
Abinash Mishra
Jamshedpur : महज सवा तीन सौ करोड़ में तैयार होने वाली नामकुम-कांड्रा रेल लाइन का खर्च करीब तीन हजार करोड़ का हो गया है.
2004 में स्वीकृति मिलने के बाद ये लाइन अब तक क्यों नही बनी इसका जवाब रेलवे के पास नहीं है.
अब एक बार फिर से दक्षिण-पूर्व रेलवे ने बजट राशि की समीक्षा कर रेल मंत्रालय से 2850 करोड़ रुपये मांगे हैं.
राशि स्वीकृत होते ही तुरंत टेंडर निकालने की योजना है और पूरी लाइन को 2022 के आखिर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
फेल होती गयीं सर्वे रिपोर्ट्स
डेढ़ दशक पुराने प्रोजेक्ट का 2004 से 2011 के बीच तीन बार सर्वे हुआ, नयी राशि भी तय हुई, लेकिन हर बार सबकुछ फेल ही साबित हुई.
अब जब खर्च तीन हजार करोड को छू रहा है तो दक्षिण-पूर्व रेलवे को देरी का एहसास हुआ है.
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इस रेललाइन के फायदे
सबसे बडा फायदा इस रेल भाग के बन जाने से ये होगा कि टाटा-रांची रेल मार्ग की दूरी 120 किमी के आसपास हो जायेगी जो की अभी पुरुलिया-मुरी होकर 213 किमी है.
अभी इसको तय करने में पांच घंटे का वक्त लगता है. एक सिंगल लाइन चाण्डिल-मुरी मार्ग भी है. इस रूट से भी पांच घंटे लग ही जाते है क्योंकि बीच में सिंगल लाइन होती है जिसमें पासिंग की समस्या आती रहती है.
इस रूट की भी दूरी 170 किमी की है. लेकिन काड्रा-नामकुम रूट के तैयार हो जाने के बाद दूरी मात्र 120 किमी की रह जायेगी यानि तीन घंटे में टाटा से रांची का सफर तय किया जा सकेगा.
फिलहाल जो रुट है और जो ट्रेने टाटा-रांची के बीच चल रही है उससे लोग सफर करने से परहेज करते हैं. इसीलिए कम समय में रांची जाने वालों के लिए बस का ही विकल्प बचता है जो तीन घंटे का समय लेता है.
मगर उसके लिए यात्रियों को 160 से 250 तक किराया चुकाना पड़ता है. ये रेग्युलर आने-जाने वालों के लिए काफी महंगा होता है.
इस रेल भाग के बन जाने से किराया महज 60-70 रुपये के आसपास होगा जो सभी वर्गों के लिए काफी किफायती साबित होगा.
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क्या-क्या बनेगा तय राशि में
मंत्रालय को भेजे गये प्रस्ताव में कांड्रा-नामकुम के बीच 6 स्टेशन होंगे, जिसमें पलगम, रंगामाटी, तमाड़, बुंडू, उलिदा और हड़ाप के नाम शामिल हैं.
सभी जगहों पर हाईलेवल प्लेटफॉर्म और फुट ओवरब्रिज का भी प्रस्ताव दिया गया है.
सभी स्टेशनों के बीच तमाड़ सबसे बड़ा स्टेशन होगा जहां एक्सप्रेस ट्रेन को भी स्टॉपेज दिया जायेगा क्योकि यहा पर एक मेन लाइन के अलावा चार लूप लाइन भी होंगे.
बाकी सभी स्टेशनों पर एक मेन लाइन और एक ही लूप लाइन होगा जहां केवल पैसेंजर ट्रेन ही रुक सकेगी.
क्या कहते हैं सीनियर सीपीआरओ
इस सबंध में दक्षिण पूर्व रेलवे के सीनियर सीपीआरओ संजय घोष का कहना है कि एसई रेलवे ने कांड्रा-नामकुम रेलखंड की राशि स्वीकृति के लिए रेल मंत्रालय प्रस्ताव भेजा है.
हरी झंडी मिलते ही इसमें देरी नही होगी और टेंडर निकाल दिया जायेगा.
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