Main SliderRanchi

घाटा-घाटा-घाटा… लोन-लोन-लोन…झारखंड बिजली निगम फिर मांग रहा 1800 करोड़ का लोन

पटरी पर नहीं लौट पा रही है बदहाल जेबीवीएनएल कं.

गठन के वक्त केंद्र की उदय योजना के तहत मिला था 5534 करोड़ का लोन

पिछले पांच साल में समय-समय पर दिया गया 30 हजार करोड़

डीवीसी, टीयूवीएनएल समेत अन्य बिजली उत्पादक कपंनियों का है बकाया

हर महीने बिजली खरीद पांच सौ करोड़ और वसूली मात्र 300 करोड़ तक

Chhaya

Ranchi: आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत जेबीवीएनएल को 1800 करोड़ लोन की स्वीकृति मिली है. वित्त विभाग ने इस लोन की स्वीकृति दे दी है. बिजली जेनरेटर कंपनियों के बकाया को देखें तो जेबीवीएनएल लगभग 12 हजार करोड़ के घाटा में है.

वर्तमान बकाया देखें तो डीवीसी का 5608 करोड़, टीयूवीएनएल का लगभग 5200 समेत अन्य बिजली उत्पादक कंपनियों का बकाया है.

ऊर्जा विभाग के वरीय सूत्रों की मानें तो आत्म निर्भर भारत योजना के तहत जेबीवीएनएल को राज्य सरकार से यह लोन लेने की अनुमति मिली है, तो भी इस लोन की जिम्मेवारी राज्य सरकार पर आयेगी. क्योंकि पिछले पांच साल में जेबीवीएनएल ने अपनी राजस्व वसूली समेत अन्य संसाधनों को मजबूत नहीं किया है. बता दें जेबीवीएनएल ने पूर्व में 5600 करोड़ लोन की स्वीकृति वित्त विभाग से मांगी थी. जिसके बाद वित्त विभाग ने 1800 करोड़ लोन की स्वीकृति दी.

इसे भी पढ़ेंः Breaking : लाल हुए लालू, चाईबासा कोषागार मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने दी जमानत

उदय योजना से मिले थे 5534 करोड़

साल 2015 में पूर्व सरकार ने बिजली बोर्ड का विभाजन करते हुए जेबीवीएनएल समेत अन्य निगमों का गठन किया. इसके साथ ही जेबीवीएनएल को उदय योजना के तहत 5534 करोड़ रूपये का लोन दिया गया. यह लोन केंद्र सरकार की ओर से मुख्य रूप से बिजली बोर्ड के बकाया भुगतान को खत्म करने के लिये दिया गया था.

जेबीवीएनएल को गठन के साथ लक्ष्य दिया गया कि वो अपने राजस्व वसूली के साथ निगम को मजबूत करेगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. साल 2017 से लगातार डीवीसी समेत अन्य बिजली जेनरेटर कंपनियों का बकाया रहा. इन कंपनियों ने निगम और ऊर्जा विभाग को लगातार पत्र लिखा. उदय योजना के बाद भी पिछले पांच साल में राज्य और केंद्र सरकार स्तर पर लगभग 30 हजार करोड़ अनुदान दिया गया. यह अनुदान पांच साल में समय-समय पर दिया गया. इसके बाद भी जेबीवीएनएल घाटे में है.

बिजली खरीद पांच सौ करोड़ और वसूली मात्र 300 करोड़

जेबीवीएनएल हर महीने 500 करोड़ की बिजली खरीदती है. ये बिजली डीवीसी, टीयूभीएनएल समेत अन्य बिजली उत्पादक कंपनियों से ली जाती है. जबकि जेबीवीएनल की राजस्व वसूली औसतन 300 करोड़ रहती है. जबकि सिर्फ डीवीसी से हर महीने 200 करोड़ की बिजली ली जाती है. बता दें कोरोना के बाद से जेबीवीएनएल के राजस्व वसूली में कमी आयी है. वर्तमान सरकार ने श्वेत पत्र जारी करते हुए मुख्य रूप से जेबीवीएनएल के घाटे का जिक्र किया था. सरकार के अनुसार, जेबीवीएनएल और संचरण की योजनाओं और बकाये का दायित्व जोड़ा जाये तो कुल 21 हजार करोड़ रूपये से भी अधिक होगा.

इसे भी पढ़ेंः नहीं कम होगी आपकी EMI, आरबीआई ने रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव

लॉकडाउन के बाद राजस्व वसूली में कमी

मार्च में केंद्र सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा की. लेकिन फरवरी महीने से जेबीवीएनएल के राजस्व वसूली में असर देखा गया. जेबीवीएनएल के पास 44 लाख उपभोक्ता है. फरवरी महीने में 46 लाख 460 रूपये बिलिंग का टारगेट रखा गया. इस महीने वसूली मात्र 29 लाख की हुई. मार्च में 22 लाख 668 रूपये वसूली की गयी. वहीं अप्रैल में 300 करोड़ के टारगेट में 90 करोड़ की वसूली की गयी. जेबीवीएनएल के अनुसार जून महीने के बाद से राजस्व वसूली में बढ़ोतरी हुई है.

इसे भी पढ़ेंः बेरमो और दुमका विधानसभा सीट के लिए उपचुनावी दंगल आज से शुरू, मधुपुर पर अभी इंतजार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button