
Mumbai : महाराष्ट्र की राजनीति ने एक बार फिर बड़ी करवट ली है. एनसीपी विधायक दल के नेता अजित पवार ने भाजपा की सरकार से डिप्टी सीएम के पद से इस्तीफा दे दिया है. और आज शाम तक मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़ण्वीस भी अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं.
हालांकि इस बात की अटकलें पहले से लगायी जा रही थीं. आपको बता दें कि एनसीपी नेता अजित पवार ने एक नाटकीय घटनाक्रम में एनसीपी से अलग होकर देवेंद्र फडणवीस की सरकार को समर्थन दिया था. इसी आधार पर राज्यपाल ने देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलायी थी और अजित पवार उपमुख्यमंत्री बने थे.
इस बीच खबर थी कि अजित पवार को मनाने के लिए शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सूले लगातार कोशिश कर रही थीं. इससे अजित पवार की एनसीपी की ओर वापसी की उम्मीद मजबूत हो रही थी. बता दें कि कल अजित पवार मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ एक बैठक से गायब रहे थे, तो वहीं आज सुबह वह मुंबई अटैक के शहीदों को श्रद्धांजलि के मौके पर नहीं दिखे. एनसीपी की ओर से अजित पवार को मनाने की हर कोशिश हो रही थी. एनसीपी नेता भुजबल उनसे कल मुलाकात कर चुके थे.
डिप्टी सीएम की शपथ लेने के बाद बंद कर दिये गये थे घोटाला मामले
यह बताना भी जरूरी है कि डिप्टी सीएम की शपथ लेने के बाद अजित पवार को अपने खिलाफ चल रही घोटाले के मामलों से कुछ राहत मिली थी. उनके खिलाफ चल रहे 72 हजार करोड़ के सिंचाई घोटाला मामले को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया था.
महाराष्ट्र के एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के सूत्रों ने अनुसार इस घोटाले में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है. सूत्रों के अनुसार एसीबी के अधिकारियों ने कहा है कि सोशल मीडिया में सिंचाई घोटाले से संबंधित जो लिस्ट सर्कुलेट हो रहा है उसमें से कोई भी मामला महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार से संबंधित नहीं है.
नयी जानकारी मिलने पर फिर से खोला जा सकता केस
उनका कहना है कि जो मामले बंद किये गये हैं वो सशर्त हैं, यदि इन मामलों में कोई नयी जानकारी आती है या कोर्ट इस मामले में जांच का आदेश देता है तो फिर इन मामलों को फिर से खोला जा सकता है. महाराष्ट्र एसीबी के डीजी परमबीर सिंह ने कहा कि हम लोग सिंचाई सें संबंधित शिकायतों के 3000 टेंडर की जांच कर रहे हैं. जो मामले बंद किये गये हैं वो रूटीन किस्म के हैं. इस मामले में पहले की तरह जांच जारी है.




