इंबोजिंग इफेक्ट देखने को मिलते हैं. पूनम ने कहा कि वर्तमान में इनके वर्कशॉप में लगभग दस कारीगर कार्यरत हैं.
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डिजाइनिंग के साथ कर रही हैं समाज सेवा
22 वर्षीय ग्रेस ब्रिजेट धान 19 साल की कम उम्र से ही से अपना बिजनेस चला रही हैं. आईआईएफडी से फैशन डिजाइनिंग करने के बाद इन्होंने फैशन डिजाइनिंग में अपने कैरियर की शुरूआत की. छोटे पैमाने पर डिजाइनिंग करते हुए इन्हें फोटो शूट आदि के ऑफर आने लगे. इसी दौरान इन्हें मॉडलिंग करने का ऑफर मिला. जहां से इनके कैरियर ने जोर पकड़ा. खुद ग्रेस ने बताया कि फैशन डिजाइनिंग करते हुए इन्होंने 19 साल की उम्र में अपने पैसे से कार खरीदी. जिसके बाद ग्रेस ने राज्य का प्रतिनिधित्व दिल्ली और मुंबई जैसे स्थानों पर किया और कई अवॉर्ड भी अपने नाम किए. ग्रेस ने बताया कि राज्य में लोगों के बीच डिजाइन किये हुए कपड़ो की अधिक जानकारी नहीं है. ऐसे में लोगों की पंसद को ध्यान में रखते हुए कपड़े डिजाइन करने होते है. ग्रेस ने बताया कि पिछले दो वर्ष से वह आरंभ भारत नामक एनजीओ के साथ जुड़कर समाज सेवा के क्षेत्र में काम कर रही है. एनजीओ में उसके साथ कई युवा काम करते हैं. उसने बताया कि आरंभ भारत के साथ जुड़कर उसने काफी कुछ सीखा. एनजीओ मुख्यता बाल शिक्षा और स्वच्छता के क्षेत्र में कार्य करती है, जहां ये बच्चों को शिक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूक करती है.


मुसीबत में भी नहीं छोड़ी हिम्मत



