
Ranchi: राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण घोटाले में आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की ओर से दायर याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को हुई. मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की कोर्ट ने प्रार्थी को मामले में निचली अदालत के आरोप गठन के खिलाफ फ्रेश हस्तक्षेप याचिका (आईए ) 2 सप्ताह में दायर करने का निर्देश दिया है. इससे पहले मधु कोड़ा की ओर से पूर्व में दाखिल आईए को वापस ले लिया गया. दरअसल, निचली अदालत द्वारा इस मामले में मधु कोड़ा के खिलाफ आरोप गठित किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. इसके पहले उन्होंने निचली अदालत द्वारा डिस्चार्ज पिटिशन खारिज किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. इसी दौरान निचली अदालत ने उनके खिलाफ आरोप गठित कर दिया था। जिसके बाद मधु कोड़ा ने हस्तक्षेप याचिका (आईए ) दाखिल कर निचली अदालत द्वारा आरोप गठित किए जाने को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.
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बता देगी मधु कोड़ा पर आरोप है कि उन्होंने पूर्व में मुख्यमंत्री के उच्च पद का दुरुपयोग करते हुए हैदराबाद की बिजली कंपनी आईवीआरसीएल के डायरेक्टर डीके श्रीवास्तव से मुंबई में 11.40 करोड़ रुपए घूस ली। साथ ही कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए उसे लातेहार, गढ़वा और पलामू सहित छह जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकरण करने का टेंडर दे दिया। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है, इसमें मधु कोड़ा ढाई साल तक जेल में रहे थे। उन्हें 30 जुलाई 2013 को जमानत मिली थी। बता दें कि आरोप है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने हैदराबाद की ब्लैक लिस्टेड कंपनी आईवीआरसीएल को काम दिया था। वर्ष 2006 में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण परियोजना के लिए झारखंड को केंद्र से 467.76 करोड़ रुपए मिले थे। इस परियोजना के तहत झारखंड के छह जिलों के 27359 गांवों का विद्युतीकरण किया जाना था। इससे 29.26 लाख परिवारों को सीधे तौर पर लाभ मिलता।




