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एनडीसी ने पूर्व सीएम बाबूलाल की सुरक्षा को कैसे खतरे में डाला, जिला प्रशासन की छवि हुई खराब

बिना सुरक्षाकर्मी के बाबूलाल ने चतरा में किया कार्यक्रम, नक्सलियों के टारगेट में हैं बाबूलाल

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Pravin Kumar

Ranchi: पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी की सुरक्षा को लेकर चतरा एनडीसी राजेश सिन्हा (नजारत उपसमाहर्ता) गंभीरता नहीं दिखायी. इस तरह चतरा में उनकी सुरक्षा को भी खतरे में डाल दिया गया और जिला प्रशासन की छवि भी खराब हुई. जेवीएम के नेता इसके लिए चतरा जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. आरोप लग रहे हैं कि सरकार के इशारे रर सबकुछ जानबूझ कर किया गया. जबकि जिला प्रशासन में इस तरह के मामलों को देखने के लिए एनडीसी कार्यालय ही जवाबदेह होता है. अब एनडीसी कार्यालय यह कह कर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात जवानों के वाहनों में तेल देने का प्रावधान ही नहीं है. अगर यह सही है तो फिर बाद में तेल कहां से और कैसे उपलब्ध कराया गया? ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि एनडीसी कार्यालय ने जो काम हो हल्ला और वरीय अफसरों को फोन करने के बाद किया, वही काम पहले क्यों नहीं किया?

बताते चलें कि पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी का कार्यक्रम 10 नवंबर को चतरा के घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र लावालोंग में था. इसकी सूचना जिला प्रशासन को 8 नवंबर को ही दे दी गई थी. कार्यक्रम के दिन बाबूलाल को सुबह 10 बजे ही चतरा परिसदन से लावालोंग के लिए निकलना था. लेकिन, दोपहर डेढ़ बजे बजे तक वाहनों के लिए तेल उपलब्ध नहीं कराया गया. इससे आहत बाबूलाल मरांडी बगैर सरकारी सुरक्षा व बिना सरकारी वाहन के ही कार्यक्रम स्थल की ओर रवाना हो गये.

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कैसे पड़ी सुरक्षा खतरे में

चतरा जिला प्रशासन द्वारा तेल देने में दो-ढाई घंटे विलंब किया गया. तेल देने के नाम पर कभी इस विभाग में, तो कभी उस विभाग में दौड़ाया गया. जब तेल का कूपन मिला तो अलग-अलग पेट्रोल पंपों के चार कूपन दिये गये, ताकि और विलंब हो व बाबूलाल कार्यक्रम स्थल तक पहुंच ही न सकें. इतना ही नहीं, पेट्रोल वाले वाहन को डीजल का कूपन दे दिया गया. गाड़ी का नंबर भी गलत अंकित किया गया. इस कारण बाबूलाल के सुरक्षाकर्मी लगभग डेढ़ बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे. उस वक्त कार्यक्रम समाप्त हो चुका था. इतने देर तक बाबूलाल मरांडी कार्यक्रम स्थल पर बिना सुरक्षा के थे.

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नक्सलियों के टारगेट में हैं बाबूलाल

पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी नक्सलियों के टारगेट में हैं. ऐसे में कहीं न कहीं तेल के लिए दौड़ाना उनकी सुरक्षा व्‍यवस्‍था पर सवाल भी खड़ा करता है. बाबूलाल मरांडी के आप्त सचिव राजेंद्र तिवारी के अनुसार बाबूलाल को सुबह 10:00 बजे चतरा से लवालोंग निकलना था. लेकिन, गाड़ी में ईंधन नहीं मिलने के कारण बाबूलाल को नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बिना सुरक्षाकर्मियों के निजी वाहन से जाना पड़ा. वाहन का इंधन जिला नजारत से मिलता है. वाहन चालक ने सुबह 9:00 बजे कहा कि इंधन चाहिए और नाजीर को फोन किया. इस पर नाजिर ने कहा कि इंधन देने का कोई आदेश नहीं है. इसके बाद एनडीसी से बात की गयी तो उन्‍होंने भी कहा कि इसका आदेश नहीं है.

चतरा एसपी से भी बात की गयी

चतरा एसपी से बात करने पर उनके रीडर ने कहा कि वाहनों को पुलिस लाइन भेज दिया जाये, वहां इंधन भरा दिया जायेगा. जब इंधन के लिये पर्ची कट रही थी, तब  जिला के किसी वरीय पदाधिकारी ने फोन किया कि वाहन भेज दीजिये हमलोग तेल दे देंगे.

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एनडीसी बोले- बाबूलाल मरांडी मामले में कोई निर्देश नहीं

एनडीसी राजेश सिन्हा ने ‘न्यूज विंग’ से बात करते हुये बताया कि 10 नवंबर को ही दिन के 11:15 बजे तेल के लिये कहा गया था. उस रिक्यूजिशन पर मैनें फौरन साइन कर दिया. जहां तक सरकारी वाहनों में तेल भराने का सवाल है तो डीसी के द्वारा आवंटित वाहनों में ही नजारत शाखा तेल भराती है. अन्य वाहनों में तेल भराने के लिए निर्देश आने पर ही इंधन दिया जाता है. बाबूलाल मरांडी के मामले में कोई निर्देश नहीं आया.

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