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झारखंड में बेरोकटोक चल रहा हवाला कारोबारः नेता,अपराधी,बड़े व्यापारी, ठेकेदार ठिकाने लगा रहे ब्लैक मनी

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Ranchi: झारखंड में हवाला कारोबार न सिर्फ जिंदा है, बल्कि तेजी से फल-फूल रहा है. हवाला कारोबार में नेता, बड़े व्यापारी, ठेकेदार अपने ब्लैक मनी ठिकाने लगा रहे हैं.

बड़े अपराधी, व्यापारी, ठेकेदार इसी के माध्यम से बिना किसी रिकॉर्ड के अपनी ब्लैक मनी इधर से उधर सरका रहे हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य में कई हवाला एजेंट सक्रिय हैं.

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कहीं कूरियर कंपनी के नाम पर, कहीं मनी एक्सचेंज के नाम पर लाखों रुपये एक राज्य से दूसरे राज्यों में भेजे जा रहे हैं.

विदेशी करेंसी पर भी व्यवसायियों का इंवेस्टमेंट

विदेशी करेंसी पर भी व्यवसायियों के पैसे इंवेस्ट हो रहे हैं. विदेशी करेंसी अवैध रूप से झारखंड में लायी जा रही है, जिसका अवैध रूप से एक्सचेंज भी कराया जा रहा है. यह सब बेहद भरोसे के तहत हो रहा है.

पुलिस तक शिकायत भी नहीं पहुंचती है. हवाला एजेंट बैंकों के समानांतर सिस्टम चला रहे हैं. कर्ज लेना हो या देना सब चलता है. देसी भाषा में इसे बाजार से कर्ज कहते हैं. इसमें ब्याज की दर ज्यादा होती है और कम समय के लिए कर्ज उपलब्ध होती है.

क्या है हवाला कारोबार

हवाला के जरिये नकद धनराशि कम समय में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा दी जाती है. यह पैसों के लेनदेन का अवैध कारोबार है. बिना किसी बैंक या सरकारी सिस्टम की नजर में आए लाखों, करोड़ों रुपये एक से दूसरे शहर चले जाते हैं.

लेनदेन में व्यक्तियों के नेटवर्क का इस्तेमाल होता है. हवाला में पैसे देने वाले और लेने वाले व्यक्ति के बीच कोई सीधा संवाद नहीं होता. यह काम बीच के लोग और एजेंटों के माध्यम से कोड के जरिये होता है.

जानिए कैसे होता है हवाला कारोबार का पूरा खेल

हवाला का यह कारोबार WhatsApp कॉलिंग और मैसेज के जरिये चल रहा है. यह धंधा कोड पर चलता है. जानकारी के लिए बता दें, यहां रुपये जमा कीजिए और व्हाट्सएप से किसी खास नोट का नंबर उस शहर के किसी एजेंट तक पहुंच जाता है, जहां रुपया रिसीव करना है.

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पहले ये मैनुअल तरीके से चलता था. किसी नोट का आधा हिस्सा फाड़कर रख लिया और आधा पैसे की डिलीवरी लेने वाले के पास भेज दिया जाता था. ठिकाने पर दोनों टुकड़ों का मिलान कर राशि अदा कर दी जाती थी. बहुत मामूली से कमीशन पर ये खेल होता था.

लेकिन अब तो WhatsApp पर तत्काल कोड या नोट का नंबर पहुंच जाता है, बैंकों के आरटीजीएस से ट्रांसफर की तरह. मिली जानकारी के अनुसार, साइबर फ्रॉड को लेकर बैंक अलर्ट करते रहते हैं कि ओटीपी, पासवर्ड, डेबिट-क्रेडिट कार्ड, आधार का नंबर किसी से शेयर न करें. इसी तर्ज पर हवाला कारोबार में भी कोड की पूरी गोपनीयता रखी जाती है. बातचीत की भी अपनी भाषा है.

हवाला के जरिये करोड़ों की हेराफेरी की शिकायत

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रांची के बड़े व्यवसायियों के द्वारा हवाला रैकेट चलाकर करोड़ों की हेराफेरी की शिकायत सामने आयी है.

लोकसभा चुनाव के दौरान भी हवाला के जरिए विभिन्न राजनीतिक दलों को 122 करोड़ और चुनाव के बाद 200 करोड़ से अधिक की फंडिंग के सनसनीखेज मामले में शिकायत मिलने के बाद राज्य पुलिस ने इस संबंध में रांची जोन के डीआईजी व सीआईडी को जांच का जिम्मा दिया है.

राज्य पुलिस के एडीजी ऑपरेशन मुरारीलाल मीणा ने 25 सितंबर को हवाला और टेरर फंडिंग की शिकायत मिलने के बाद रांची रेंज डीआइजी से पूरे मामले में जांच कर रिपोर्ट मांगी है. वहीं सीआइडी की आर्थिक अपराध शाखा भी अलग से पूरे मामले की जांच करेगी.

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शेल कंपनियों के जरिये काला धन को किया जा रहा सफेद

मार्च 2018 में झारखंड और बिहार के तत्कालीन प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त कैलाश चंद्र घुमरिया ने कहा था कि आयकर विभाग ने झारखंड और बिहार राज्यों में 3500 शेल कंपनियों की पहचान की गई है.

ये कंपनियां सिर्फ कालेधन को सफेद बनाने का जरिया है. इन कंपनियों का पेड कैपिटल 10 लाख रुपए से 50 करोड़ रुपए तक का है. हवाला के माध्यम से इन कंपनियों ने 1000 करोड़ रुपए से अधिक इधर से उधर किए हैं. ये पैसे शेयर प्रीमियम के रूप में लोगों को मिले हैं.

झारखंड से जुड़े हवाला कारोबार के मामले

17 सितंबर 2019: बिहार से झारखंड के रास्ते कोलकाता तक हवाला के पैसे का खेल लंबे समय से चल रहा था. लेकिन इसकी भनक तक जांच एजेंसियों को नहीं लग रही थी.

27 अगस्त को भागलपुर से कोलकाता जा रही पागल बाबा बस में दुमका के बागनल के पास लूट हुई थी. इस लूटकांड में गिरफ्तार अपराधियों से जब पुलिस ने पूछताछ तो मामले का खुलासा हुआ.

जुलाई 2017: रांची के इनकम टैक्स कमिश्नर तापस दत्ता को सीबीआइ ने गिरफ्तार किया था. उनकी हवाला कारोबार में भी संलिप्तता सामने आई थी.

सितंबर 2017: झारखंड में संजीवनी बिल्डकॉन के जरिये अरबों रुपये की ठगी कर फरार हुआ जयंत दयाल नंदी उर्फ जेडी नंदी द्वारा हवाला के जरिये मलेशिया से पैसे भेजने की बात सामने आई थी.

इन पैसों से वह जमीन की ठगी के आरोप में दर्ज मामलों की पैरवी कर रहा था. सीबीआइ ने जानकारी मिलने के बाद इसकी जांच की थी.

मई 2014: रांची में आयकर विभाग ने हवाला कारोबारी हेमंत अग्रवाल को पकड़ा था. वह राज्यस्तरीय हवाला कारोबारी था. वह जेवर व्यापारियों के काले धन को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाता था.

वह एक कुरियर कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत था. हवाला का कारोबार उसका साइड बिजनेस था.

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