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अफगानिस्तान में अभी युद्ध विराम नहीं, अमरुल्ला सालेह ने तालिबान के खिलाफ छेड़ी जंग, पाकिस्तान को लताड़ा

Kabul: अफगानिस्तान पर तालिबान के काबिज होने के बाद चारो तरफ चीख पुकार है लेकिन तालिबान की चुनौतियां कम नहीं हुई है, अफगानिस्तान के कार्यवाहक राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह पंजशीर घाटी पहुंच गये हैं और वो वहीं के रहने वाले हैं. उन्होंने तालिबान के खिलाफ नॉर्दर्न अलायंस की रेजिस्टेंस फोर्स को लेकर तालिबान के खिलाफ जंग छेड़ दी है. इसमें उनका साथ दे रहे हैं उनके गुरु अहमद शाह मसूद के बेटे और एलायंस के कमांडर अहमद मसूद, तीसरा नाम है मजार ए शरीफ का बूढ़ा शेर कहे जाने वाले अब्दुल रशीद दोस्तम जो अफगानिस्तान के उप राष्ट्रपति भी रह चुके हैं जबकि चौथा नाम है जमीयत-ए-इस्लामी का गठन करने वाले अता मोहम्मद नूर. इन चारों ने तालिबान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है जिसकी वजह से तालिबान को चुनौती पेश आने लगी है.

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अफगानिस्तान के कार्यवाहक राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह Amrullah Saleh ने व्हाइट हाउस के पूर्व स्पीचराइटर माइकल जॉन्स (MICHAEL JOHNES) के ट्विट पर रिप्लाई करते हुए लिखते हैं कि “राष्ट्रों को कानून के शासन का सम्मान करना चाहिए, हिंसा का नहीं. अफगानिस्तान इतना बड़ा है कि पाकिस्तान निगल नहीं सकता और तालिबान के शासन के लिए बहुत बड़ा है. अपने इतिहास को आतंकवादी समूहों के लिए अपमान और झुकने पर एक अध्याय न बनने दें”.  अमरुल्ला सालेह वही हैं जिन्होंने पूरी दुनिया को बताया था कि कैसे पाकिस्तान एयरफोर्स तालिबान लड़ाकों की मदद कर रहा है.

 

अफगानिस्तान में तालिबानियों को पटखनी देने वाले अहमद शाह मसूद के बेटे ने अहमद मसूद ने कहा कि वह तालिबान को सबक सिखाने के लिए तैयार हैं. उन्होंने लिखा कि तालिबान से लोहा लेने के लिए हमारे पास पर्याप्त मात्रा में लोग मौजूद हैं लेकिन हथियारों की जरूरत होगी. अहमद मसूद ने अमेरिका से अपील करते हुए कहा कि हमारी सेना को हथियार और गोला बारूद मुहैया कराया जाए. अंग्रेजी अखबार द वाशिंगटन पोस्ट में छपे एक प्रचार लेख में अहमद मसूद ने कहा कि अमेरिका अपने लड़ाकों का समर्थन करके लोकतंत्र का सबसे बड़ा शस्त्रागार साबित हो सकता है.

 

मसूद के बेटे ने लिखा कि मैं पंजशीर घाटी से लिख रहा हूं, मुजाहिद्दीन के लड़ाके तालिबान से मुकाबले के लिए एक बार फिर से तैयार हैं. अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए हम उन्हें बाहर निकाल फेकेंगे. बताते चलें कि अहमद शाह मसूद को पंजशीर का शेर कहा जाता था. जीवित रहने के दौरान मसूद लगातार तालिबान से दो-दो हाथ करते रहे.

 

मसूद ने अन्य दलों से भी साथ आने की अपील करते हुए कहा कि सेना के कई जवान भी मेरे साथ हैं जो हथियार डालने से नाराज हैं. उन्होंने कहा कि तालिबान से लड़ने के लिए इतना काफी नहीं है, हमें कुछ दूसरे देशों की मदद चाहिए होगी. उन्होंने कहा कि तालिबान सिर्फ़ अफगानिस्तान का नहीं बल्कि पूरी दुनिया का दुश्मन है और उसके राज में अफगानिस्तान, आतंकवाद का नया गढ़ बन जाएगा.

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