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मेदांता अस्पताल : गंभीर बीमारी योजना के नाम पर मरीजों से लाखों लूटा, कार्रवाई से मरीजों का ही हुआ नुकसान

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Ranchi :  राजधानी का मेदांता अस्पताल आर्थिक अपराध भी करता है. बीपीएल मरीजों के नाम पर सरकार से तो पैसा लेता ही है. मगर मरीजों से भी बिल के नाम पर अवैध तरीके से पैसे लूटता है. इसके बावजूद अस्पताल पर सरकार कार्रवाई करने से बचती है. दिसंबर 2017 और अक्टूबर 2018 के दो रेंडम मामलों को लेने पर पता चला कि अस्पताल ने गंभीर बीमारी योजना के नाम सरकार और मरीज दोनों को ठगने का काम किया है. सरकार से पहले पैसा मिल जाने के बाद भी मरीजों से छह लाख तक ऐंठ लिए गये.

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मामला प्रकाश में आने के बाद अस्पताल पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ अस्पताल का बीपीएल लाइसेंस ही कैंसिल कर दिया गया है. इससे अस्पताल पर कार्रवाई होने जैसा कुछ नहीं हुआ. मरीजों के लूटे हुए पैसे न तो मरीजों को मिले और न ही अस्पताल को मरीजों को लूटने पर रोक ही लगायी गयी.  वहीं इसके उलट मेदांता पर इस कार्रवाई से मरीजों को ही नुकसान हुआ.

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मरीजों ने बतायी आपबीती

गंभीर बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल से पहले एस्टीमेट लेना होता है, एस्टीमेट में पूरी बीमारी के खर्च का ब्यौरा होता है. सिविल सर्जन से पैसा अकाउंट में आने के बाद ही इलाज होता है. पूरा पैसा सरकार से मिलने के बाद भी अस्पताल मरीजों को ठगकर अपने खजाने को अवैध तरीके से भरते रहे.

नाजिर अली नाम के मरीज के इलाज के लिए सिविल सर्जन लातेहार ने एस्टीमेट के हिसाब से पूरे 2 लाख 29 हजार 525 रुपये दे दिये थे. इसके बावजूद अस्पताल की ओर से मरीज के परिजनों से अतिरिक्त 6 लाख की मांग की गयी. इसके अलावा समरी देवी के लिए सिविल सर्जन रांची से 1 लाख 35 हजार मिलने के बाद भी लगभग 25 हजार अतिरिक्त की मांग की गयी थी.

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जो कार्रवाई हुई उससे मरीजों को ही नुकसान हुआ

इन दो मामलों को लेकर मुख्यमंत्री जनसंवाद में शिकायत दर्ज कराया गया. उसके बाद जांच के आदेश भी दिये गये. जांच में आरोप को सही पाया गया, जिसके बाद अस्पताल पर कार्रवाई की गयी. वहीं कार्रवाई के नाम पर सिर्फ अस्पताल से गंभीर बीमारी योजना का एफिलिएशन रद्द कर दिया गया. इस कार्रवाई से अस्पताल से ज्यादा नुकसान मरीजों को हुआ. गंभीर रुप से बीमार पड़ने वाले मरीज अब मेदांता अस्पताल में इलाज से महरुम हो गये.

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