LITERATURE

कोरोना काल में आया कविता संकलन ‘अविरल’, दे रहा जीवन संदेश

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Ranchi: इस कोरोना ने इंसान को जीवन के ऐसे मोड़ पर ला कर खड़ा कर दिया है, जहां हर व्यक्ति अपनी-अपनी लड़ाई लड़ रहा है. लोग अलग-अलग तरह की मुश्किलों से जूझ रहे हैं. इस लॉकडाउन के दौरान डिप्रेशन जैसी बीमारी का डर लगातार बढ़ रहा है.

ऐसे मुश्किल भरे दौर में जहां लोग हताश-निराश होते जा रहे हैं, वहीं 70 साल के एक बुजुर्ग ने एक अनोखी मिसाल पेश की है. ये बुजुर्ग कोई और नहीं बल्कि बिहार राज्य विद्युत बोर्ड से सेवानिवृत अजय कुमार मल्लिक हैं.

बचपन से ही कविताओं का शौक रखने वाले अजय अपनी डायरियों में कविताएं लिखा करते थे. लेकिन लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अपनी सभी रचनाओं को संकलित कर एक किताब की शक्ल दे दी. अजय मल्लिक ने ‘अविरल’ नाम से अपना यह कविता संग्रह छपवाया है, जिसे महाराष्ट्र के नॉवेल नगेट्स प्रकाशन ने छापा है.

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यह कविता संग्रह अमेजन, फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है. किंडल पर इसका ई-बुक पढ़ा जा सकता है. मल्लिक ने इस प्रकाशन को अपने जीवन भर की संचित निधि बताया है. कहा है कि जीवन इसी तरह हर हाल में अविरल चलते रहने का नाम है और यही उनके काव्य संग्रह का संदेश भी है.

कोरोना काल में आया कविता संकलन 'अविरल' धारा, दे रहा जीवन संदेश
कोरोना काल में आया कविता संकलन ‘अविरल’ धारा, दे रहा जीवन संदेश

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कौन हैं अजय कुमार मल्लिक

अजय कुमार मल्लिक मूल रूप से बिहार के मिथिला क्षेत्र के रहने वाले हैं. कमला मल्लिक और प्रताप नारायण मल्लिक की दूसरी संतान अजय मल्लिक का जन्म सुपौल जिला के गनपतगंज गांव में 17 जून 1950 को हुआ था. भागलपुर विवि से स्नातक मल्लिक बिहार राज्य विद्यूत बोर्ड से सेवानिवृत हैं. कविताएं लिखने के अलावा अजय कुमार मल्लिक को खाना पकाने, लोगों से बातें करने और साहित्य दर्शन के अध्ययन में विशेष रुचि है. श्री मल्लिक के लिए झारखंड उनकी कर्मभूमि रही है. राज्य के अलग-अलग शहरों में वे डेढ़ दशक तक अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

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