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देश में कोविड-19 से ठीक होने वालों की संख्या नये मरीजों से करीब दोगुनी : स्वास्थ्य मंत्रालय

New Delhi: स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में कोविड-19 के जितने नये मरीज सामने आ रहे हैं उसके लगभग दोगुने मरीज स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं.

कोरोना पर प्रेस ब्रीफिंग के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय के ओएसडी ने कहा कि भारत आबादी के लिहाज से चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है. देश में 1.3 अरब की जनसंख्या है. ऐसे में अगर दुनिया के अन्य देशों से तुलना करें तो भारत ने कोविड-19 महामारी से निपटने में निसंदेह बढ़त हासिल की है.

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प्रेस कांफ्रेंस की मुख्य बातें

  • दुनिया में प्रति 10 लाख की आबादी पर कोविड-19 मरीजों का औसत 1,479 है जबकि भारत में प्रति 10 लाख की आबादी पर सिर्फ 538 कोविड मरीज हैं.
  • इसी तरह, प्रति 10 लाख की आबादी पर मृत्यु दर भी दुनिया में किसी भी देश के मुकाबले सबसे कम है। दुनिया में कोविड-19 मरीजों की मृत्यु दर प्रति 10 लाख आबादी में औसतन 69.3 है जबकि भारत में यह महज 15 है.
  • भारत में ऐक्टिव केस और रिकवर्ड केस के बीच का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। 9 जुलाई तक देश में 4,76,378 मरीज ठीक हो चुके हैं जबकि 2,69,789 मरीजों का इलाज चल रहा है। इस तरह, ठीक हुए मरीजों की तादाद इलाजरत मरीजों के मुकाबले 1.75 गुना है.
  • भारत में रिकवरी रेट में तेजी से वृद्धि हो रही है. 9 जुलाई को यह बढ़कर 62.09% पर पहुंच गयी है.
  • देश में 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों पर कोविड-19 का खतरा ज्यादा है. 44 वर्ष की उम्र तक के सिर्फ 15 प्रतिशत लोग ही कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं जबकि शेष 85 प्रतिशत मरीज 45 वर्ष और इससे ऊपर के हैं.
  • देश में 60 से ज्यादा उम्र वालों की आबादी 10% है. इनमें 53 प्रतिशत लोगों ने कोविड-19 की वजह से दम तोड़ा है.

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कंटेनमेंट जोन में 31 जुलाई तक सख्त लॉकडाउन

गृह मंत्रालय की प्रवक्ता पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि 1 जुलाई, 2020 से अनलॉक 2 की नयी गाइडलाइंस लागू हो चुकी हैं. इनके तहत कंटेनमेंट जोन के बाहर और अधिक गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गयी है, लेकिन 31 जुलाई तक कंटेनमेंट जोन में लॉकडाउन का सख्ती से पालन होगा.

अब लगभग सभी आर्थिक गतिविधियों की अनुमति दी गयी है तो सभी नेशनल गाइडलाइंस का पालन करना और जरूरी हो गया है.

भारतीय आर्युविज्ञान अनुसंधान परिषद  ने कहा कि टेस्टिंग, ट्रैकिंग और ट्रीटमेंट की नीति अपनायी जा रही है.

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