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नीलकंठ सिंह ने कहा- विपक्ष बहा रहा ‘घड़ियाली आंसू’, बयान पर बरपा हंगामा-कार्यवाही स्थगित

सदन की कार्यवाही बुधवार 11 बजे तक के लिए स्थगित

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Ranchi : जैसे आसार थे, आगाज भी कुछ वैसा ही दिख रहा. झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र के दूसरे दिन, सदन की कार्यवाही शुरु होते ही विपक्ष ने हंगामा शुरु किया. सदन की कार्यवाही महज 16 मिनट चली थी कि, नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने सीट से खड़े होकर कहा कि जनता के हित के लिए सदन चलना जरुरी है, लेकिन विपक्ष आखिर कहां जाये अपनी बातों को रखने के लिए. इस दौरान हेमंत सोरेन ने भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक पर बहस कराने की मांग की.

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भूमि अधिग्रहण बिल पर बरपा हंगामा


नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार नियमन लाए और भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को निरस्त करें. इसके जवाब में स्पीकर दिनेश उरांव ने कहा कि सदन चलने देने की जिम्मेवारी सभी विधायकों की है. अगर बिल पर सभी विधायकों की सहमति है तो विधायिका मापदंड के मुताबिक बिल पर बहस सदन में करायी जाये. संसदीय कार्य मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा कि मामला गंभीर है और ऐसे मामलों पर सदन में चर्चा होनी चाहिए. लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चर्चा के वक्त विपक्ष सदन में चर्चा नहीं करती और सदन छोड़कर निकल जाती है. जब विधेयक राष्ट्रपति के पास से आ चुका है तो फिर विपक्ष क्यों विरोध कर रहा है. इसके साथ ही विपक्ष पर घड़ियाली आंसू बहाने का आरोप लगाते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि सदन नहीं चलने देने का बहाना नहीं बनाये, जिसके बाद विपक्ष के विधायकों ने हंगामा शुरु कर दिया.

अमर्यादित भाषा का ना हो इस्तेमाल- सरयू

विपक्ष के विरोध को घड़ियाली आंसू बताने के साथ ही जहां विपक्षी विधायकों ने हंगामा शुरु कर दिया. वही मंत्री सरयू राय ने अपनी ही पार्टी के विधायकों को नसीहत दी कि सदन में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल ना करें. कुछ ऐसे शब्द ना कहे जाये जो विपक्षी नेताओं को उकसाने का काम करें.

इधर वेल में आकर विपक्षी विधायक विरोध जताना शुरु किया. हंगामे को देखते हुए स्पीकर ने सदन की कार्यवाही पहले साढ़े 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी थी. फिर सदन शुरु होने के बाद हंगामे को देखते हुए बुधवार तक के लिए सदन स्थागित कर दिया गया.

हेमंत ने किया सीएनटी एक्ट का उल्लंघन- विरंची

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वही हंगामे के बीच विधायक विरंची नारायण ने एक दैनिक अखबार की प्रति सदन में दिखाते हुए जेएमएम सुप्रीमो शिबू सोरेन के बेटे और नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन पर राज्यभर में नौ जगहों पर सीएनटी एक्ट का उल्लंघन करते हुए जमीन खरीदने का आरोप लगाया है. वही सदन के बाहर भी विरंची नारायण ने कहा कि जेएमएम ही नहीं बीजेपी के नेता भी सीएनटी एक्ट का उल्लंघन करते हैं, तो जांच होनी चाहिए.

सदन में अनुपूरक बजट पेश

विपक्ष के हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री ने 2596 करोड़ 86 लाख 23 हजार के अनुपूरक बजट को सदन के पटल पर रखा. इस दौरान विपक्ष का हंगामा जारी रहा. विपक्ष लगातार भूमि अधिग्रहण संशोधन अधिनियम को वापस लेने की मांग पर अड़ा रहा. हंगामे के बीच ही अनुपूरक बजट को सदन में पेश किया गया.

सदन के बाहर सीमा महतो का प्रदर्शन

पूर्व विधायक अमित महतो की पहली बार विधायक बनी पत्नी सीमा महतो ने विधानसभा के मानसून सत्र में दूसरे ही दिन अपना इरादा साफ जाहिर कर दिया. वह विधानसभा गेट के बाहर एक तख्ती लेकर बैठी. सीमा महतो ने उनके विधानसभा क्षेत्र में निर्माण किये जा रहे पुल में अनियमितताओं के बारे में कहना चाहा. गौर करने वाली बात यह है कि पहली बार विधायक बनी सीमा देवी का साथ देने के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा की तरफ से और किसी विधायक ने पहल नहीं की. वह अकेले ही करीब आधे घंटे तक गेट के बाहर धरने पर बैठी रहीं. कुछ देर मीडिया ने उन पर फोकस किया. तो करीब आधे घंटे के बाद जेएमएम के विधायक कुणाल षाड़ंगी भी सीमा के साथ आकर गये और विरोध करने लगे.

उल्लेखनीय है कि सीमा देवी पूर्व विधायक अमित महतो की पत्नी हैं. एक मामले में सजा हो जाने की वजह से अमित महतो की विधायकी चली गई थी. जिसके बाद चुनाव में फिर से सुदेश महतो को पटकनी देकर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने सिल्ली विधानसभा क्षेत्र में अपना परचम लहराया था और सीमा देवी विधायक बनी.

बाधित रही कार्यवाही

झारखंड विधानसभा का मॉनसून सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ता दिख रहा है. पहले ही दिन जहां भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर पक्ष-विपक्ष आमने-सामने रहें. वही दूसरे दिन भी तस्वीर वैसी ही दिखी. संशोधन विधेयक को वापस लेने की मांग पर विपक्ष का हंगामा जारी रहा, नतीजन पहले सदन की कार्यवाही साढ़ें 12 बजे तक के लिए फिर कल बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. बता दें कि छह दिनों का मॉनसून सत्र है. जिसमें दूसरे दिन भी हंगामा ही बरपा नजर आया.

वही इससे पहले मॉनसून सत्र के पहले दिन शोक प्रस्ताव के बाद सदन के पटल पर राष्ट्रपति द्वारा मंजूर भूमि अधिग्रहण संशोधन अध्यादेश के अलावा राज्यपाल द्वारा मंजूरी प्राप्त छह संशोधन अध्यादेश की भी प्रतियां रखी गयीं थीं.

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