
Lucknow : उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होनेवाले महत्वपूर्ण चुनाव में भाजपा को नेहरू-गांधी परिवार से तिहरी चुनौती मिलने वाली है. एक तरफ कांग्रेस में राहुल गांधी जिनके अध्यक्ष बनने की इबारत लिखी जाने लगी है और प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में दिन ब दिन अपनी सक्रियता बढ़ाती जा रही हैं, दोनों ही लगातार भाजपा पर हमलावर हैं.
वहीं इंदिरा गांधी परिवार के तीसरे वारिस वरुण गांधी ने भी बहुत ही सुनियोजित तरीके से अपनी पार्टी की केंद्र और यूपी सरकार के खिलाफ अघोषित मोर्चा खोल दिया है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर एक बेहद शोधपूर्ण किताब लिखने वाले वरुण गांधी अब खेती-किसानी के मुद्दे पर अपनी ही पार्टी की केंद्र और राज्य प्रदेश सरकार पर लगातार निशाना साध रहे हैं.
पिछले लंबे समय से गांधी परिवार के इन वारिसों को एकजुट करने का सपना संजोने वाले कुछ सूत्रधारों की कोशिश फिर तेज हो गई है कि देर-सबेर इन्हें एक साथ लाया जाए.
इस सिलसिले में राहुल और प्रियंका से वरुण को साथ लेकर भाजपा से मोर्चा लेने की बात कुछ ऐसे लोग कर रहे हैं जिनका राजनीति से सीधे कोई लेना-देना नहीं है.
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कांग्रेस प्रवक्ता टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर वरुण की कर रहे हैं तारीफ
यह जानकारी देने वाले सूत्रों का कहना है कि जिस तरह कांग्रेस प्रवक्ता टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर खुलकर वरुण गांधी की सराहना कर रहे हैं, वह इस बात का बड़ा संकेत है कि पार्टी नेतृत्व को अब तीसरे गांधी से वैसा परहेज नहीं है जैसा पहले था.
कांग्रेस नेतृत्व के करीबी माने जाने वाले कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक टीवी चैनल पर भाजपा प्रवक्ता को चुनौती देते हुए कहा कि वरुण गांधी के पास जमीर है इसलिए वह किसानों के हक की बात कर रहे हैं, जबकि दूसरे भाजपा नेताओं के पास जमीर नहीं है.
प्रियंका गांधी के सलाहकार आचार्य प्रमोद कृष्णम तो लगातार वरुण की तारीफ सोशल मीडिया में कर रहे हैं. कृष्णम ने किसानों को लेकर किए गए वरुण के हर ट्वीट और बयान को सराहा और उसका स्वागत किया है. कांग्रेस के कुछ नेताओं ने फोन करके भी वरुण को उनके इन तेवरों के लिए बधाई दी है.
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पार्टी में अंसतोष को थामा
जहां पंजाब उत्तर प्रदेश की घटनाओं और राजस्थान, छत्तीसगढ़ में पार्टी के असंतोष को थामने से कांग्रेस में पार्टी के नए नेतृत्व राहुल प्रियंका का दबदबा बढ़ा है, तो किसानों के पक्ष में वरुण के खुलकर उतरने से परिवार के इस तीसरे गांधी की लोकप्रियता में भी इजाफा हो रहा है.
सियासी हलकों में यह सवाल आम है कि क्या ये तीनों गांधी आने वाले दिनों में एक साथ दिखाई देंगे और अगर ऐसा हुआ तो प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की शक्ति से संपन्न जेपी नड्डा के नेतृत्व वाली भाजपा को एक बार फिर इंदिरा गांधी की विरासत से सियासी जंग में जूझना पड़ेगा.
हालांकि अभी कुछ भी निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन सियासी अखाड़े के कुछ महारथियों ने गांधी परिवार को एकजुट करने की कोशिशें शुरू भी कर दी हैं.
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वरुण गांधी ने अभी तक इस मामले में नहीं दी है कोई राय
राजीव गांधी के जमाने से परिवार के करीबी सूत्रों के मुताबिक कोई और नहीं बल्कि खुद प्रियंका गांधी भी चाहती हैं कि छोटे भाई वरुण की घर वापसी हो और वह कांग्रेस में आकर न सिर्फ परिवार औऱ पार्टी को ताकत दें, बल्कि भाजपा और मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष की धार को भी मजबूत करें.
पिछले कुछ महीनों से कांग्रेस के भीतर और बाहर का घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर जबरदस्त मंथन और उतार चढ़ाव का दौर चल रहा है.
वरुण गांधी ने अभी तक इस मामले में कोई राय नहीं जाहिर की है. लेकिन उनके एक करीबी सूत्र के मुताबिक पिछली बार के अनुभव को देखते हुए वरुण गांधी इस बार कांग्रेस को लेकर कोई उतावलापन नहीं दिखाएंगे.
अगर कोई ठोस पहल कांग्रेस नेतृत्व की तरफ से होती है तब वह उस पर विचार करेंगे. वहीं वरुण को कांग्रेस में लाकर इंदिरा गांधी परिवार को एकजुट करने के प्रयास में लगे पार्टी और परिवार के एक पुराने वफादार का कहना है कि कोशिश है कि उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले इसे अंजाम दे दिया जाए, लेकिन वरुण गांधी के करीबी सूत्रों के मुताबिक उन्हें अभी इसकी कोई बहुत जल्दी नहीं है.
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