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Jamtara: क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट का खुला उल्लंघन, नर्सिंग होम व जांच घर मनमाना वसूलते हैं फीस

Jamtara: जामताड़ा जिले में क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट की धज्जियां उड़ायी जा रही हैं. स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी कोई नर्सिंग होम,  क्लीनिक की जांच नहीं हो रही है. नर्सिंग होम व जांच घरों में मनमाना तरीके से काम हो रहा है. नर्सिंग होम व जांच घर में दी जाने वाली सुविधा की दर कों डिस्प्ले नहीं किया गया है.

उनके संचालक मरीजों से मनमानी फीस वसूली करते हैं. साथ ही नर्सिंग होम में 24 घंटे चिकित्सक भी उपलब्ध नहीं रहते हैं. जिले के दो-चार नर्सिंग होम में ही 24 घंटे डॉक्टर रहते हैं. शेष में दूर से डॉक्टर्स आकर बैठते हैं और चले जाते हैं.

ऐसे में लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है. कई ऐसे नर्सिंग होम हैं जहां आइसीयू तक की व्यवस्था नहीं है. धड़ल्ले से सिजेरियन, अपेंडिक्स, हर्निया सहित अन्य ऑपरेशन किये जा रहे हैं.

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क्या है क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट

क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट को भारत सरकार ने 2010 में पारित किया. इसका नोटिफिकेशन 1 मार्च 2012 को किया गया. झारखंड राज्य में 30 मई 2013 से क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट लागू है.

इस एक्ट के तहत सभी सरकारी, गैर सरकारी अस्पताल, नर्सिंग होम,  क्लीनिक,  डायग्नोस्टिक सेंटर का निबंधित होना जरूरी है. साथ ही साथ इसके गाइडलाइन के तहत काम नहीं करने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई किये जाने का प्रावधान है.

लेकिन जिले में इस एक्ट का पालन नहीं हो रहा है. जिला प्रशासन ने भी मॉनिटरिंग की कोई व्यवस्था नहीं की है.

एक्ट के तहत  इन सुविधाओं का होना जरूरी

यदि किसी नर्सिंग होम में ऑपरेशन होता है तो आइसीयू होना जरूरी है. कोई क्लीनिक में डॉक्टर बैठते हैं और वह प्रैक्टिस करते हैं तो एक्ट के तहत निबंधित होना जरूरी है. नर्सिंग होम को पर्यावरणीय प्रमाण पत्र लेना आवश्यक है.

नर्सिंग होम के बाहर डॉक्टर्स के नाम,  दी जाने वाली सुविधा व उसका चार्ज भी डिस्प्ले होना आवश्यक है. वेस्ट डिस्पोजल की व्यवस्था जरूरी है. जांच घर में दी जाने वाली सुविधाएं व चार्ज का डिस्प्ले भी होना आवश्यक है.

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जिले के किसी नर्सिंग होम में दर का डिस्प्ले नहीं

जामताड़ा जिले में किसी भी नर्सिंग होम में दी जाने वाली सुविधा के चार्ज का कोई डिस्प्ले नहीं है. इसका स्वास्थ्य विभाग से भी कोई संज्ञान नही लिया जाता है जिस कारण जिले में कुकुरमुत्ते की तरह क्लिनिक में डॉक्टर्स प्रैक्टिस करते हैं. साथ ही धड़ल्ले से नर्सिंग होम का संचालन हो रहा है.

क्या कहते हैं पदाधिकारी

जिला स्वास्थ्य विभाग के एसीएमओ डॉ एसके मिश्रा का कहना है कि अभी तक किसी ने कोई शिकायत नहीं की है. शिकायत होने पर जांच होगी व कार्रवाई भी होगी. एक्ट के तहत गाइडलाइन में काम नही करनेवालों पर कार्रवाई की जायेगी.

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