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आयुष्मान सर्वेयर मरीजों से वसूल सकें पैसे! इसलिए इंप्लांट मंगाने में जान बूझकर करते हैं देर      

आयुष्मान सर्वेयर का काम ऑपरेशन के लिए लगने वाले इंप्लांट को नियम के तहत मंगाना होता है. इस प्रक्रिया में दो से तीन दिन का समय लगता है.

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 Ranchi : आयुष्मान भारत के तहत रिम्स में इलाज कराने वाले मरीजों को तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. रिम्स में अगर आयुष्मान के तहत  ऑपरेशन कराना है तो मरीजों को दो से तीन महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है. इसके पीछे की वजह डॉक्टर नहीं बल्कि रिम्स में हर विभाग में काम कर रहे आयुष्मान सर्वेयर हैं. आयुष्मान सर्वेयर का काम ऑपरेशन के लिए लगने वाले इंप्लांट को नियम के तहत मंगाना होता है. इस प्रक्रिया में दो से तीन दिन का समय लगता है. सर्वेयरों के देरी के कारण समय लंबा हो जाता है.  आरोप है कि जल्द से जल्द इंप्लांट  मंगाने के लिए सर्वेयर मरीजों से पैसों की मांग करते हैं. ऑपरेशन में हो रही देरी के कारण मरीजों के परिजन पैसे दे भी दे रहे हैं.

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टेंडर के जरिए मंगाया जाता है इंप्लांट

मरीज को अगर ऑपरेशन कराने की जरुरत पड़ती है तो डॉक्टर सबसे पहले लगने वाले इंप्लांट का नाम मरीज के पुर्जे पर लिख देते हैं. पुर्जे में लिखे सामान की लिस्ट आयुष्मान भारत के फॉर्मेट वाले  फॉर्म में भरना होता है. जिसके बाद उसमें पांच डॉक्टरों की  साइन लगती हैं और फॉर्म को   ऑनलाइन टेंडर के लिए अपलोड कर दिया जाता है. टेंडर के आये एल वन रेट पर फिर से पांच डॉक्टरों की साइन होती है. जिसके बाद फाइनल कर इंप्लांट मंगाया जाता है. यह प्रक्रिया तीन दिनों में पूरी कर ली जाती है. पर मरीजों को परेशान कर उनके पैसे लेने के लिए आयुष्मान सर्वेयर देरी कर देते हैं.

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न्यूज विंग ने चार से पांच मरीजों से आज बात की जो कम से कम एक महीने से इंप्लांट के भाव में इलाज नहीं करा पा  रहे हैं. इन मरीजों के परिजनों का कहना है कि आयुष्मान के जरिए ऑपरेशन का सामन मंगाने वाला जल्दी दिखता नहीं है. जल्द  मंगाने के लिए कहने पर पहले तो लगने वाले सामान का दाम बताता है, उसके बाद भी जल्द मंगवाने कहने पर पैसों की मांग करता है.  वीडियो रिकार्डिंग की बात करने का बात कहने पर मरीजों के परिजन कतराने लगते हैं. कहते हैं डॉक्टर देख लेगा तो हमारा ऑपरेशन नहीं करेगा.   

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