
Nikhil Kumar
Ranchi: झारखंड सरकार ने निजी सुरक्षा अभिकरणों के प्रशिक्षण ढाँचे में बड़ा सुधार करते हुए एक नई और व्यापक अधिसूचना जारी की है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी इन संशोधित नियमों में प्रशिक्षण की अवधि को बढ़ाया गया है, पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधुनिक बनाया गया है और मॉनिटरिंग व्यवस्था को अधिक सख्त किया गया है। सरकार का कहना है कि निजी सुरक्षा क्षेत्र को अब पेशेवर, तकनीकी रूप से सक्षम और उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएँ प्रदान करनी होंगी।
नए नियम — क्या बदलेगा?
निजी सुरक्षा अभिकरण (रेगुलेशन) अधिनियम, 2005 और झारखंड निजी सुरक्षा अभिकरण (रेगुलेशन) नियमावली, 2023 में संशोधन के बाद अब सभी सुरक्षा गार्ड, पर्यवेक्षक और लाइसेंसधारी नए नियमों के दायरे में आएंगे। इसके तहत:
नियुक्ति से पहले पूर्ण प्रशिक्षण अनिवार्य
प्रशिक्षण में व्यावहारिक अभ्यास, फील्ड-ड्रिल और तकनीकी उपकरणों के प्रयोग पर विशेष जोर
सभी अभिकरणों को प्रशिक्षण संबंधी जानकारी सरकार को उपलब्ध करानी होगी
बिना मान्यता प्राप्त संस्थान प्रशिक्षण नहीं दे सकेंगे
ट्रेनिंग अवधि बढ़ी — अब अधिक कठोर और व्यावहारिक
सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के लिए प्रशिक्षण अवधि को पुनर्गठित किया है:
क्र. प्रशिक्षण श्रेणी अवधि आधार
1 लाइसेंसधारी 6 कार्य दिवस नियम 4 (2), 4 (3)
2 प्रवेश स्तर गार्ड/पर्यवेक्षक 20 दिन — 100 घंटे कक्षा + 60 घंटे फील्ड नियम 8 एवं 10
3 भूतपूर्व सैनिक/पूर्व पुलिसकर्मी 7 दिन — 40 घंटे कक्षा + 16 घंटे फील्ड नियमावली अनुसार
4 नक्सल प्रभावित जिलों के गार्ड 2–3 माह नियमावली 2020
सरकार का मानना है कि बढ़ी हुई अवधि से संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा क्षमता में वास्तविक सुधार होगा।
आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल लागू
नया पाठ्यक्रम राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप तैयार किया गया है।
परिशिष्ट-I (सुरक्षा गार्ड): CCTV मॉनिटरिंग, तकनीकी उपकरणों का उपयोग, भीड़ प्रबंधन, आपात प्रतिक्रिया ड्रिल
परिशिष्ट-II (पर्यवेक्षक): नेतृत्व प्रशिक्षण, जोखिम मूल्यांकन, ऑन-ग्राउंड संचालन प्रबंधन
परिशिष्ट-III (लाइसेंसधारी): कानूनी प्रावधान, नियामकीय अनुपालन, अभिकरण प्रबंधन
देशभर में मान्य प्रमाणपत्र
प्रशिक्षण के बाद अभ्यर्थियों को फॉर्म VIII में प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा, जो अन्य राज्यों में भी मान्य होगा। इससे निजी सुरक्षा कर्मियों के रोजगार के अवसर और बढ़ेंगे।
निगरानी और सख्त — हर दो वर्ष में ऑडिट अनिवार्य
नियामक प्राधिकारी नियमित निरीक्षण करेंगे, जबकि प्रशिक्षण संस्थानों का दो वर्ष में एक बार अनिवार्य ऑडिट होगा। सभी अभिकरणों को सफल अभ्यर्थियों की सूची भी विभाग को उपलब्ध करानी होगी।




