
विशेष संवाददाता
Ranchi: लगातार शहरी विस्तार, बढ़ते वाहन स्वामित्व और रांची, धनबाद और जमशेदपुर जैसे शहरों में मौजूदा सड़क ढांचे पर बढ़ते दबाव को देखते हुए झारखंड सरकार इन शहरों में मेट्रो रेल प्रणाली की संभावित शुरूआत पर विचार कर रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश के बाद नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने तीनों शहरों में मेट्रो रेल सेवा प्रारंभ करने के लिए सचिव आवास और शहरी कार्य मंत्रालय भारत सरकार को अनुरोध पत्र लिखा है. प्रधान सचिव ने कहा है कि इसके लिए राज्य सरकार सभी नीति आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है, जिसमें समग्र गतिशीलता योजना (CMP) की तैयारी, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल और वैल्यू कैप्चर फाइनेंसिंग (VCF) के अन्वेषण शामिल हैं, और परियोजना कार्यान्वयन के लिए उपयुक्त संस्थागत ढांचे की स्थापना की दिशा में भी कार्य कर रही है. राज्य सरकार भूमि उपयोग और परिवहन नियोजन के एकीकरण को बढ़ावा देने का भी इरादा रखती है, जैसा कि नीति ढांचे के तहत प्रोत्साहित किया गया है. उपरोक्त के आलोक में, सचिव ने कहा है कि इस संबंध में मुझे यह अनुरोध करने का निर्देश दिया गया है कि मंत्रालय रांची, धनबाद और जमशेदपुर शहरी समूह में मेट्रो रेल प्रणाली के कार्यान्वयन के लिए अनुमोदन प्रदान करे और व्यवहार्यता अध्ययन तथा संरेखण सर्वेक्षण की स्वीकृति दे, ताकि इन शहरों में मेट्रो रेल प्रणालियों की योजना बनाई जा सके. प्रधान सचिव ने इस महत्वपूर्ण राज्य पहल में मंत्रालय के निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन की भी आशा की है. प्रधान सचिव ने कहा है कि राज्य सरकार का प्रस्ताव है कि रांची, धनबाद और जमशेदपुर में मेट्रो रेल प्रणाली के क्रियान्वयन हेतु तत्काल व्यवहार्यता अध्ययन एवं मार्गरेखा सर्वेक्षण किया जाए, जैसा कि मेट्रो रेल नीति, 2017 में प्रावधानित है. ये अध्ययन विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के आधार के रूप में कार्य करेंगे, और प्रस्तावित शहरों में मेट्रो रेल प्रणालियों की वित्तीय, आर्थिक और पर्यावरणीय व्यवहार्यता का मूल्यांकन करेंगे.
रांची, खूंटी, बुंडू शहरी क्षेत्र में 25 लाख, धनबाद व जमशेदपुर में 20 लाख की अनुमानित आबादी
रांची, जो झारखंड की राजधानी और एक महानगरीय क्षेत्र है, उसका शहरी क्षेत्र खूँटी और बुंडू शहरी निकायों सहित 25 लाख की अनुमानित जनसंख्या वाला है. धनबाद, जो राज्य का कोयला क्षेत्र है, उसकी और उसके आसपास के क्षेत्रों की कुल अनुमानित जनसंख्या लगभग 20 लाख है. इसी प्रकार, जमशेदपुर शहरी समूह (जिसमें मानगो नगर निगम, जुगसलाई, जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र और आसपास के क्षेत्र शामिल हैं) की जनसंख्या भी 20 लाख से अधिक है.
इन शहरों में मेट्रो रेल प्रणाली से अपेक्षित लाभ निम्नलिखित हैं
इस संबंध में, राज्य प्रस्तावित मेट्रो मार्गों के साथ ट्रांज़िट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) को बढ़ावा देने की योजना भी बना रहा है, जिसका उद्देश्य उच्च घनत्व, मिश्रित-उपयोग विकास और बेहतर अंतिम-मील कनेक्टिविटी को प्रोत्साहित करना है — जिससे मेट्रो नेटवर्क की समग्र उपयोगिता और स्थिरता को बढ़ाया जा सके.
मेट्रो सिस्टम द्वितीय स्तर की राजधानी शहरों में परिवर्तनकारी भूमिका निभायेगा
क्षेत्र के अन्य शहरों के अनुभव, जैसे कि पटना (बिहार) और भुवनेश्वर (ओडिशा), ने यह स्पष्ट रूप से दिखाया है कि मेट्रो सिस्टम द्वितीय स्तर की राजधानी शहरों में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकते हैं. दोनों परियोजनाएं केंद्रीय सरकार के सहयोग से मेट्रो रेल नीति ढांचे के तहत अच्छी तरह से प्रगति कर रही हैं. झारखंड सरकार भी एक समान एकीकृत, भविष्य-दृष्टि वाली और नीति-संगत दृष्टिकोण को अपनाना चाहती है. रांची, धनबाद और जमशेदपुर शहरी समूह, जो झारखंड के समान प्रकार के शहरी स्थानीय निकायों से बने हैं, ऐसे ही शहरों में शामिल हैं.
झारखंड सरकार शहरी गतिशीलता के सतत समाधान तलाशने हेतु सक्रिय रूप से प्रयासरत है,प्रधान सचिव सुनील कुमार
ताकि तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में यातायात मांग, जाम की स्थिति और पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान किया जा सके. रांची, धनबाद व जमशेदपुर शहर राज्य के प्रमुख आर्थिक और प्रशासनिक केंद्र के रूप में उभर रहे हैं. इनकी बढ़ती जनसंख्या और गतिशीलता आवश्यकताओं को देखते हुए, राज्य सरकार का यह दृढ़ मत है कि एक संरचित, सतत और उच्च क्षमता वाली शहरी परिवहन प्रणाली दीर्घकालिक शहरी गतिशीलता, यात्री सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है.




