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News Wing Breaking :  बदल जायेगा राज्य का प्रशासनिक ढांंचा ! एचआर पॉलिसी, क्षेत्रीय प्रशासन, परिदान आयोग के गठन व निगरानी सेल की मजबूती की कवायद

RAVI ADITYA

 Ranchi : राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के स्वरूप में बदलाव और इसके मजबूती की कवायद राज्य सरकार ने शुरू कर दी है. केंद्रीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने राज्य सरकार को प्रशासनिक ढांंचा में मजबूती व स्वरूप में बदलाव को लेकर अपनी अनुशंसा भेजी है. राज्य सरकार इसके हर एक बिंदु पर मंथन कर रही है. इसके तहत सचिवालय, क्षेत्रीय प्रशासन, मानव संसाधन विकास, लोक सेवा आयोग और उपायुक्तों की भूमिका में बदलाव किये जाने की अनुशंसा की गयी है. अंडरटेकिंग एजेंसी व बोर्ड-निगम, कार्यकारी संस्था में परिवर्तित किये जायेंगे. कार्यकारी संस्था निगरानी और नियंत्रण दोनों का काम करेगी. इस पर भी राज्य सरकार मंथन कर रही है. चरणबद्ध तरीके से इस व्यवस्था को लागू किया जायेगा. सचिवालय के विभिन्न विभागों में तालमेल के लिये अंतर विभागीय कमेटी गठित की जायेगी.

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क्षेत्रीय प्रशासन में परिवर्तन की अनुशंसा

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केंद्रीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने क्षेत्रीय प्रशासन के क्रियान्वयन में परिवर्तन की भी अनुशंसा की है. इसमें कहा गया है कि जिलों की आंतरिक सुरक्षा और बेहतर करने की जरूरत है. कम्यूनिकेशन गैप के कारण राज्य मुख्यालय से संपर्क जल्द नहीं हो पाता है, इसके लिये सबसे पहले महत्वपूर्ण जिले चिन्हित किये जायेंगे. जो मुख्यालय व क्षेत्रीय कार्यालय के बीच कड़ी का काम करेंगे.

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एचआर पॉलिसी में संशोधन की बात

मानव संसाधन विभाग में एचआर पॉलिसी में संशोधन की बात कही गयी है. इसमें प्रशिक्षण को महत्वपूर्ण बताया गया है. गजेटेड अफसरों को मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम और थर्ड ग्रेड कर्मियों को इंडक्शन ट्रेनिंग देने की बात कही गयी है. राज्य के लोक सेवा आयोग को अन्य नियुक्तियों पर भी नजर रखने की जिम्मेदारी देने की अनुशंसा की गयी है. आयोग को यह भी देखना होगा कि जिलों में नियुक्ति सही तरीके से हो रही है या नहीं.

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पारदर्शिता के लिये परिदान आयोग

पारदर्शिता के लिए परिदान आयोग के गठन की बात कही गयी है. परिदान आयोग के गठन का उद्देश्य सरकारी कामों में पारदर्शिता लाना है. कार्मिक विभाग को भेजे गये प्रारूप में कहा गया है कि सूचना के अधिकार के तर्ज पर सशक्त आयोग का गठन किया जाये, जिससे लोगों को सरकारी सेवा का लाभ मिल सके. प्रारूप में नगरपालिका से जुड़े मामले जैसे म्यूटेशन, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, होल्डिंग, श्रम विभाग के मामले, परिवहन और प्रखंडों से जुड़े मामले को प्रमुखता दी गयी है. केंद्र का मानना है कि आमजन से जुड़ी समस्याओं का निपटारा त्वरित गति से नहीं हो पा रहा है.

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ई- गवर्नेंस सिस्टम में बदलाव की अनुशंसा

ई- गवर्नेंस सिस्टम को और मजबूत बनाने की अनुशंसा की गयी है. आयोग की अनुशंसा के अनुसार सूचना प्रबंधन प्रणाली हर डीसी ऑफिस में होगा. जिले के उपायुक्त हर दिन प्रोग्राम और परियोजनाओं की देख-रेख व मूल्यांकन करेंगे. केंद्रीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने कंप्यूटराइड डिस्ट्रिक गवर्नेंस सेल स्थापित करने की अनुशंसा की है. हर जिले में निगरानी सेल को मजबूत करने की वकालत भी की गयी है. आम नागरिकों को ध्यान में रखकर प्रशासन तंत्र का खाका खींचने की बात कही है. साथ ही ई-गवर्नेंस में नैतिकता को जोड़ने की भी बात है.

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प्रशासनिक ढ़ांचा में परिवर्तन की बात

केंद्रीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने राज्य में प्रशासनिक ढ़ांचा में भी परिवर्तन की अनुशंसा की है. इसके तहत कैडर मैनेजमेंट को अहम माना गया है. आयोग के अनुसार महत्वपूर्ण चिन्हित विभागों में उसी के अनुरूप पदाधिकारियों को पदस्थापित करने की अनुशंसा की गयी है. महत्वपूर्ण जिले और मुख्यालय में वरीय पदाधिकारियों को रखने की बात कही गयी है.

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