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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जनसुनवाई: लोगों ने कहा– माइनिंग के लिए अंधाधुंध तरीके से काटे जा रहे हैं पेड़

Dhanbad : टाटा के झरिया डिविजन के जामाडोबा कालीमेला में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से टाटा के कमेटी सेंटर में जन सुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

इस अवसर पर उपस्थित लोगों टाटा कंपनी से स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग की. उन्होंने कहा कि टाटा कंपनी स्वास्थ्य शिविर लगाकर हम लोगों के स्वास्थ्य की जांच करे तो उसे पता चलेगा कि हमलोग प्रदूषण के कारण किन-किन बीमारियों से जूझ रहे हैं.

उन्होंने कहा कि कंपनी को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि हमलोग कैसे स्वस्थ रहेंगे.

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सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए अधिकारी करते हैं पौधरोपण

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से आयोजित जन सुनवाई में स्थानीय लोगों ने कहा कि माइंस लगाने के दौरान कंपनियां पर्यावरण को बचाने के लिए पौधरोपण करती है लेकिन ये पौधे बचते नहीं हैं.

क्योंकि कंपनी की ओर से पौधों को लगाकर वैसे ही छोड़ दिया जाता है. इसकी देखरेख सही तरीके से नहीं की जाती है.

स्थानीय लोगों ने बताया कि कंपनियों के अधिकारी सिर्फ और सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए पौधरोपण करते हैं. इसके बाद वे इसे भूल जाते हैं.

उन्होंने कहा कि माइनिंग के लिए अंधाधुंध तरीके से पेड़-पौधों को काटा जा रहा है. जिस कारण क्षेत्र में प्रदूषण चरम पर है. अब तो आलम यह है कि झरिया के देश के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में नंबर एक पर है.

प्रदूषण के कारण लोगों को तरह-तरह की बीमारियां हो रही हैं. बिना तिरपाल ढंके ट्रकों और डंपरों द्वारा कोयला की ट्रांसपोर्टिंग की जाती है. सड़कों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव नहीं किया जाता है.

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खुली खदानों के कारण चरम पर पहुंचा प्रदूषण

स्थानीय लोगों ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए कंपनियों को जिम्मेदारी लेनी होगी. स्थानीय लोगों ने टाटा कंपनी की चर्चा करते हुए कहा कि टाटा चूंकि अंडर ग्राउंड माइनिंग करती है इसलिए उससे कम प्रदूषण फैलता है.

लेकिन खुली खदानों के कारण प्रदूषण क्षेत्र में चरम सीमा पर पहुंच गया है. इसके बावजूद कोयला की ट्रांसपोर्टिंग भी मनमाने तरीके से की जाती है.

नियम– कानून को ताक पर रख दिया जाता है, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है.

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