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राज्य के पांच जिलों में नहीं वाणिज्य कर विभाग का कार्यालय, 321 अधिकारियों की जरुरत, 136 पद रिक्त

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-कई विभाग का खजाना हो गया था खाली
-नहीं हो पा रहे थे कर्मियों के पेमेंट

Ranchi: राज्य सरकार के लिए राजस्व की वसूली वाणिज्य कर विभाग करता है. सरकार द्वारा वसूले गये राजस्व के पैसे ही राज्य के विकास पर खर्च किये जाते हैं. राज्य सरकार के कई विभाग का खजाना खाली होने की बात भी पिछले दिनों सामने आ रही थी. वजह जो भी रही हो, लेकिन एक वजह ये भी है कि राज्य सरकार के वाणिज्य कर विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में कर्मचारी नहीं हैं.

वाणिज्य कर विभाग में पदाधिकारी से लेकर सहायक आयुक्त के 321 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से कुल 136 पद रिक्त हैं. इसके अलावा राज्य के पांच जिलों में तो वाणिज्य कर विभाग का कार्यालय भी नहीं है. विधानसभा में एक सवाल के जवाब में सरकार ने माना भी है कि गढ़वा, लातेहार, सिमडेगा जिलों में वाणिज्य कर अंचल कार्यालय के गठन की आवश्यकता पर विचार किया जा रहा है.

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विभागीय संरचना को मजबूत करने की कार्रवाई अभी प्रक्रियाधीन

सरकार वाणिज्य कर विभाग की विभागीय संरचना को मजबूत करने के लिए क्या कर रही है, ये सवाल विधायक ने सदन में भी उठाया था. जिसका जवाब देते हुए सरकार ने माना है कि राजस्व वृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़े इसके लिए कार्रवाई अभी भी प्रक्रियाधीन है. उन्होंने बताया कि विभागीय संरचना को मजबूत करने, रिक्त पदों पर नियुक्ति करने, सहायक आयुक्त एवं अन्य उच्चतर पदों पर प्रोन्नति देने की प्रक्रिया चल ही रही है.

104 पदों पर सीधी भर्ती के लिए JPSC को भेजी है अधियाचना

विभाग ने रिक्त पदों पर भर्ती के लिए झारखंड लोक सेवा आयोग को अधियाचना भेजी है. पर जेपीएससी की तरफ से अभी तक भर्ती से संबंधित कोई भी नोटिफिकेशन नहीं जारी किया गया है. साथ ही सम्प्रति सहायक आयुक्त के 25 पद भी रिक्त हैं, जिनको प्रोमोशन के जरिए भरा जाएगा.

होता है राजस्व प्रभावित

क्षेत्र के जानकारों की मानें, तो कार्यालय नहीं होने से राजस्व वृद्धि प्रभावित होती है. जानकारों का कहना है कि जिला में अगर नब्बे प्रतिष्ठान और आद्यौगिक ईकाइयां हैं, और रजिस्टर्ड मात्र नौ या दस हैं. तो बाकी का सत्यापन कैसे होगा. जो प्रतिष्ठान या औद्यौगिक ईकाइयां अपने आप को रजिस्टर्ड नहीं करा रहे हैं, क्या उनपर प्रदेश में बैठी ईकाइयां लगाम लगा सकेगी. इसलिए वाणिज्य कर विभाग के कार्यालय के साथ सहायक आयुक्तों की भी नियुक्तियां जिलों में होनी चाहिए.

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