
Chhaya
Ranchi : रिवाइज्ड नेशनल टीबी कंट्रोल प्रोग्राम (आरएनटीसीपी) की ओर से जारी वार्षिक रिपोर्ट 2019 में झारखंड से संबधित कई जानकारियां हैं.
उन्हीं में एक जानकारी यहां राज्य और जिला स्तर पर महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत कर्मचारियों की संख्या से संबंधित भी है. रिपोर्ट 2018 के आंकड़े बताती है.
राज्य स्तर पर टीबी से संबधित कई ऐसे पद हैं जो स्वीकृत ही नहीं हैं. स्टेट अकाउंटेंट, फार्मासिस्ट एसडीएस, स्टोर असिस्टेंट जैसे कर्मचारियों के लिये दो-दो पद स्वीकृत हैं लेकिन कार्यरत एक-एक ही हैं.
मेडिकल ऑफिसर के लिये चार पद हैं लेकिन कार्यरत एक है. लैब टेक्नीशियन के लिये चार पद स्वीकृत हैं लेकिन कार्यरत दो हैं.
यहां तक कि टीबी, एचआइवी को-ऑर्डिनेटर के लिए एक पद होते हुए भी कोई कार्यरत नहीं है. इस तरह पूरे 18 कर्मचारियों की जरूरत है. लेकिन वर्तमान में सात कर्मचारी ही कार्यरत हैं.
इसके पहले नीति आयोग की रिपोर्ट आयी थी जिसमें राज्य को टीबी में बेहतर परफार्मेंस के लिए पहला स्थान दिया गया. 2018 के आंकड़ों पर ही यह रैंकिंग दी गयी.
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एडवांस टीबी टेस्ट के लिये मात्र चार कर्मचारी लैब में
रेफरल लैब आइआरएल में आठ पद स्वीकृत हैं जिसमें से चार ही कार्यरत हैं. टेक्निकल ऑफिसर और लैब अटेंडेंट के लिए पद ही सृजित नहीं हैं. माइक्रोबायोलॉजिस्ट के दो, जिसमें से एक कार्यरत है.
सीनियर लैब टेक्निशियन के लिए एक, जो कार्यरत है. डाटा इंट्री ऑपरेटर के लिये एक पद स्वीकृत है लेकिन कोई कार्यरत नहीं है. राज्य स्तर पर कुल 26 पद हैं जिसमें से दस पदों पर कोई भी कर्मचारी कार्यरत नहीं है.
रेफरल लैब अत्याधुनिक लैब होते हैं जिसमें टीबी की आधुनिक उपकरणों से जांच की जाती है. राज्य टीबी सेल में यह स्थित होता है.
चार में से मात्र एक मेडिकल ऑफिसर
राज्य में बोकारो, गिरिडीह जैसे जिलों में दवाइयों की कमी रहती है. यहां एमडीआर टीबी से संबधित दवाइयां अक्सर नहीं रहतीं.
कुछ मरीजों ने बताया कि जब भी वे दवाई लेने जाते हैं, जिला टीबी सेल में दवाइयां नहीं रहती हैं. राज्य टीबी सेल की जिम्मेदारी है कि वो राज्यों में पर्याप्त दवाई आपूर्ति करें.
रिपोर्ट की मानें तो राज्य में मेडिकल ऑफिसर के लिए चार पत्र स्वीकृत हैं जबकि कार्यरत मात्र एक हैं. ऐसे में दवाइयों की सप्लाई पर काफी असर पड़ रहा है.
बोकारो और गिरीडीह के टीबी चैंपियंस के अनुसार इन जिलों में एमडीआर टीबी की दवाइयां आये दिन नहीं मिलतीं. फिलहाल गिरीडीह में पिछले चार माह से ये स्थिति है.
जबकि एमडीआर टीबी में दवाइयां रोकने से परेशानी और बढ़ जाती है.
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जिला स्तर पर मात्र दो सीनियर मेडिकल ऑफिसर टीबी
रिपोर्ट की मानें तो राज्य में पांच जिला स्तरीय सीनियर मेडिकल ऑफिसर टीबी के पद स्वीकृत हैं. लेकिन कार्यरत दो हैं. इन जिलों के नाम रिपोर्ट में नही हैं.
जिला टीबी सेल में उपस्थित मेडिकल ऑफिसर की बात करें तो लगभग आठ पद स्वीकृत है लेकिन कार्यरत एक भी नहीं है. जिला स्तरीय अन्य पदों को देखे तो कुल 822 पद स्वीकृत हैं. इसमें से कार्यरत 561 हैं.
ऐसे में लगभग 261 पद रिक्त हैं. राज्य और जिला स्तर पर देखें तो लगभग 284 पद खाली हैं.
राज्य टीबी सेल और आरएनटीपीसी के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मानें तो उन्हें भी हैरानी होती है कि राज्य को नीति आयोग की रिपोर्ट में पहला स्थान कैसे मिल गया.
टीबी के क्षेत्र में काम करने वाले कुछ लोगों का भी यहीं मानना है.
निजी अस्पतालों की परफार्मेंस दयनीय
| जिला | कुल मरीज | सरकारी अस्पताल में सफल इलाज | निजी अस्पताल में सफल इलाज |
| चतरा | 910 | 723 | 0 |
| देवघर | 1190 | 923 | 82 |
| धनबाद | 2512 | 1883 | 635 |
| दुमका | 2792 | 1882 | 347 |
| गढ़वा | 1238 | 510 | 0 |
| गिरीडीह | 2020 | 1208 | 0 |
| गोड्डा | 1453 | 1212 | 0 |
| गुमला | 1030 | 823 | 3 |
| हजारीबाग | 1403 | 629 | 0 |
| जामताड़ा | 870 | 823 | 0 |
| खूंटी | 551 | 527 | 0 |
| कोडरमा | 633 | 236 | 0 |
| लातेहार | 611 | 347 | 0 |
| लोहरदगा | 392 | 340 | 0 |
| पाकुड़ | 1552 | 1254 | 0 |
| पलामू | 3052 | 2182 | 1 |
| पश्चिमी सिंहभूम | 3395 | 2832 | 0 |
| पूर्वी सिंहभूम | 4006 | 2081 | 15 |
| रामगढ़ | 941 | 376 | 74 |
| रांची | 5778 | 2110 | 0 |
| साहेबगंज | 3253 | 1380 | 484 |
| सरायकेला-खरसांवा | 2124 | 1684 | 30 |
| सिमडेगा | 759 | 362 | 0 |
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