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राज्य में जादू-टोना, अंधविश्वास के नाम पर होती हैं हर महीने औसतन दो हत्याएं

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Ranchi: झारखंड में जादू टोना, अंधविश्वास और डायन बिसाही के शक में हत्या और प्रताड़ना के मामले नहीं थम रहे हैं. पिछले एक वर्ष के दौरान झारखंड में अंधविश्वास और जादू-टोना के शक में 24 लोगों की हत्या कर दी गयी है. यह आंकड़े पुलिस के हैं. जबकि स्थिति इससे ज्यादा खराब है. कई ऐसे मामले हैं जो पुलिस तक पहुंचते ही नहीं हैं. हालांकि पुलिस के आंकड़े के अनुसार अंधविश्वास और जादू-टोना के शक में पिछले 7 वर्षों की तुलना में इस वर्ष सबसे कम हत्याएं हुई है.

पिछले 7 साल की तुलना में इस वर्ष कम आये मामले  

झारखंड में जादू-टोना, अंधविश्वास और डायन बिसाही के शक में हत्या के मामले में कमी आयी है. पुलिस के आंकड़े के अनुसार 2011 में 36, 2012 में 33, 2013 में 47, 2014 में 30, 2015 में 47, 2016 में 44, 2017 में 41, 2018 में 24 मामले दर्ज हुए. पिछले 7 साल की तुलना में 2018 में सबसे कम जादू-टोना और डायन बिसाही के नाम पर हत्याएं हुईं.

 मांडर में 11 लोगों को सुनाई गयी थी उम्रकैद की सजा

राजधानी रांची के मांडर थाना क्षेत्र के कंजिया मरईटोली में 08 अगस्त, 2015 को पांच महिलाओं की डायन-बिसाही के आरोप में हत्या कर दी गयी थी. पांचों को ग्रामीणों ने अखड़ा में बुलाकर निर्वस्त्र कर दिया था. इसके बाद हत्या कर दी गयी थी. मृतकों में मदनी खलखो (75) पति स्व. सुना खलखो, एतवरिया खलखो (35) पति स्व. बंगवा खलखो, जसिंता खलखो (60) पति मतियस खलखो, तेतरी खलखो (35) पिता स्व. एतवा खलखो एवं रकिया खलखो (60) पति स्व. एतवा खलखो शामिल थी. इस मामले में कोर्ट ने 11 लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी. और 28 लोगों को कोर्ट ने रिहा कर दिया था. इस मामले में 45 ग्रामीणों को आरोपी बनाया गया था. इसमें दो नाबालिग थे और कुछ लोगों की मौत हो गयी थी.

अधिनियम बनने के बावजूद घटनाओं में नहीं आ रही कमी

डायन के नाम पर औरतों के साथ जुल्म करने वाले लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि वे ऐसा करके इस सामाजिक बीमारी को और बढ़ावा ही दे रहे हैं. डायन बताकर महिलाओं को मारने और उसके परिवार को प्रताड़ित करने की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है. हद तो तब हो जाती है, जब डायन बताकर महिला को मल-मूत्र पिलाया जाता है निर्वस्त्र कर उसका सामूहिक दुष्कर्म किया जाता है. इस सामाजिक कुरीति को खत्म करने के लिए राज्य में डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001 बना. इसके बावजूद ऐसी घटनाओं में कमी नहीं आ रही है.

 पिछले 18 वर्षों में 1600 अधिक महिलाओं की हो चुकी है हत्या

झारखंड राज्य बनने के बाद से अब तक डायन-बिसाही के आरोप में 1600 से अधिक महिलाओं की हत्या डायन बताकर की जा चुकी है. अंधविश्वास के इस मुद्दे पर लोग अभी तक जागरूक नहीं हो सके हैं. इस गंभीर समस्या के निराकरण के लिए कई लोग और कई संस्थाएं लड़ाई लड़ रही हैं. पर ये कुप्रथा गांवों में इस तरह से फैली हुई हैं कि इतनी जल्दी इससे छुटकारा संभव नहीं लग रहा.

हाल के दिनों में दर्ज डायन-बिसाही के मामले

  • 1 सितंबर 2018 गुमला के सिसई थाना क्षेत्र की बोंडो पंचायत अरको महुवा टोली निवासी दंपती 65 वर्षीय शाहदेव उरांव और 60 वर्षीय बिगनी देवी की हत्या कर दी गयी थी.
  • 20 सितंबर 2018 को बुंडू में बुधनी देवी के डायन होने के शक में उसके भतीजे ने कुल्हाड़ी से मार कर हत्या कर दी थी.
  • 12 नवंबर 2018 चाईबासा के चक्रधरपुर प्रखंड के कुरुलिया गांव के रंजीत प्रधान ने रिश्ते में उसकी सास लगने वाली 50 वर्षीय मनुप्यारी देवी को डायन बताकर धारदार हथियार से मार कर हत्या कर दी थी.
  • 23 दिसंबर 2018 बारूडीह तमाड़ के रहनेवाले फलिंद्र लोहरा ने अंधविश्वास में आकर अपनी सास सुकरू देवी की टांगी से मारकर हत्या कर दी थी.
  • 20 फरवरी 2019 गुमला थाना से महज चार किमी दूर पुग्गू खोपाटोली गांव में शाम को 65 वर्षीय बंधैन उरांइन की गांव के ही ललित उरांव ने पत्थर से कूचकर हत्या कर दी थी.
  • 21 फरवरी 2019 कोडरमा के मरकच्चो में दो महिलाओं को डायन बिसाही के आरोप में जिंदा जलाने की कोशिश को पुलिस ने नाकाम कर दिया. ग्रामीणों ने दोनों महिलाओं को घेर लिया था. उन्हें खंभे से बांध कर मिट्टी तेल से नहला भी दिया था. लेकिन, तभी पुलिस पहुंच गयी और एक बड़ी घटना टल गयी थी.

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