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बहुचर्चित MLA अशोक सिंह हत्याकांड में प्रभुनाथ को होगी जेल या मिलेगी राहत, 3 मार्च को आयेगा फैसला

Ranchi: झारखंड हाई कोर्ट में तीन मार्च को प्रभुनाथ सिंह की किस्मत का अहम फैसला होगा. हाईकोर्ट तय करेगी कि विधायक अशोक सिंह हत्याकांड में बिहार के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह जेल में रहेंगे या आजाद होंगे.

विधायक अशोक सिंह हत्यांकांड में तीन मार्च को हाईकोर्ट अपना निर्णय सुनाएगी. इस मामले में निचली अदालत से मिली आजीवन कारावास की सजा काट रहे प्रभुनाथ सिंह फिलहाल रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल में बंद हैं.

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याचिका पर टल गया था फैसला

बिहार के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह, उनके भाई दीनानाथ सिंह और रितेश सिंह की अपील याचिका पर बीते 24 फरवरी को फैसला टल गया था. जस्टिस एके गुप्ता व जस्टिस राजेश कुमार की अदालत अब इस मामले में तीन मार्च को सजा सुनाएगी. पूर्व में तीनों की अपील याचिका पर सुनवाई पूरी होने बाद झारखंड हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

दिवंगत विधायक अशोक सिंह (फाइल फोटो)

24 फरवरी को फैसला सुनाया जाना था. लेकिन अपरिहार्य कारणों से फैसला नहीं सुनाया जा सका था. ज्ञात हो कि मशरख विधायक अशोक सिंह हत्याकांड में हजारीबाग की निचली अदालत ने पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह और उनके भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. निचली अदालत की सजा के खिलाफ तीनों ने हाई कोर्ट में अपील की है.

दिवगंत अशोक सिंह की पत्नी ने की है फांसी की मांग

मशरख के दिवंगत विधायक अशोक सिंह की पत्नी चांदनी देवी को पूर्व सांसद व आरजेडी नेता प्रभुनाथ सिंह को फांसी की सजा मिलने की उम्मीद है. विधायक की पत्नी चांदनी देवी की लिखी एक चिट्ठी वायरल हुई थी.

दिवंगत विधायक अशोक सिंह की पत्नी चांदनी देवी ने की दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग (फाइल फोटो)

इस चिट्ठी में उन्होंने लिखा था कि ‘मैं एक ऐसी अबला नारी हूं, जो पिछले 25 वर्षों से पति व मशरख के तत्कालीन विधायक अशोक सिंह के हत्यारे को फांसी दिलाने के लिए जंग लड़ रही हूं, किंतु जंग अब भी अधूरा है.’

चांदनी देवी ने चिट्ठी में कहा था कि उनके पति अशोक सिंह ने हत्या के दिन ही तत्कालीन डीजीपी और सारण के एसपी पत्र लिख कर प्रभुनाथ सिंह द्वारा हत्या किये या कराये जाने की आशंका जताते हुए सुरक्षा की गुहार लगायी थी.

हत्या से तीन घंटे पहले DGP को लिखा था पत्र

3 जुलाई, 1995 को अशोक सिंह ने अपनी हत्या से तीन घंटे पहले तत्कालीन डीजीपी और सारण के एसपी पत्र लिख कर प्रभुनाथ सिंह के द्वारा हत्या कराने की बात कहीं थी.

इसके तीन घंटे बाद ही विधायक अशोक सिंह की पटना में स्ट्रैंड रोड स्थित सरकारी आवास में बम मार कर उस वक्त उनकी हत्या कर दी गई जब वो लोगों से मिल रहे थे.

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हजारीबाग कोर्ट ने प्रभुनाथ को ठहराया है दोषी

हजारीबाग की अदालत ने 18 मई 2017 को पूर्व सांसद और आरजेडी नेता प्रभुनाथ सिंह को 25 वर्ष पूर्व हुए विधायक अशोक सिंह की हत्या के मामले में दोषी करार दिया था.

अदालत के दोषी करार दिए जाने के बाद प्रभुनाथ सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया था. हजारीबाग जिले की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने प्रभुनाथ सिंह, उनके भाई दीनानाथ सिंह और रितेश सिंह को इस मामले में दोषी ठहराया.

अशोक सिंह 1995 में बिहार में मशरख निर्वाचन क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए थे. उन्होंने प्रभुनाथ सिंह को हराया था. इस चुनावी जीत के 90 दिन बाद ही उनकी हत्या कर दी गई. 1995 में प्रभुनाथ सिंह जनता दल में थे और बाद में वह जनता दल (युनाइटेड) शामिल हो गए थे.

प्रभुनाथ ने खुले तौर पर कहा था अशोक सिंह की 90 दिनों के भीतर हत्या कर दी जाएगी

मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, अशोक सिंह के भाई तारकेश्वर सिंह ने मीडिया को बताया था कि उनके भाई ने 1995 में प्रभुनाथ सिंह को चुनाव में हरा दिया था.

इसके बाद प्रभुनाथ ने खुले तौर पर कहा था कि अशोक सिंह के विधायक बनने के 90 दिनों के भीतर उसकी हत्या कर दी जाएगी और 90 दिन बाद 3 जुलाई, 1995 को पटना में उनके सरकारी आवास में बम मार कर उनकी हत्या कर दी गई.

अशोक सिंह की हत्या के बाद उनकी पत्नी चांदनी देवी ने प्रभुनाथ सिंह और उनके दो भाइयों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था. इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर बिहार से झारखंड की हजारीबाग अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था.

हत्याकांड में शामिल फरार अपराधियों को 25 साल बाद भी गिरफ्तार नहीं कर पायी पटना पुलिस

मशरख के पूर्व विधायक अशोक सिंह हत्याकांड में शामिल फरार अपराधियों को हत्या के 25 साल बाद भी पटना पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पायी. पुलिस ने अपनी फाइल में इन्हें भगोड़ा घोषित कर रखा है. भगोड़ा घोषित किये गये अपराधियों के खिलाफ स्थायी वारंट बहुत पहले ही जारी कर दिया गया है.

कोर्ट के जानकार सूत्र बताते हैं कि पहले समन जारी किया जाता है. उसके बाद गैर जमानती वारंट कोर्ट से जारी होता है. उसके बाद धारा 82 व 83 के तहत कुर्की की कार्रवाई होती है.

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विधायक हत्याकांड में वैशाली के सुधीर सिंह, विजय सिंह, छोटे मिस्त्री, कारू सिंह फरार अपराधी हैं. अशोक सिंह की हत्या 3 जुलाई 1995 को हुई और पुलिस ने 89 दिनों में 30 सितम्बर को प्रभुनाथ सिंह के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी. इस हत्याकांड के अन्य आरोपितों के खिलाफ पुलिस ने 1996 के 20 नवंबर को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी.

मशरख के तत्कालीन MLA रामदेव सिंह काका की हत्या के बाद चर्चा में आए थे प्रभुनाथ

अशोक सिंह हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह का राजनीतिक करियर 1985 से शुरू हुआ था. विधायक बनने से पहले वह मशरख के तत्कालीन विधायक रामदेव सिंह काका की हत्या के बाद चर्चा में आए थे. काका की हत्या का आरोप उनपर भी लगा था. हालांकि बाद में कोर्ट से वे बरी हो गए थे,लेकिन उनके भाई दीना सिंह को सजा हुई थी.

काका की हत्या के बाद 1980 में विधानसभा चुनाव हुआ था. जिसमें काका के पुत्र डा.हरेंद्र किशोर सिंह चुने गए. इसके बाद 1985 में चुनाव हुआ, जिसमें प्रभुनाथ सिंह निर्दलीय प्रत्याशी बने. प्रभुनाथ सिंह ने स्व. रामदेव सिंह उर्फ काका के पुत्र व कांग्रेस प्रत्याशी हरेंद्र किशोर सिंह को हराकर मशरख सीट पर कब्जा जमाया.

1990 में प्रभुनाथ सिंह जनता दल के टिकट पर दोबारा चुनाव जीत गए.1995 के विधानसभा चुनाव में जनता दल का टिकट अशोक सिंह को मिल गया और प्रभुनाथ सिंह बिहार पीपुल्स पार्टी (बीपीपा) की टिकट से चुनाव लड़े. इस चुनाव में वह अशोक सिंह से हार गये.
विधानसभा चुनाव हुए अभी 90 दिन भी नहीं हुए थे कि 3 जुलाई 1995 को शाम 7.20 बजे पटना के स्ट्रैंड रोड स्थित विधायक आवास में अशोक सिंह की बम मारकर हत्या कर दी गई. हत्या में प्रभुनाथ सिंह, उनके भाई दीनानाथ सिंह तथा मशरख के रितेश सिंह को नामजद अभियुक्त बनाया गया.

अशोक सिंह की हत्या के बाद जब 1995 में उपचुनाव हुआ.इसमें अशोक सिंह के भाई तारकेश्वर सिंह चुनाव जीते. तब से प्रभुनाथ सिंह ने कभी विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा.

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