
Koderma: ढिबरा को लेकर वाहनों की धर पकड़, प्रशासन की सख़्ती और सरकार के ढुलमुल रवैया के खिलाफ ढिबरा स्क्रैप मजदूर संघ ने सोमवार से कोडरमा समाहरणालय के समक्ष अनिश्चित कालीन धरना शुरू किया. धरनास्थल पर हुए सभा की अध्यक्षता कृष्णा सिंह घटवार, जबकि संचालन रीतलाल सिंह, प्रकाश साव ने किया. धरना को ढिबरा स्क्रैप संघ के राजकिशोर सिंह, महेंद्र सिंह, मुखिया सीता देवी, उमा देवी, नारायण सिंह, सोनिया देवी, दिनेश यादव, दुर्गा सिंह ने भी संबोधित किया. वक्ताओं ने कहा कि लाखों ढिबरा मजदूरों के पेट पर जिला प्रशासन और अधिकारी लात मार रहे हैं. ढिबरा मजदूरों पर सीसीए लगाया गया है. यह पूर्णतः तानाशाही निर्णय है और कोडरमा के मान सम्मान के साथ खिलवाड़ है. कृष्णा सिंह ने सांसद अन्नपूर्णा देवी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछले दो दशक से सत्ता एक ही व्यक्ति के पास है. ढिबरा मजदूरों का वोट लेकर विधायक से सांसद बन गए. दल और दिल बदला लेकिन ढिबरा के लिए कभी नही लड़ा. जनता सब समझती है, जो ढिबरा की बात करेगा, वही कोडरमा में आगे राज करेगा. मौके पर संजय कुमार, सरस कुमार बबलू, मो कलीम अंसारी, शिवनारायण राम, विकास कुमार, प्रमोद मोदी, पूनम देवी, नरेश सोरेन, मो फिरोज, रौशन सिंह, शमां प्रवीण, सागर प्रेम, रहीशा प्रवीण, विश्वनाथ राय, महादेव सिंह, शिवशंकर राय, अनिता देवी, बालदेव मुर्मू, अजित वर्णवाल, सुनीता बिरहोरिनी, रामकिशुन यादव, अर्जुन सिंह, रवि कुमार सिंह, महेंद्र सिंह, सूरज कुमार, कलीम अंसारी, सिकंदर यादव, रोहित कुमार, रामस्वरूप सिंह, सुरेश कुमार यादव, रामकिशुन यादव, सोहन यादव, मनोज यादव, विश्वनाथ मोदी समेत हज़ारो लोग मौजूद थे. कोडरमा के जंगली क्षेत्र में रहने वाले ढिबरा मजदूर विभिन्न वाहनों से धरना में शामिल होने समाहरणालय पहुंचे. कोडरमा के गझण्डी, जरगा, बेंदी, सपही, ढोढाकोला, जानपुर, इंदरवा, बंगाखलार, मेघातरी, ताराघाटी, सलैया, बसरौन, करमा, पुरनानगर, नगरखारा, फुलवरिया, नावाडीह के लोगों ने धरना में भाग लिया.

ढिबरा के नाम पर होता है अवैध उत्खनन
कोडरमा जिले में ढिबरा, ब्लू स्टोन और क्रशर- इन्हीं तीन के नाम पर व्यवसाय भी होता है तो राजनीति भी खूब होती है. अभी तीनों की स्थिति बदहाल है, अवैध के नाम पर ब्लू स्टोन का कारोबार बंद करा दिया गया तो वहीं प्रदूषण मानकों के कारण क्रशर का धंधा भी बन्दी के कगार पर है. ढिबरा चुनने पर प्रतिबंध तो नहीं है पर उसे ढोने वाले वाहनों के धर पकड़ के कारण अब लोग इसे चुनने से परहेज करने लगे हैं. पर इसके साथ जो सबसे बड़ी बात सामने आती है वह है ढिबरा के नाम पर अवैध उत्खनन. हाल में कई ऐसे मामले सामने आए जब देखा गया कि वन विभाग के संरक्षण में जंगली इलाकों में ढिबरा के नाम पर जेसीबी के जरिये माईका का अवैध उत्खनन किया जा रहा है. इसमें कई बड़े माफिया भी शामिल हैं जो ढिबरा चुनने को वैधानिक रूप देना भी नहीं चाहते, हांलाकि इस तरह के आंदोलन और धरना प्रदर्शन को फंडिंग जरूर करते हैं.
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