Education & Career

14,160 रुपये प्रतिदिन हो रहा खर्च, फिर भी 26 फीसदी बच्चे ही कर रहे ऑनलाइन पढ़ाई

Rahul Guru

Ranchi : लॉकडाउन की वजह से राज्य के सरकारी स्कूल बीते तीन माह से बंद हैं. ऐसे में सरकारी स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई हो सके, इसके लिए डिजिटल एजुकेशन की शुरुआत की गयी. झारखंड शिक्षा परियोजना की ओर से Digi SATH नाम से डिजिटल एजुकेशन शुरू किया गया. Digi SATH नाम से इस प्रोग्राम के तहत व्हाट्स एप ग्रुप और दूरदर्शन के माध्यम से पढ़ाई शुरू हुई. पर आलम यह है कि तीन माह बीत जाने के बाद भी केवल 26 फीसदी स्टूडेंट्स ही ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं. राज्य का सिमडेगा जिला ऑनलाइन एजुकेशन में सबसे पीछे है. इस माह तक यहां केवल 16 फीसदी बच्चे ही ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं.

14,160 रुपये हर दिन खर्च कर रहा शिक्षा परियोजना

इस ऑनलाइन पढ़ाई को बच्चों तक पहुंचाने के लिए राज्य शिक्षा परियोजना ने दूरदर्शन का सहारा लिया है. इसके लिए दूरदर्शन के साथ करार हुआ है. इस करार के तहत दूरदर्शन हर दिन सोमवार से शुक्रवार तक तीन घंटे का डिजिटल कंटेंट प्रसारित कर रहा है. इस तीन घंटे के प्रसारण का पहला एक घंटा नि:शुल्क होता है. जबकि बचे हुए दो घंटे के लिए झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद 14,160 रुपये प्रतिदिन दे रहा है. एक महीने में 2,83,200 रुपये का भुगतान दूरदर्शन को किया जाना है.

इसे भी पढ़ें – राज्य में कोरोना से 23वीं मौत, मेदांता में एडमिट देवघर के शख्स की गयी जान

बच्चों को समझने में हो रही दिक्कत

दरअसल अच्छे विचार के साथ शुरू की गयी डिजिटल पढ़ाई मूलभूत वजहों से फेल हो गयी है. शिक्षा परियोजना से लेकर हर स्कूल का अपना व्हाट्स एप ग्रुप है, जहां डिजिटल कंटेट उपलब्ध कराया जाता है. इसी कंटेंट के सहारे शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं. पर व्हाट्स एप एजुकेशन का हाल यह है कि सुदूर इलाकों की बात छोड़िए शहर के स्कूलों के बच्चे भी इससे नहीं जुड़ रहे हैं. दूसरे जिले सहित शहर के सटे ग्रामीण इलाकों के शिक्षकों ने बताया कि स्कूलों के 60 फीसदी से अधिक बच्चों के घरों में स्मार्टफोन नहीं है. जिनके घरों में स्मार्टफोन है भी उनका इस्तेमाल अभिभावक करते हैं. कई बार नेटवर्क की समस्या से भी बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती है. कुछ ऐसी ही समस्या दूरदर्शन के प्रसारण में भी है. जब प्रसारण का समय होता है, तब बिजली आदि की परेशनी रहती है. ऐसे में बच्चों की पढ़ाई डिजिटल स्वरूप में नहीं के बराबर ही है. शिक्षक, अभिभावक और स्टूडेंट्स के फीडबैक बताते हैं कि व्हाट्सएप और दूरदर्शन का कंटेंट समझ नहीं आता. व्हाट्सएप में क्रॉस क्वेश्चन का मौका नहीं मिलता है.

इसे भी पढ़ें – साल दर साल बढ़ती गयी JBVNL की बिजली टैरिफ, 2016 के बाद से उपभोक्ताओं पर बढ़ा बोझ

सबसे फिसड्डी सिमडेगा, सबसे बेहतर हजारीबाग

बच्चों-अभिभावकों तक डिजिटल कंटेंट उपलब्ध होने के आंकड़े में सबसे फीसड्डी सिमडेगा जिला है. वहीं सबसे बेहतर स्थिति पूर्वी सिंहभूम जिले की है. आंकड़ों के मुताबिक रांची में 25 फीसदी, खूंटी में 21 फीसदी, रामगढ़ में 30 फीसदी, बोकारो में 30 फीसदी, धनबाद में 31 फीसदी, पूर्वी सिंहभूम में 34 फीसदी, चतरा में 27 फीसदी, देवघर में 25 फीसदी, दुमका में 21 फीसदी, गढ़वा में 27 फीसदी, गिरिडीह में 27 फीसदी, गोड्डा में 20 फीसदी, गुमला में 17 फीसदी, हजारीबाग में 37 फीसदी, जामताड़ा में 25 फीसदी, कोडरमा में 33 फीसदी, लातेहार में 25 फीसदी, लोहरदगा में 33 फीसदी, पाकुड़ में 21 फीसदी, पलामू में 24 फीसदी, पश्चिमी सिंहभूम में 28 फीसदी, रामगढ़ में 30 फीसदी, साहेबगंज में 18 फीसदी, सरायकेला में 18 फीसदी और सिमडेगा में 16 फीसदी बच्चे डिजिटल कंटेंट का लाभ ले रहे हैं.

इसे भी पढ़ें – पूर्व डीजीपी डीके पांडेय, पत्नी पूनम पांडेय और बेटा शुभांगन पांडेय की जमानत याचिका पर हुई सुनवाई

Advertisement

Related Articles

Back to top button
Close