
New Delhi: देश के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (कैग) ने जीएसटी के क्रियान्वयन में खामियों को उजागर करते हुए धोखाधड़ी की आशंका जताई है.
वस्तु एवं सेवा कर पर अपनी पहली रिपोर्ट में कैग ने गड़बड़ी का शक जताते हुए नियामक संस्था ने पूछा है कि दो साल बाद भी 2.11 लाख करोड़ रुपए का सेटलमेंट क्यों नहीं हुआ? साथ ही कहा कि दो साल बाद भी इनवॉयस मैचिंग के जरिये इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा उपलब्ध नहीं है.
विस्तृत रिपोर्ट में पृष्ठ संख्या 66 पर ‘आइजीएसटी सेटलमेंट रिपोर्ट्स’ नाम के सेक्शन में कहा गया है कि इंपोर्ट्स और अपील्स जैसे कॉरसपॉन्डिंग जीएसटी मॉड्यूल्स के लागू न हो पाने की वजह से सभी आइजीएसटी (इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) के सेटलमेंट संबंधी लेजर्स नहीं तैयार किए जा सके.
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रिपोर्ट में साफ तौर पर बताया गया है कि साल 2017-18 के दौरान 2.11 लाख करोड़ रुपए के आइजीएसटी बकाये का सेटलमेंट नहीं हो सका, जिसके लिए आशिंक रूप से अधूरे आइजीएसटी लेजर जिम्मेदार थे.
दरअसल, मंगलवार (30 जुलाई, 2019) को कैग रिपोर्ट लोकसभा में पेश हुई थी. कैग ने इसके जरिए स्पष्ट किया है कि जीएसटी के क्रियान्वयन में कई दिक्कतें हैं.
कैग की ताजा रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि जीएसटी लागू किये जाने के दो वर्ष बाद भी इनवॉयस मैचिंग के माध्यम से ‘इन-पुट टैक्स क्रेडिट’ देने की व्यवस्था सुचारु नहीं हो सकी है.
रिपोर्ट में की व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा गया है कि इसी से प्रमुख कर सुधार के पूरा लाभ प्राप्त हो पाएगा. रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी व्यवस्था के स्थिर रहने पर अनुपालन ठीक होगा, लेकिन रिटर्न फाइलिंग में गिरावट दिखायी देता है.
जिस संख्या में जीएसटीआर-3बी रिटर्न दाखिल हो रहे हैं, उसके अनुपात में जीएसटीआर-1 का आंकड़ा बहुत कम है. लोकसभा में पेश कैग रिपोर्ट जीएसटीआर-3बी को दाखिल करने में हो रही कमियों की ओर भी इशारा करती है.
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रेगुलेटरी बॉडी के अनुसार, दखलंदाजी रहित जिस इलेक्ट्रॉनिक टैक्स सिस्टम के बारे में सोचा गया था, वह अबतक पूरा नहीं हो पाया है. वर्ष 2018-19 के दौरान लेखा परीक्षा के आधार पर जीएसटी संबंधी कैग के इस प्रतिवेदन में कहा गया है कि जीएसटी में कर के भुगतान और निपटान की व्यवस्था की अभिकल्पना बिलों के शत प्रतिशत मिलान पर आधारित है.
साथ ही यह इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ देने के साथ-साथ इनवॉयस मैचिंग के साथ आईजीएसटी के निपटान पर आधारित है.
कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि इन दोनों में अभी तक कुछ भी संभव नहीं हुआ है. बिल मिलान प्रणाली को शुरू नहीं किया गया है.
प्रतिवेदन में कहा गया है कि इनवॉयस मैचिंग से ही ‘इस प्रमुख कर सुधार के पूरे लाभ प्राप्त होंगे और इससे केंद्र और राज्य दोनों के कर राजस्व की रक्षा होगी तथा आइजीएसटी के उचित निपटान की ओर बढ़ा जा सकेगा.
रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी से देश भर में कर दरों के साथ-साथ पंजीकरण फार्म, प्रतिदाय और बिल के प्रारूपों में एकरूपता बढी है. ई-वे बिलों ने अधिकतर मानवीय चेक पोस्ट को बदल दिया है.
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