
Khunti: खूंटी जिले के दक्षिणी अड़की का मुख्यालय है बिरबांकी. एक वक्त था जब यहां नक्सली दिन में हथियार लेकर बैठे रहते थे. इस गांव तक जाने के नाम से सरकारी पदाधिकारी व कर्मियों सहित सामान्य लोगों के हाड़ कांप जाया करते थे. अब समय बदल गया है. बिरबांकी से नक्सलवाद तो क्या वह भय भी खत्म हो गया है, जो लोगों के रातों की नींद और दिन का चैन लूट लिया करता था. बिरबांकी सैकड़ो गांवों के लोगों का मुख्य बाजार है. यहां बाजार विकसित हुआ. कई सरकारी योजनाएं भी आई. लेकिन अब भी मोबाईल व इंटरनेट की कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण बिरबांकी के विकास पर ग्रहण लग गया है.
बिरबांकी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल, सीआरपीएफ कैंप, पंचायत सचिवालय समेत अन्य सरकारी संस्थान हैं और बिरबांकी क्षेत्र का बड़ा बाजार है. इसके बावजूद आज तक बिरबांकी मोबाईल व इंटरनेट से नहीं जुड़ पाया है. लगभग दस-पंद्रह वर्ष पूर्व यहां बीएसएनएल का एक मोबाईल टावर लगाया गया था. आज उससे बड़ी मुश्किल से एक-दो कॉल लगते हैं. इंटरनेट तो बिल्कुल ही नहीं चलता. इस कारण यहां अस्पताल, स्कूल के साथ अन्य सरकारी संस्थानों के संचालन में परेशानी हो रही है. लोगों को मोबाईल पर बात करने के लिए पहाड़ पर चढ़ना पड़ता है. इस पंचायत में आबुआ: आवास के आवेदन भरने में लोगों को परेशानी हो रही है.
बिरबांकी समेत पंचायत के कई गांवों को जल-नल योजना का लाभ नहीं
गर्मी आने को है, उससे पहले ही बिरबांकी और उसके टोलों में पेयजल संकट गहरा गया है. बिरबांकी में लगे सोलर जलमीनार का काम आज तक पूरा नहीं हो पाया है. इस कारण लोगों के घरों तक नल से जल नहीं पहुंच पा रहा है. मुखिया श्वेता बाखला बतातीं हैं कि बिरबांकी समेत पंचायत के कुडुम्बदा, बंकीरा, जटुआ, इचाडीह, बुड़ीकाय समेत बिरबांकी पंचायत के लगभग 20 टोलों में आज भी जल नल योजना नहीं पहुंची है. गर्मी के दिनों में लोग नदी-ढ़ोंढ़ा के किनारे गड्ढ़े खोदकर पानी छानते हैं और उसे घर लाकर उबालने के बाद पीते हैं.
नक्सलियों द्वारा उड़ाया गया प्रोजेक्ट स्कूल, नहीं शुरू हो सका दुबारा
नक्सलियों ने लगभग सात-आठ पूर्व भाकपा माओवादियों ने बिरबबांकी के प्रोजेक्ट हाई स्कूल को सिलिंडर बम लगाकर उड़ा दिया था. उसके बाद स्कूल को अड़की के एक हाई स्कूल में मर्ज कर दिया गया और दोबारा प्रोजेक्ट स्कूल, बिरबांकी शुरू नहीं सका. इस बीच मुखिया स्वेता बाखला ने उपायुक्त को पत्र लिखा, तो बिरबांकी के ही कुछ लोगों ने सीएम हेमंत सोरेन से मिलकर उनसे प्रोजेक्ट स्कूल को शुरू करने की मांग की, लेकिन स्कूल शुरू नहीं हुआ. स्कूल के पास अब सीआरपीएफ कैंप है और उसके बगल में एकलव्य विद्यालय के भवन का निर्माण हो रहा है. अब बिरबांकी और आसपास के बच्चे आठ किमी दूर तुबिल और 14 किमी दूर अड़की के स्कूलों में पढ़ने जाते हैं. अधिकांश बच्चे मध्य विद्यालय की पढ़ाई पूरी करने के बाद गरीबी के कारण पढ़ाई छोड़ देते हैं. ग्रामीण इन समस्याओं के सामाधान की मांग करते रहते हैं, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं होता.




