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बकोरिया कांड में मारे गये लोगों के परिजनों पर केस वापस लेने का दबाव बना रहा है जेजेएमपी

  • रांची पहुंचे परिजन, जांच में तेजी लाने के लिए राजभवन को सौंपा ज्ञापन

Ranchi: आंखों में आंसू और न्याय मिलने की आस के साथ कथित बकोरिया मुठभेड़ में मारे गये पारा शिक्षक उदय यादव और नीरज यादव के परिजन राजभवन पहुंचे. पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड के बकोरिया गांव में 9 जून 2015 में कथित नक्सली मुठभेड़ में 12 लोगों मारे गये थे. परिजनों का कहना है कि नक्सली संगठन जेजेएमपी (झारखंड जन मुक्ति परिषद) और पुलिस जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है. मामले को रफादफ करने के लिए मुठभेड़ में मारे गये परिवार को केस वापस लेने का दबाव और प्रलोभन दिया जा रहा है. दोषियों को सजा नहीं होने पर हम सभी पीड़ित परिवार के लोग कभी भी हत्या हो सकती है. अगर इस कांड के अनुसंधान में और विलंब हुआ तो मजबूर होकर परिवार के अन्य सदस्यों के साथ आत्महत्या भी करनी पड़ सकती है.

न्यूज विंग से बातचीत में जवाहर यादव ने क्या कहा

राजभवन में ज्ञापन देने आये बकोरिया कांड में मारे गये पारा शिक्षक उदय यादव के पिता जवाहर यादव ने कहा, अब तक सीबीआई  जांच शुरू नहीं हुई है. केस लड़ने के सवाल पर कहते हैं कि पुलिस वाले सुलह करने की बात कह रहे हैं. जेजेएमपी वाले धमकी दे रहे हैं. मिलने के लिए भी बुलाते हैं. दरोगा रुस्तम अंसारी के रिश्तेदार रईस अंसारी घर आकर बोले कि पैसा लेकर सुलाह कर लो. इस मामले में पुलिस के बड़े-बड़े अधिकारी शामिल हैं. आप केस नहीं जीत पाओगे.

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क्या लिखा है राजयपाल को दिये ज्ञापन में

जून 2015 में डालटेनगंज सदर (सतबरवा ) थाना के बकोरिया में पारा शिक्षक उदय यादव के साथ कुल 12 लोगों की हत्या जेजेएमपी, पुलिस, सीआरपीएफ कोबरा के लोगों द्वारा कर दी गयी थी. दोषियों को सजा दिलाने के लिए पीड़ित परिवार के सदस्य द्वारा कई बार गृह सचिव,  मुख्य सचिव,  डीजीपी एवं सरकार को आवेदन दिया गया और सीबीआई से अनुसंधान का भी अनुरोध किया गया था.

मारे गये बच्चों तक को बता दिया गया नक्सली 

हर स्तर पर निराशा हाथ लगने के बाद अंतिम आसार माननीय उच्च न्यायालय झारखंड में वाद संख्या डब्लू पी (सीआर) नंबर 312/2016 दायर किया गया. यह मामला करीब 2 वर्षों तक चलता रहा. इस मामले को दबाने का भरपूर प्रयास झारखंड पुलिस एवं झारखंड सरकार द्वारा किया गया. त्ताकि यह मामला सीबीआई के पास अनुसंधान हेतु नहीं जाए. आनन-फानन में झारखंड पुलिस के द्वारा डाल्टनगंज (सतबरवा ) थाना कांड संख्या 349/15 दिनांक 9 जून 2015 में अतिंम प्रतिवेदन भी समर्पित कर दिया गया. मारे गये लोगों में से कई बच्चे एवं अन्य को नक्सली बताते हुए अंतिम पत्र समर्पित किया गया.

राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार को झूठी बातें बतायी गयीं

ज्ञापन में लिखा है कि इस मामले में झारखंड पुलिस के डीजीपी, सीआरपीएफ,  कोबरा के पदाधिकारी के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार को झूठी बातें बतायी गयी. सभी को अंधेरे में रख दिनांक 22 अक्टूबर 2018 को इस मामले में सीबीआई जांच का आदेश माननीय न्यायालय द्वारा पारित किया गया. इस संबंध में सीबीआई द्वारा 19 नम्बर 2018 को एस सी-वन ब्रांच नई दिल्ली में कांड संख्या आरसी-4(एस) 2018 दर्ज किया गया. जिसके अनुसंधानकर्ता डीएसपी के के सिंह बनाये गये थे. दिनांक 17 दिसम्बर 2018 को स्थानीय समाचार पत्रों में इस आशय की खबर प्रकाशित हुई थी. इसके अनुसार आनन-फनन में बिना किसी कारण इस कांड के अनुसंधान डीएसपी केके सिंह को बदलकर एडिशनल एसपी डीके राय को कांड का अनुसंधान कर्ता बनाया गया. इसके अलावा सीबीआई द्वारा आज तक इस कांड के संबंध में किसी गवाह का बयान दर्ज नहीं किया गया है. और न ही अभी तक कोई पदाधिकारी घटनास्थल पर गये हैं. कम से कम 10 निर्दोष व्यक्तियों की हत्या के संबंध में दर्ज गंभीर कांड के अनुसंधान में लापरवाही से यह प्रतीत हो रहा है कि सीबीआई पर झारखंड पुलिस एवं सीआरपीएफ के वरीय पदाधिकारी के द्वारा कांड को दबाने का दबाव है. अनुसंधान में जितना होगा उतना ही कांड के सच को नष्ट किए जाने का खतरा होगा. हम गरीब ग्रामीणों पर जान का खतरा बना रहेगा. क्योंकि झारखंड के कई आईपीएस पदाधिकारी एवं सीआरपीएफ के पदाधिकारी के साथ संगठन का भी इसमें हाथ है. जो लगातार गरीबों को धमका रहे हैं और उन्हें बदलने हेतु दबाव दे रहे हैं.

ये लोग पहुंचे थे राजभवन 

राजभवन पहुंचने वालों में मृतक नीरज यादव के भाई संतोष यादव मां मनमतिया देवी, बेटी नेहा कुमारी, पिता ईश्वर यादव के साथ उदय यादव के पिता जवाहर यादव, पत्नी मंजू यादव ,राज भवन पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और कहा इस कांड के अनुसंधान में और विलंब हुआ तो मजबूर होकर हम परिवार के अन्य सदस्य के साथ आत्महत्या भी करनी पड़ सकती है. ज्ञापन में त्वरित गति से इस कांड का अनुसंधान करने के लिए कहा गया है. साथ ही संबंधित पदाधिकारी को आदेश देने का आग्रह है ताकि दोषियों को सजा मिल सके.

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Nayika

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