
Krishnakant
अंग्रेजों के जाने के बाद भारतीय समाज के विभाजन की इतनी बड़ी कोशिश आजाद भारत में कभी नहीं हुई थी. इंदिरा कांग्रेस और उसके बाद की सरकारों ने ध्रुवीकरण के तमाम खेल खेले थे, दंगे कराये थे. लेकिन वे चुनाव जीतने के लिए किये गये फौरी अपराध थे. वे सेकुलर दिखते हुए, पर्दे के पीछे खेले गये खेल थे. अब सांप्रदायिकता ने संस्थानिक रूप ले लिया है. यह दौर ऐतिहासिक है. हम 75 साल पीछे लौट गये हैं.
पहले दिल्ली चुनाव, फिर दिल्ली दंगे, फिर कोरोना के दौरान सांप्रदायिकता जिस बेशर्मी से खुलकर खेल रही है, इतने बड़े पैमाने पर समाज का धार्मिक विभाजन आजाद भारत में कभी नहीं देखा गया.
सभी इतिहासकार इस बात पर सहमत दिखते हैं कि अंग्रेजों ने ‘बांटो और राज करो’ की नीति पर अमल किया. उन्होंने धर्म के आधार पर हिंदू और मुसलमान में बांटने का अथक प्रयत्न किया था. वे समाज को आपस में लड़ा रहे थे, ताकि जनता का ध्यान स्वतंत्रता संग्राम से हटा रहे और लोग आपस में लड़ते रहें.
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भारत फिर से उसी विभाजन का गवाह बन रहा है. शर्मनाक यह है कि यह दौर महामारी का है और इस संकट के दौरान सबसे सघन सांप्रदायिक अभियान चलाया गया. मीडिया और सोशल मीडिया ने मुसलमानों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया और सरकार ने ऐसा होने दिया.
आधा दर्जन नेताओं ने सभाएं कीं. एक सरकार गिरायी गयी, नयी सरकार बनायी गयी. सिख समाज के कुछ लोगों ने पुलिस पर कातिलाना हमला किया, देशभर से ऐसी खबरें आयीं, जो कि इतने बड़े देश में कोई हैरानी की बात नहीं थी. लेकिन मरकज के बहाने हिंदुओं में भरा गया कि मुसलमान कोरोना के दोषी हैं.
एक मौलाना के कथित अपराध की सजा गरीब रेहड़ी वालों को, फेरी वालों को मिलेगी? एक जलसे के लिए एक पूरा समाज दोषी है, लेकिन जिस मजबूत सरकार की छाती पर वह जलसा हुआ था, उससे कोई सवाल ही नहीं? वह जलसा किसने होने दिया? क्या भारत सरकार को यह नहीं मालूम कि दिल्ली में कोई ऐसी जगह है, जहां दशकों से लोगों का जमावड़ा होता रहता है?
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अब दिल्ली से लेकर सुदूर गांवों तक अभियान चल रहा है कि मुसलमान फेरी वाले से सामान न खरीदो. उन्हें बस्ती में न घुसने दो. इसके लिए आधार चेक किये जा रहे हैं. मुसलमान विक्रेताओं पर हमले किये जा रहे हैं.
इन घटनाओं को होने देने वाले, करने वाले, उकसाने वाले इस देश के सामाजिक विभाजन के दोषी हैं. इसे रोका नहीं गया, तो आने वाले वक्त में इसके परिणाम भयानक होंगे. किन्हीं लोगों के किसी अपराध के लिए अगर एक पूरे समाज को दंडित किया जाएगा, तो एक दिन विस्फोटक स्थिति पैदा हो सकती है.
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