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राजस्व और इंजीनियर की कमी से जूझ रहा RRDA, योजनाओं की प्लानिंग व मॉनिटरिंग प्रभावित

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  • जमीन रजिस्ट्री का 5 प्रतिशत रेवेन्यू रोक भी बना गंभीर संकट
  • भेजी गयी है 67 करोड़ की योजना, स्वीकृति पर मिलेगा सहयोग
  • नगर विकास विभाग जल्द ही आरआरडीए को भेजेगा इंजीनियर, नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण

Ranchi: रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार (आरआरडीए) इन दिनों अपने बजटीय संकट और इंजीनियरों की कमी से जुझ रहा है. नक्शा पास कराने से लेकर साइट वेरिफिकेशन का कार्य इनदिनों केवल एक इंजीनियर के जिम्मे है. ऐसे में नक्शा पास करने के साथ विकास से जुड़ी योजनाओं की प्लानिंग एवं मॉनिटरिंग में विपरित असर देखने को मिल रहा है.

वहीं आरआरडीए के लिए कोई बजटीय प्रावधान नहीं होने से यहां राजस्व की समस्या भी बनी हुई है. कुछ दिन पहले नगर विकास विभाग ने कई इंजीनियर्स के भर्ती के लिए एक विज्ञापन निकाला था. लेकिन अभी तक भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है.

कुल 354 गांव है क्षेत्र में, काम हो रहा प्रभावित

आरआरडीए सचिव राजकुमार के मुताबिक, आरआरडीए के क्षेत्र विस्तार के अंतर्गत अधिसूचित नगर निकाय क्षेत्रों को छोड़ रांची जिले से सटे कुल 354 गांव आते हैं. इन गांवों में चल रहे विकास कार्य का साइट वेरिफिकेशन करने, भवनों का नक्शा पास करने के लिए कुल 15 इंजीनियर का पद स्वीकृत है. इसके उलट अभी यहां का कार्य केवल एक सहायक इंजीनियर के भरोसे चल रहा है. विभाग से कम-से-कम 5 इंजीनियर और मांगे गये हैं.

यहां टेक्निकल अफसरों की कमी से ना सिर्फ नक्शा पास करने के काम पर असर पड़ रहा है. बल्कि विकास से जुड़ी योजनाओं की ना तो प्लानिंग हो रही है, और ना ही मॉनिटरिंग. नगर विकास विभाग द्वारा मैन पावर उपलब्ध नहीं कराए जाने का खामियाजा ऑथोरिटी के साथ आम लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है.

साइट वेरिफिकेशन का काम पूरी तरह से ठप

आरआरडीए चेयरमैन परमा सिंह ने बताया कि आरआरडीए कर्मचारी विकास कार्यों के लिए कई काम करना चाहते हैं. लेकिन एक इंजीनियर के भरोसे काम करना किसी भी तरीके से सही नहीं है. इंजीनियर नहीं होने के कारण आरआरडीए क्षेत्र में जितने भी अवैध निर्माण हुए हैं, उनकी जांच भी नहीं हो पा रही है. साथ ही साइट वेरिफिकेशन का काम भी पूरी तरह से संचालित नहीं है.

वही शहर के आसपास विकास के लिए योजना बनाने का काम भी पूरी तरह से ठप है. हालांकि इंजीनियर की कमी की जानकारी पत्र के माध्यम से पहले ही नगर विकास विभाग को दी गयी थी. उन्हें जानकारी मिली है कि विभाग ने कई इंजीनियरों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली है. उम्मीद है कि जल्द ही विभाग आरआरडीए को कई इंजीनियर उपलब्ध करा देगा.

राजस्व की कमी एक गंभीर समस्या

राजस्व में लगातार कमी होने की बात को स्वीकार करते हुए परमा सिंह ने बताया कि आरआरडीए के लिए बजटीय प्रावधान नहीं होने से कर्मचारियों के वेतन सहित उन्हें मूलभूत सुविधा देने की समस्या बनी रहती है. आरआरडीए के राजस्व का मूल स्त्रोत केवल उनके क्षेत्राधिकार अंतर्गत दुकानों का भाड़ा और नक्शा पास कराने में मिलने वाला रेवेन्यू ही रह गया है. पहले नियम था कि रांची जिले में जितनी भी रजिस्ट्री होती थी, उसका 5 प्रतिशत आरआरडीए को मिलता था.

इस 5 प्रतिशत रेवेन्यू से आरआरडीए शहर का विकास कार्य करता था. राज्य के पूर्ववत एक रेवेन्यू मंत्री के कार्यकाल में इस कार्य पर रोक लगा दी गयी. बाद में आरआरडीए के अध्यक्ष का पद आठ साल से खाली होने से किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया. अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने इस ओर तेजी से ध्यान दिया है. सरकार से इस बारे में कई बार चर्चा की है.

67 करोड़ की योजना स्वीकृति से मिलेगा सहयोग

उऩ्होंने बताया कि आरआरडीए के समक्ष उत्पन्न हुई इस समस्या का एक प्रमुख कारण कई कार्यों को निगम को सौंपा जाना है. निगम के पास तो पहले से कई कार्यों की भरमार है. निगम के लिए तो सफाई कार्य ही पर्याप्त है. आरआरडीए के पास वाली नाली, सड़क निर्माण कार्य निगम को दे दिया गया. इससे भी आरआरडीए के राजस्व में कमी आयी है. कुछ दिन पहले ही सरकार के पास करीब 67 करोड़ की एक योजना (रिंग रोड से ग्रामीण इलाकों को जोड़ने) भेजी गयी है. उम्मीद है सरकार से स्वीकृति मिलने पर आरआरडीए के राजस्व में बढ़ोतरी होगी.

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