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बाबूलाल मरांडी के बीजेपी में शामिल होने के बाद…

Akshay Kumar Jha

Ranchi: बाबूलाल मरांडी सोमवार को बीजेपी के दूसरे सबसे ताकतवर और देश के गृहमंत्री अमित शाह की हाजिरी में पूरे लाव लश्कर के साथ शामिल हो गये.

बाबूलाल मरांडी की तरफ से इस कार्यक्रम को झारखंड विकास मोर्चा का बीजेपी में विलय कहा जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ झाविमो के बाकी दो विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की भी कांग्रेस में शामिल हो गये. यानी अब झारखंड में झाविमो का वजूद पूरी तरह से खत्म हो चुका है.

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इस बीच सवाल यह उठ रहा है कि झारखंड बीजेपी में बाबूलाल मरांडी के शामिल होने के बाद क्या होगा. मोटे तौर पर अभी तक पार्टी के दो केंद्र बिंदु थे. एक केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास. ऐसे में 14 साल के वनवास के बाद बाबूलाल का बीजेपी में आना और पार्टी का सबसे बड़ा नेता बन जाना इतना सहज नहीं होनेवाला है.

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केंद्र का चाबुक तय करेगी प्रदेश बीजेपी की दशा और दिशा

जाहिर तौर पर बाबूलाल मरांडी के बीजेपी में शामिल हो जाने से बीजेपी में अब तीन बड़े चेहरे हो गये. रघुवर दास, अर्जुन मुंडा और बाबूलाल मरांडी. अर्जुन मुंडा की राज्य में राजनीति एक शांत आंदोलनकारी की तरह है. लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उनकी पकड़ पार्टी में पहले से मजबूत हुई है.

वहीं रघुवर दास खुद का चुनाव हारने और पार्टी को बुरी तरह प्रदेश में हराने के बाद भी पार्टी के सबसे दिग्गज नेता हैं. दो खेमे में बंटी बीजेपी में बाबूलाल मरांडी को अब अपना खेमा तैयार करना है. जब वो बीजेपी में थे, तो मजबूत थे. लेकिन उस वक्त का राजनीतिक समीकरण और अभी के राजनीतिक समीकरण बिलकुल अलग हैं.

रघुवर राज से पार्टी अभी जस्ट आजाद हुई है. रघुवर राज में कार्यकर्ताओं के सामने कोई ऑप्शन नहीं था. लेकिन अब उनके पास बाबूलाल मरांडी नाम का एक ऑप्शन है. अब तीन खेमे में बंट चुकी झारखंड बीजेपी क्या करेगी ये सबकुछ पार्टी के केंद्रीय रुख पर निर्भर करता है. जब तक केंद्र का चाबुक पार्टी पर चलता रहेगा, पार्टी में मजबूती दिखेगी. लेकिन जैसा ही केंद्र की पकड़ पार्टी पर कमजोर पड़ेगी, पार्टी तीन दिशा में भागेगी. जिसका सीधा असर पार्टी की प्रदेश में पकड़ पर पड़ेगा.

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बाबूलाल के नहीं हम अमित शाह के स्वागत में आये हैं: एक पूर्व मंत्री

अभी बाबूलाल मरांडी के पार्टी में आये बमुश्किल चंद घंटे हुए हैं और पार्टी में मतभेद साफ तौर से दिख रहा है. प्रभात तारा मैदान में झाविमो के बीजेपी में विलय कार्यक्रम के बाद एक पूर्व मंत्री से न्यूज विंग के एक संवाददाता ने पूछा “हो गया बाबूलाल के स्वागत का कार्यक्रम.” पूर्व मंत्री का जवाब था. “मैं बाबूलाल मरांडी के स्वागत कार्यक्रम में नहीं गया था बल्कि अमित शाह के स्वागत के लिए गया था.” ये बात आनेवाले समय में बीजेपी का राजनीतिक समीकरण क्या होगा उस ओर इशारा करती है. ऐसे में साफ तौर से कहा जा सकता है कि जबतक केंद्र का चाबुक चलता रहेगा, पार्टी सही दिशा में चलेगी. वरना…

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