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लोगों ने कहाः क्लर्क की नियुक्ति परीक्षा की फीस एक हजार रुपये होना, बेरोजगार नौजवानों का मजाक उड़ाने जैसा

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Ranchi: झारखंड में बेरोजगारी और सरकारी नौकरी की स्थिति किसी से छिपी नहीं है. 19 साल के राज्य के इतिहास में शायद ही कोई प्रतियोगिता परीक्षा हो, जो बेदाग हो. एक-एक नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने में पांच-छह साल लग जाते हैं. वर्तमान सरकार में जेपीएससी या जेएससीसी ने अब तक एक भी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की.

अब JSSC की ओर से क्लर्क की नियुक्ति के लिये विज्ञापन निकाला है. ये भी सुर्खियों में है, क्योंकि फॉर्म की फीस 1000 रुपये हैं. यूपीएससी की परीक्षा से 10 गुणी अधिक परीक्षा फीस लिये जाने के JSSC के फैसले पर न्यूजविंग ने पाठकों से  राय मांगी थी. एक हजार रुपये फीस की राशि क्या जायज है.

कई पाठकों व बेरोजगार युवकों ने अपनी राय हमें भेजी हैं. इस बार हमने वीडियो मैसेज के जरिये भी लोगों से राय मांगी है. आप भी अपनी राय हम तक पहुंचाये. हमें लिखें. हम उसे newswing.com पर प्रकाशित करेंगे. ताकि आपकी बात सरकार तक पहुंचे.

 

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1000 रुपये फीस की रकम जायज है या नहीं, इस सवाल पर बहुत सारे पाठकों ने अपने विचार हमसे साझा किये-

Rohit Singh 
सरकार पूरी तरह से जानती है इस राज्य में कितनी बेरोजगारी है. एक छोटे से पद के लिए हजार रुपए फीस रखना सरकार की नीयत को दर्शाता है कि वह किस तरीके से पैसा वसूलना चाहती है बेरोजगारों का सहायता लेकर. नौजवान बेरोजगार हैं, उन्हें नौकरी चाहिए, सरकार जानती है वह जरूर फॉर्म भरेंगे. इसलिए 1000 की फीस रखी गयी है.

चुनाव भी सामने है, पैसे की कमी नजर आ रही होगी सरकार को अपने खजाने में,तो इससे बेहतर और क्या हो सकता है कि नौजवानों का मजाक उड़ाया जाए. उनकी बेरोजगारी का मजाक उड़ाया जाए और उनसे पैसे भी ऐंठा लिए जाए. नौकरी मिलेगी नहीं मिलेगी इस कोई गारंटी नहीं

Raj Alok Sinha
झारखंड में बेरोजगारी एक बड़ी व गंभीर समस्या है. मगर सरकार की इस बारे में कोई गंभीर सोच नहीं है और न ही कोई ठोस नीति है. एक तो सरकारी नौकरी न के बराबर है. सिर्फ शिक्षक की ही नौकरी है, जिसके लिए हमेशा लाइन लगी रहती है.

अभ्यर्थियों में इस बात का हमेशा डर बना रहता है कि परीक्षा देने पर रिजल्ट कहीं विवादों में न आ जाए. सरकारी नौकरी की राह देखते-देखते उम्र बीत जाती है. यही कारण है कि उपयुक्त माहौल न मिलने व नौकरी की शर्त सही न होने के कारण यहां के पढे-लिखे लोग प्राइवेट नौकरी करने के लिए पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मुंबई, राजस्थान, गुजरात आदि का रुख करते हैं.

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चूंकि वहां यहां से बेहतर सैलरी व काम करने का उपयुक्त माहौल मिलता है. दूसरी तरफ झारखंड में मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र में भी आउटसोर्सिंग के आधार पर काम करवाया जा रहा है. इसमें जब चाहे तब बिना कोई कारण बताये किसी को भी नौकरी से निकाल दिया जाता है.
ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि सबकुछ जानते हुए सरकार अनजान है. यहां प्राइवेट नौकरी के नाम पर प्लेसमेंट एजेंसियां दुकानदारी कर रही हैं. वे अखबारों में एड देती हैं और रजिस्ट्रेशन के नाम पर बेरोजगार युवकों से पैसा लेती है. यह सरासर बेरोजगार लोगों के साथ धोखा है.

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#TTPS नियुक्ति घोटाले के साक्ष्य न्यूज विंग के पास, पूर्व एमडी के खिलाफ जांच समिति ने नहीं सौंपी तय समय पर अपनी रिपोर्ट

विभाग की सचिव वंदना डाडेल ने समिति को जांच कर रिपोर्ट दो महीने में सौंपने को कहा था. लेकिन अभी तक समिति ने जांच रिपोर्ट विभाग को नहीं सौंपी है.

WH MART 1

इसके अलावा यहां के प्राइवेट संस्थान में आमतौर पर न तो कोई नियुक्ति पत्र दिया जाता है, न ही काम का घंटा निर्धारित होता है, न समय पर वेतन मिलता है.
मिलता भी है तो काफी कम यानि न्यूनतम मजदूरी से भी कम. इस मामले में झारखंड के श्रम विभाग का भी रुख काफी लचीला है. विभाग में इस तरह की कोई शिकायत करने पर उसे गंभीरता से नहीं लिया जाता है.

यदि शिकायत दर्ज ही हो जाती है तो समझौता के लिए दबाव दिया जाता है. इस प्रकार इन मामलों में प्रबंधन को लाभ पहुंचाने की हरसंभव कोशिश विभाग की तरफ से की जाती है.
दूसरी तरफ इससे शिकायतकर्ता के धन, समय व श्रम की बर्बादी ही होती है. सरकार को इस बात की कोई चिंता नहीं है. आम लोगों का मानना है कि वर्तमान सरकार जिन सरकारी नौकरियों का एड निकाल रही है, सिर्फ अपना वोट बैंक बढाने के ख्याल से निकाल रही है. शिक्षक नियुक्ति इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. सरकार का ध्यान यदि शिक्षा में सुधार पर होता तो सबसे पहले जर्जर होते स्कूल भवनों में सुधार करती.

Raushan Kumar Singh

सरकार का कोई भी फैसला जैसे हिटलर के फैसले जैसा हो गया है. जेएसएससी की फीस भी ऐसे ही रवैये का एक हिस्का है. उम्मीद है न्यूजविंग को फीडबैक देने से कोई अच्छी खबर आये.

Niranjan Kumar
दस गुणा पैसा वसूला जा रहा है.
Vinay  Chauhan
Where and how will arrange unemployed person or students. Reasonable fee 100 or 150 rs.

Nikunj Kumar
I am agree with u sir. It’s not about only Jharkhand. You can take example of railway charging 500 rupees for each vacancy and they said we will refund after deducting hundred rupees and Bank charges. But they didn’t refund any money. I filled a vacancy in railway RPF they did not refunded my money. This is something I personally wanted to change . No one published this type of article before. According to me, government should charges only 100 rupees for any exam.

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S Kapardar
झारखंड सरकार में उच्च पदों में बैठे पदाधिकारियों को अपनी Responsibility के एहसास की धोर कमी है. कुछ ही पदाधिकारी हैं जो quick decision लेने में सक्षम हैं. पर वैसे पदाधिकारियों को बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाती है. किस कार्य के लिए कितना जुर्माना लगाया जाए और कितनी किस नौकरी के लिए कितना फीस ली जाए इसकी विवेक पूर्ण विचार करने के लिए समय नहीं. जो फ़ाइल नीचे बनकर आयी, उसपर कर दो साइन?

इसलिए 19  बरसों में एक भी परीक्षा बेदाग नहीं. कभी सवाल ही ग़लत तो कभी options गलत. पदाधिकारी गण जब सवाल ठीक से छाप नहीं सकते तो उत्तरपुस्तिका क्या जांच करवायेंगे?  JSSC या JPSC सवाल ना अपने छाप सकती है और न परीक्षा करवा सकती है, इससे ज्यादा हास्यापद और शर्मनाक स्थिति क्या हो सकती है ?

Agency को परीक्षा के लिए और कैडिडेट चयन के लिए कॉन्ट्रैक्ट देने के पीछे क्या राज है; शायद बहुत कम लोग जानते हैं.

Rustam Ali
बहुत ज्यादा गलत है 1000 रुपये फॉर्म शुल्क, शून्य होना चाहिये.

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