
Palamu: पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड के सेरनदाग गांव निवासी जीतन सिंह (25 वर्ष) हमेशा बेड़ियों में जकड़ा रहता है. उसकी गरीबी उसके इलाज में बाधा बन रही है.
पिता भुनेश्वर सिंह के पास इतने पैसे नहीं कि वह जीतन का बेहतर इलाज करा सकें. मानसिक रूप से विक्षिप्त जीतन अक्सर घर से भाग जाता था और किसी से अचानक विवाद कर बैठता था. मजबूरी में उसे बेड़ियां पहना दी गयीं.
भुनेश्वर सिंह ने बताया कि जीतन सिंह उनका इकलौता पुत्र है. पिछले दशहरा के समय से उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ गयी है. उसका परिवार लगातार आर्थित तंगी से गुजर रहा है.
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लॉकडाउन के बाद घर की हालत और खराब
लॉक डाउन के बाद से तो उनकी स्थिति और खराब हो गयी है. पहले मेदिनीनगर मजदूरी करने जाया करता था, लेकिन लॉकडाउन के बाद से मजदूरी भी नसीब नहीं हो रही है. किसी तरह परिवार चल रहा है.
भुनेश्वर से सरकारी सहयोग की अपेक्षा रखता है, ताकि वह अपने बेटे का इलाज करा सके. भुवनेश्वर ने राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इलाज में सहयोग की अपील की है.
जीतन की मां ने बताया कि लगातार आर्थिक तंगी से गुजरने के कारण घर के बैल और बकरी बेचकर पैसे जुटाये और जीतन को इलाज के लिए रांची के कांके स्थित मानसिक आरोग्याशाला ले गये थे.
वहां चार दिन रख कर अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी. अब पुनः ऐसी हैसियत नहीं कि जीतन को इलाज के लिए दूसरे बड़े अस्पताल में ले जा सकें.
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भाग न जाये, इसलिए लगा दी बेड़ियां
जीतन के पैरों में लगी बेड़ियों के बारे में पूछे जाने पर बताया कि दिमाग खराब होने के चलते अक्सर जीतन इधर-उधर भाग जाता है. अनजान जगह पर जाने से कोई मारपीट न कर दें, इसीलिए उसके पैरों में सीकड़ बांध कर रखते हैं.
जीतन के जीवन को देखकर और उसका इलाज नहीं कराने पर उन्हें बड़ा अफसोस आता है, लेकिन पैसे नहीं रहने पर कोई रास्ता भी दिखायी नहीं देता.
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