
Ranchi: राजधानी रांची के बड़े हिस्से में बहने वाली स्वर्णरेखा नदी के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण की ख़बरें लगातार सामने आती रही हैं. पर बहाव क्षेत्र में जमीन माफियाओं द्वारा अतिक्रमण किये जाने की सूचना सरकार के पास नहीं है.
2016-17 में रांची जिला प्रशासन ने स्वर्णरेखा नदी के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण की लगातार आती ख़बरों पर जांच करवायी थी. सरकार को इसके बारे में तीन सालों बाद भी पता नहीं है.
वर्तमान में चल रहे विधानसभा के बजट सत्र में सरकार ने इस मसले पर अनभिज्ञता जतायी है. सदन में यह कहा है कि इस मामले में उसने रांची उपायुक्त से जानकारी मांगी है.
इसे भी पढ़ें : #Corona : महगामा विधायक विदेश दौरे से लौटने के बाद पहुंचीं रिम्स, आइसोलेशन वार्ड में लिया गया सैंपल
विधानसभा में स्वर्णरेखा नदी के किनारे हो रहे अतिक्रमण का उठा था सवाल
धनबाद विधायक राज सिन्हा ने जल संसाधन विभाग से राजधानी रांची में बहने वाली स्वर्णरेखा नदी के किनारे हो रहे अतिक्रमण का सवाल पूछा था. विभाग ने इस पर कोई जवाब ही नहीं दिया.
विधायक ने इस पर नाराजगी जताते हुए आश्चर्य जताया कि विभाग को इस मामले में कोई जानकारी नहीं है. भू माफियाओं के कारण इस नदी का अस्तित्व ख़त्म होने को है.
सदन में विभाग के स्तर से इतने अहम् सवाल का जवाब विभाग ने सतही तरीके से दिया है. जनहित के ऐसे सवाल पर विभागीय अधिकारियों का रवैया सदन की गरिमा के विरुद्ध है.
नदी किनारे की जमीन गायब होने पर उपायुक्त रांची ने करायी थी जांच
नदी के बहाव क्षेत्र और ग्रीनलैंड एरिया में अतिक्रमण की खबर पर 2016-17 में रांची के तत्कालीन उपायुक्त मनोज कुमार ने जांच करवायी थी.
इसके लिए नामकुम की तत्कालीन सीओ कुमुदनी टुडू को जांच करने का दायित्व दिया गया था. अतिक्रमण करने वालों की लिस्ट तत्काल मांगी गयी थी. टुडू ने 8 सदस्यीय टीम बनाकर जांच की थी.
अंचल निरीक्षक अनिल कुमार सहित अन्य ने इस बात को उल्लेखित किया था कि 40 एकड़ जमीन गायब है. स्वर्णरेखा पुल से ओवारिया पुल तक 40 एकड़ जमीन है जो अब मिल नहीं रही.
इसे भी पढ़ें : JSLPS से अलग होगा मनरेगा सोशल ऑडिट, राज्य सरकार बनायेगी स्वतंत्र सोसाइटी
नदी किनारे की 40 एकड़ सरकारी जमीन को निगल चुके हैं भू माफिया
स्वर्णरेखा नदी रांची ही नहीं, झारखण्ड की लाइफ लाइन मानी जाती है. रांची में भू माफियाओं ने इसके बहाव क्षेत्र के 40 एकड़ जमीन को बेच दिया है.
हटिया के पास रिवर व्यू कॉलोनी के पास यह नदी कायदे से पांच फिट भी चौड़ी नहीं रह गयी है. सरकारी नक़्शे के अनुसार नदी की चौड़ाई 40 फीट थी. नदी तट से 200 फीट तक ग्रीनलैंड जमीन है.
सरकारी प्रावधान के अनुसार यहां किसी तरह का निर्माण कार्य नहीं हो सकता. पर स्वर्णरेखा नदी के ग्रीनलैंड एरिया में बेतहाशा तरीके से निर्माण कार्य हुए हैं जो अब भी दिखते हैं.
रिवर न्यू कॉलोनी के पास जमीन की घेराबंदी कर वहां प्लाट बेचने और और भवन बनाने की साजिश चलती रहती है. वर्ष 2018 में नामकुम के सीओ मनोज कुमार ने एक एकड़ 40 डिसमिल जमीन पर किये गये अतिक्रमण के संबंध में घरों के मालिकों को नोटिस भी दिया था.
कुछ घर तोड़े भी गये थे पर फिर सब अपनी जगह पर आ गया. अतिक्रमण का सिलसिला जारी है.
इसे भी पढ़ें : तीन करोड़ की लागत से बना अस्पताल शौचालय में तब्दील, खिड़की-दरवाजे व टाइल्स उखाड़कर ले गये चोर




