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सफाई व्यवस्था संभाल रही एस्सेल इंफ्रा से नगर विकास मंत्री की चलती है कमीशनखोरी :  सुबोधकांत सहाय

पत्रकारों पर दिये अमर्यादित बयान पर कांग्रेस ने सीपी सिंह पर साधा निशाना

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Ranchi : पत्रकारों पर आपत्तिजनक बयान देकर राज्य के नगर विकास मंत्री सीपी सिंह फिर से विवादों में घिर गये हैं. जिस तरह से उन्होंने मजबूरी में पत्रकारिता करने की बात कही, इससे लगता है कि उनसे अब कोई भी पत्रकार सवाल ना ही पूछे. क्योंकि ना जाने कब मंत्री जी अपना विवेक खोकर अमर्यादित बयान देने को उतारू हो जाए. अब उनके इस बयान पर कांग्रेस नेता सुबोधकांत सहाय ने भी नाराजगी जतायी है. उन्होंने कहा कि नगर विकास मंत्री दिमागी तौर पर दिवालियापन की शिकार हो गये हैं. अपनी जिम्मेवारी को तो वे सही तरीके से पूरा नहीं कर पा रहे हैं. आज नवरात्र शुरू होने के बाद भी शहर में कई जगहों पर गंदगी का अंबार लगा है. रांची नगर निगम ‘नरक निगम’ बन चुका है. ऐसी संस्था (रांची एस्सेल इंफ्रा) को पाल रखा है, जिनसे उनकी कमीशनखोरी चलती है. अब अगर उनसे कोई भी सवाल पूछे, तो अपने विवेक को अनदेखा कर वे अमर्यादित बयान दे देते हैं. मंत्री पद पर बैठे सीपी सिंह को सोचना चाहिए कि उनके विभाग के अंतर्गत जितने भी एजेंसी(नगर निगम, आरआरडीए या जुडको) है, उसकी स्थिति क्या है, यह किसी से छिपी नहीं हुई है. मंत्रीजी के लिए ज्यादा अच्छा होता कि वे उसे सुधारने की नसीहत अपने विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों को देते. इसके उलट पत्रकारों को प्रधानमंत्री का पीसी बनने की सलाह देकर उन्होंने अपने विवेक पर ही सवाल खड़ा कर दिया है.

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संतोष नहीं मजबूरी में काम करते हैं पत्रकार

मालूम हो कि सफाई व्यवस्था और एस्सेल इंफ्रा को डिबार करने पर एक पत्रकार ने नगर विकास मंत्री से सवाल किया था, तो उनका जवाब था कि जाओ मोदी के पास, पीएस में रख लेगें. जब उस पत्रकार ने उनके जवाब पर असहमति जताते हुए पत्रकारिता लाइन में संतोष रहने की बात कही, तो उनका कहा था कि यह पत्रकारों का संतोष नहीं बल्कि मजबूरी है. अगर पत्रकारों का दिन इतना खराब नहीं होता, तो वे झोला लेकर नहीं घूमते.

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कमीशनखोरी कर एस्सेल इंफ्रा को दिया है एक्सटेंशन

कांग्रेसी नेता सुबोधकांत सहाय ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे नगर विकास मंत्री को सोचना है कि वे एक जनप्रतिनिधि हैं. लेकिन पत्रकारों पर इसतरह का विवादित बयान देकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे अब अपना विवेक खो बैठे हैं. नगर विकास मंत्री के पद पर बैठने के बाद से ही रांची नगर निगम ‘नरक निगम’ बन गया है. उनके विभाग ने राजधानी की सफाई के लिए एक ऐसे संस्था(रांची एस्सेल इंफ्रा) को पाल रखा है, जिनसे उनकी कमीशनखोरी चलती है. सबसे आश्चर्य की बात यह है कि निगम बोर्ड की बैठक में ही कंपनी को टर्मिनेट करने का फैसला लिया गया था. उसी कंपनी को लगातार एक्सटेंशन उन्होंने अपने कार्यशैली पर ही सवाल खड़ा किया है.

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विफलता सामने, तभी दे रहे ऐसे विवादित बयान

सीपी सिंह के पूर्व के दिये कई विवादित बयानों की बात करते हुए कांग्रेसी नेता ने कहा कि जब विफलता सामने आती है, तभी ऐसे ही विवेकहीन लोगों का बयान सामने आता है. पत्रकारों की बात तो छोड़िए, उन्होंने कुछ दिन पहले पुलिस सहायता केंद्र का भी नाम बदल पुलिस वसूली केंद्र रखने की सलाह देकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया था.

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