Ranchi

लॉकडाउन और बारिश ने 1500 ट्राइबल परिवारों की तोड़ी कमर, वनोपज से 3000 रुपये की कमाई भी नसीब नहीं  

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Ranchi: वन उपज के भरोसे जीने वाले परिवारों के लिए यह साल मनहूस साबित हुआ है. कोरोना संकट और जबर्दस्त बारिश ने आफत मचाई है. 1500 से अधिक जनजातीय परिवारों पर इसकी मार पड़ी है. हर साल जनवरी से जून महीने के बीच वनोपज की बिक्री से 30,000-40,000 रुपये की कमाई होती थी.

अबकी लॉकडाउन और बारिश के कारण कारोबार 3000 रुपये तक का भी नहीं हो सका है. खासकर ज्यादा बारिश होने से उपज काफी घटा है. लॉकडाउन के कारण काम काज के लिए बाहर निकलना संभव भी नहीं हो सका. अब ऐसे परिवारों को राहत की आस अब केवल सरकार से ही है.

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चिरौंजी गुठली, महुआ का उत्पादन मात्र 10%

भारी बारिश के कारण इस बार चिरौंजी, करंज और दूसरे वन उपजों पर असर पड़ा है. क्वालिटी से भी, और क्वांटिटी से भी. 2019 की तुलना में इस साल चिरौंजी गुठली का उत्पादन 10 फीसदी ही हो सका है. इसी तरह करंज का हर साल औसतन उत्पादन 2000 मीट्रिक टन तक होता था. इस बार मात्र 100 टन तक ही इसका उत्पादन संभव हो सका है.

वनोपज कम होने से जनजाति परिवारों को भारी नुकसान

महुआ डोरी का उत्पादन पिछले साल तक 1000 मीट्रिक टन के आसपास था. इस बार इसका 10 फीसदी भी नहीं हो सका है. ऐसे जनजाति परिवार जो जंगलों से चिरौंजी और दूसरे वनोपज लाकर झाम्कोफेड (Jharkhand State Minor forest produce cooperative development and marketing federation ltd) के जरिये दो पैसे कमाते थे, उन्हें कम उपज के कारण घाटा उठाना पड़ रहा है. खासकर खूंटी, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम, गुमला और पलामू जैसे जिलों के जनजाति परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है.

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90 फीसदी कमाई वनोपज से ही

जनजाति समाज वनोपज के भरोसे अपने जीवन की गाड़ी अरसे से खींचते रहे हैं. 200 से अधिक सोसायटी और 50 से अधिक एसएचजी के भरोसे वे जंगलों से लाये वनोपज को बेचकर कमाई करते हैं. महुआ, चिरौंजी, इमली और ऐसे ही फारेस्ट प्रोड्यूस से जीविकोपार्जन करते हैं.

झाम्कोफेड इसमें सोसायटी और एसएचजी के साथ मिलकर काम करता है. उसके द्वारा अलग-अलग जिलों में ऐसे सेंटर (आहरण केंद्र) खोले गए हैं, जहां वनोपज की खरीद और संग्रह किया जाता है. इस बार तक़रीबन सभी केंद्र पर पिछले साल की तुलना में विभिन्न वनोपज का मात्र 10 से 20 फीसदी तक ही कलेक्शन हो सका है. ऐसा कम प्रोडक्शन के कारण हुआ है. जनजाति परिवारों के लिए वनोपज के सीजन में सालभर की कमाई का इंतजाम हो जाता था. इस बार चैलेंज बढ़ गया है.

चिरौंजी का MSP 126 रुपये

केंद्र सरकार ने 2020 के लिए चिरौंजी गुठली का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 126 रुपये प्रति किलो तय किया है. हालांकि कम उपज के कारण बाजार रेट लगभग 200 रुपये प्रति किलो तक है. इसी तरह करंज बीज का एमएसपी 22 रुपये प्रति किलो है. बाजार में इसका भाव 25-28 रुपये प्रति किलो है. महुआ फूल का एमएसपी 30 रुपया प्रति किलो है. बाजार में अभी रेट 50 रुपये प्रति किलो तक हो चुका है.

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