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आपके अखबार ने दी यह सूचना !! स्टील, कोयला समेत आठ कोर सेक्टर में ग्रोथ रेट सिर्फ 0.2 प्रतिशत, 2015 के बाद सबसे कम

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New Delhi : देश में बाघों की संख्या बढ़ गई. हम दुनिया की पाचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन गये. 12 अगस्त को डिस्कवरी चैनल पर देखें जिम कार्बेट में मोदी की फिल्म. दुनिया के सबसे प्रभवाशाली नेता हमारे प्रधानमंत्री. इस तरह की विज्ञापननुमा खबरें पढ़ाने वाले हिन्दी के अखबारों ने आपको एक बड़ी खबर नहीं दी. वह यह कि देश के आठ कोर सेक्टर का ग्रोथ रेट चार साल में सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है.

तमाम कोशिशों के बावजूद उद्योगों की वृद्धि दर में रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है. जून महीने में बुनियादी उद्योगों की रफ्तार सुस्त पड़ गयी है. सुस्त रफ्तार से मोदी सरकार को तगड़ा झटका लगा है. जिसमें आठ कोर उद्योगों की वृद्धि दर जून महीने में घटकर मात्र 0.2 प्रतिशत हो गयी है.

आठ कोर इंडस्ट्री जिनके उत्पादन में आयी कमी

वहीं आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक खनिज तेल, तेल रिफाइनरी और सीमेंट उत्पादन घटने से बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर कम हो गयी है. जारी आंकड़ों के मुताबिक मुख्य रूप से तेल से संबंधित क्षेत्रों में और सीमेंट उत्पादन में कमी के कारण इन आंकड़ों में कमी आयी है.

गौरतलब है कि सरकार ने 31 जुलाई को मई महीने के बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर आंकड़े घटा दिये. जिसके बाद अब यह 4.3 हो गए है. हालांकि इससे पहले यह आंकड़े 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था. आठ कोर उद्योगों का उत्पादन में जून, 2018 में 7.8 प्रतिशत बढ़ा था. जिसमें कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली शामिल हैं.

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औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में आठ बुनियादी उद्योगों का भारांश 40.27 प्रतिशत है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कच्चे तेल का उत्पादन एक साल पहले जून महीने की तुलना में 6.8 फीसदी गिरा वहीं तेल रिफाइनरी उद्योग का उत्पादन सालाना आधार पर 9.3 फीसदी गिरा.

जबकि 2018 के जून महीने में इसी क्षेत्र का उत्पादन 12.1 फीसदी बढ़ा था. जून में प्राकृतिक गैस का उत्पादन घटा. वहीं सीमेंद के उत्पादन में भी एक साल पहले जून महीने से 1.5 फीसदी कम रहा.

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कोयला उत्पादन पिछले साल के मुकाबले काफी कम

समीक्षाधीन महीने में स्टील उत्पादन में 6.9 प्रतिशत व बिजली उत्पादन में 7.3 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गयी. जून में उर्वरक उत्पादन में 1.5 फीसदी की बढ़त दर्ज की गयी, जो कि दो महीने की गिरावट के बाद की है. इस दौरान कोयला उत्पादन 3.2 फीसदी बढ़ा, जो कि 2018 के जून महीने की तुलना में काफी कम है. क्योंकि जून 2018 में कोयला उत्पादन 11.5 फीसदी बढ़ा था.

इधर, इक्रा की प्रमुख अर्थशास्त्री अदिति नायर का कोर उद्योगों के आंकडों पर कहना है कि कोर उद्योग की बढ़त बहुत कम रहने के कारण वाहन उत्पादन व गैर तेल वस्तुओं का निर्यात भी घटा है. जो कि इस बात का संकेत दे रहा है कि 2019 के जून महीने में औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) की वृद्धि दर करीब एक प्रतिशत के आसपास रहेगी. आईआईपी के आंकड़े जूलाई महीने बाद आएंगे. आंकड़ों के आने के बाद 2019 के अगस्त महीने की मौद्रिक समीक्षा में रेपो रेट में कटौती की गुंजाइश बढ़ी है.

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