
Ranchi: काबिल और समझदार मानकर एसएसपी थाने का चार्ज सौंपते हैं लेकिन थानेदार उनकी अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पा रहे. थानेदारी पाने के बाद दरोगा और इंस्पेक्टर कप्तान का भरोसा तोड़ दे रहे हैं. ऐसा ही हाल पंडरा थाना का है. बीते 6 जून को पंडरा ओपी के थानेदार चिंटू कुमार को एसएसपी सुरेद्र झा ने एक युवक को थाना के हाजत में बंद कर पीटने और डेढ़ लाख रुपये लेने के आरोप में निलंबित कर दिया था. मामले में जांच का आदेश भी दिया गया था. इसके बाद पंडरा का नया थानेदार चंद्रशेखर कुमार को बनाया गया. एसएसपी सुरेद्र झा ने चंद्रशेखर को पंडरा इलाके में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी दी थी. मगर दोहरे हत्याकांड में पंडरा थानेदार का लापरवाह रवैया रहा है. परिजनों ने पंडरा थाना पर लापरवाही और उदासीनता का आरोप लगाया है. आमलोगों को कानूनी मदद दिलाने में पुलिस अधिकारी माथापच्ची करते हैं, तो कुछ थानेदार इन अधिकारियों की किरकिरी करवाते है. कई मामले में वरीय अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ता है.
पहले भी थानेदार पर लग चुके हैं आरोप
थाना प्रभारियों पर लगे आरोप और पुलिस की कार्यशैली से पुलिस की छवि धूमिल हो रही है. विभाग के वरीय अधिकारियों का भी मानना है कि राजधानी रांची में थानेदारों द्वारा इस तरह की अनियमितता बरतने की वजह से पुलिस की छवि पर भी बुरा असर पड़ रहा है. जब भी स्मार्ट पुलिसिंग की बात की जाती है तो इसकी शुरुआत राजधानी से ही होती है, ऐसे मे पुलिस कर्मियों के लापरवाही और भ्रष्टाचार में लिप्त होने की बातें पुलिस की कार्यशैली पर सवाल भी उठाते हैं. बीते साल नवम्बर में पंडरा थानेदार के तत्कालीन थानेदार पृथ्वी सेन पर भी जमीन कारोबारी के साथ जुड़े होने का आरोप लगा था. इस मामले में एसएसपी ने कोतवाली एएसपी को जांच के आदेश दिये थे. ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि जमीन कारोबारियों के साथ मिलकर थानेदार जमीन पर कब्जा दिला रहे हैं. मामले का विरोध करने पर फर्जी केस में फंसाने की धमकी दी जाती है. मामले की शिकायत ग्रामीणों ने सीएम से भी की थी. दिसंबर 2021 में पंडरा इलाके से जुआ और मटका खेलने की शिकायत पर कोतवाली एएसपी ने छापेमारी की थी. इस मामले में वरीय अधिकारियों को रिपोर्ट की गयी थी. इसके बाद थानेदार का तबादला कर दिया गया.
इसे भी पढ़ें : Jharkhand Monsoon : तीन दिन में पूरे राज्य में दिखेगा मानसून का असर, येलो अलर्ट भी जारी




