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28 फरवरी बीता, इस्तीफे की पेशकश करनेवाले मंत्री सरयू राय 01 मार्च को 12 बजे राज्यपाल से मिलेंगे

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: फरवरी महीने के आखिरी दिन यानी 28 फरवरी को फिर से सरयू राय प्रकरण में नया मोड़ा आया है. मंत्री सरयू राय ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लिखे पत्र में साफ तौर से लिखा था कि “आपसे निवेदन करने दिल्ली आया था. पर आपके दिल्ली से बाहर रहने के कारण यह लिखित निवेदन आपकी प्रतिष्ठा में छोड़ जा रहा हूं. आप जब भी आदेश करेंगे हाज़िर हो जाऊंगा. विनम्र अनुरोध है कि वर्तमान फरवरी माह के अंत तक या इसके पूर्व इस बारे में आपका निर्देश मुझे प्राप्त हो जायेगा.” लेकिन पार्टी की तरफ से मंत्री सरयू राय को न ही किसी तरह का निर्देश दिया और न ही उनके लिखे किसी भी पत्र पर कार्रवाई पार्टी की तरफ से हुई. इधर दूसरी तरफ मंत्री सरयू राय ने राजभवन से राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मिलने के लिए एक मार्च दोपहर 12 बजे का समय मांगा है. कयास लगाया जा रहा है कि सरयू राय मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे.

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संगठन मंत्री रामलाल का आना भी बेकार

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इसके पीछे का कारण यहां डॉक्टरों का वेतन पहले से मौजूद मेडिकल कॉलेजों की तुलना में काफी कम था. संसाधनों की कमी और निजी कारण बताकर डॉक्टर नये मेडिकल कॉलेजों में सेवा देने से पीछे हट रहे हैं.

सरयू राय के पार्टी अध्यक्ष को पत्र लिखने के बाद मामले को शांत करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल को रांची भेजा गया था. उन्होंने सीएम के आवास पर सभी मंत्रियों और सीएम की राय मामले पर जानी थी. बाद में देर रात सरयू राय से बीजेपी कार्यालय में मुलाकात भी की. मुलाकात के दौरान मंत्री सरयू राय ने खुल कर अपनी बातों को संगठन मंत्री के सामने रखा था. रामलाल ने भी सरयू राय को मीडिया में बात लीक न करने की सलाह दी थी और आश्वासन दिया था कि निश्चित तौर पर पार्टी मामले पर संज्ञान लेगी और रास्ता निकालेगी. लेकिन रामलाल के जाने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया. किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब सरयू राय ने राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है.

क्या कहा था सरयू राय ने अमित शाह को        

अपने पत्र में मंत्री सरयू राय ने अमित शाह को लिखा था कि “मैं समझता हूं कि हर व्यक्ति की अपनी कार्यशैली होती है, अपनी प्राथमिकताएं होती हैं, अपनी विशेषताएं होती हैं, ख़ूबियां-ख़ामियां होती हैं. मैं अंतर्मन से इसका समादर करता हूं. किसी की आलोचना करना मेरा मक़सद नहीं है. मेरा आपसे इतना ही निवेदन है कि यदि माननीय मुख्यमंत्री जी की कार्यशैली में, बात-व्यवहार में, प्राथमिकताओं में बदलाव संभव नहीं है, उनके अनुरूप ढलना मेरे लिए संभव नहीं है और केन्द्रीय नेतृत्व अथवा राज्य नेतृत्व के पास इस बारे में पहल करने का समय नहीं है तो बेहतर होगा कि होगा कि मैं केन्द्रीय नेतृत्व के समक्ष असमंजस की स्थिति पैदा करने के बदले स्वयं मंत्रिपरिषद से अलग हो जाउं, ताकि रोज़-रोज़ की खटपट से, विवाद से, कशमकश से और शर्मिंदगी से मुझे छुटकारा मिले. आपसे निवेदन करने दिल्ली आया था. पर आपके दिल्ली से बाहर रहने के कारण यह लिखित निवेदन आपकी प्रतिष्ठा में छोड़ जा रहा हूं. आप जब भी आदेश करेंगे हाज़िर हो जाऊंगा. विनम्र अनुरोध है कि वर्तमान फरवरी माह के अंत तक या इसके पूर्व इस बारे में आपका निर्देश मुझे प्राप्त हो जायेगा.”

इसे भी पढ़ें – सरयू राय प्रकरण : मामला सुलझाने को केंद्र से रांची आ रहे हैं राष्ट्रीय संगठन महासचिव राम लाल

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